महिला आरक्षण कानून के पूर्ण अनुपालन की मांग को लेकर सड़कों पर उतरा AIPWA; स्टेशन चौक से घंटाघर तक निकाला गया जोरदार मार्च
भागलपुर: महिलाओं को विधायी निकायों में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने और लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण कानून को पूरी ईमानदारी व सख्ती से धरातल पर उतारने की मांग को लेकर देश भर में स्वर मुखर होने लगे हैं। इसी क्रम में भागलपुर जिले में ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (AIPWA - ऐपवा) के बैनਰ तले महिलाओं ने एक जोरदार और ऐतिहासिक मार्च निकाला। यह मार्च शहर के प्रमुख व्यस्त मार्ग से होते हुए गुजरा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकारों के लिए संघर्षरत नेत्रियों ने हिस्सा लिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कानून के जल्द से जल्द और प्रभावी अनुपालन की पुरजोर मांग की।
स्टेशन चौक से शुरू होकर घंटाघर तक गूंजे नारे
विरोध प्रदर्शन और मार्च की शुरुआत भागलपुर के व्यस्ततम इलाके स्टेशन चौक से हुई। रेलवे स्टेशन परिसर के समीप एकत्रित होकर महिलाओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ अपने तेवर दिखाए। इसके बाद मार्च मार्च करते हुए मुख्य मार्गों से गुजरा और शहर के ऐतिहासिक घंटाघर चौक पर एक सभा में तब्दील हो गया।
मार्च के दौरान महिलाओं ने "महिला आरक्षण कानून तुरंत लागू हो", "संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी मिले" और "महिलाओं पर हो रहे अत्याचार बंद हों" जैसे नारे लगाए। रास्ते भर शहरवासियों और दुकानदारों की नजरें इस अनुशासित और सशक्त महिला मार्च पर टिकी रहीं। कई जगहों पर लोगों ने महिलाओं के इस जज्बे की सराहना भी की।
जिला सचिव रेणु देवी के नेतृत्व में हुआ मार्च
इस उग्र और अनुशासित मार्च का कुशल नेतृत्व ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (ऐपवा) की जिला सचिव रेणु देवी ने किया। उनके साथ अन्य प्रमुख महिला नेत्रियों ने भी आंदोलन की कमान संभाल रखी थी।
मार्च के समापन पर घंटाघर चौक पर आयोजित एक नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव रेणु देवी ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
"महिला आरक्षण के नाम पर सिर्फ राजनीतिक दलों द्वारा आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन जब धरातल पर इसे लागू करने की बात आती है, तो हीाल-हवाला किया जाता है। ऐपवा यह कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनके अधिकार के बिना देश का वास्तविक विकास संभव नहीं है। हम सरकार से मांग करते हैं कि बिना किसी और देरी के महिला आरक्षण कानून को पूरी पारदर्शिता के साथ अविलंब लागू किया जाए।"
क्यों उठी महिला आरक्षण कानून के अनुपालन की मांग?
सभा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय राजनीति और नीति-निर्माण के स्तर पर महिलाओं की उपस्थिति आज भी बेहद कम है। हालांकि कागजों और बहसों में महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन जब टिकट बंटवारे या नीतिगत फैसलों की बारी आती है, तो महिलाओं को हाशिए पर धकेल दिया जाता है।
ऐपवा की नेत्रियों ने मांग की कि:
सख्त कानूनी प्रावधान: महिला आरक्षण कानून के अनुपालन में किसी भी प्रकार की तकनीकी अड़चन या राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाना चाहिए।
पंचायती राज से लेकर संसद तक हिस्सेदारी: जिस प्रकार स्थानीय निकायों (पंचायत और नगर निगम) में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिला है और उन्होंने अपनी कार्यकुशलता साबित की है, ठीक उसी तर्ज पर विधानसभा और लोकसभा में भी महिलाओं की सीट सुनिश्चित की जाए।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश: मार्च के दौरान महिलाओं ने देश और राज्य में लगातार बढ़ रही असुरक्षा और महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर भी गहरी चिंता जताई और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग की।
आम जनता और अन्य संगठनों का मिला समर्थन
स्टेशन चौक से घंटाघर तक निकाले गए इस मार्च में विभिन्न वर्ग की महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गृहिणियों से लेकर कामकाजी महिलाओं और युवा छात्राओं ने भी इस आंदोलन में अपनी एकजुटता दिखाई। स्थानीय बुद्धिजीवियों और कई अन्य जनवादी संगठनों ने भी ऐपवा की इस मांग को न्यायसंगत बताते हुए अपना समर्थन दिया है।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा तथा इसे प्रखंड और राज्य स्तर पर फैलाया जाएगा।
महिला अधिकारों की दिशा में एक मजबूत हुंकार
भागलपुर की सड़कों पर ऐपवा की जिला सचिव रेणु देवी के नेतृत्व में निकाला गया यह मार्च इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अब अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो चुकी हैं। स्टेशन चौक से घंटाघर तक गूंजे इन नारों ने एक बार फिर सत्ता के गलियारों तक यह संदेश पहुंचा दिया है कि आधी आबादी अब चुप बैठने वाली नहीं है। महिला आरक्षण कानून के पूर्ण अनुपालन की मांग को लेकर हुआ यह आयोजन भागलपुर के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।