आपदा प्रबंधन की अग्रिम तैयारी: दरभंगा समाहरणालय में डीएम कौशल कुमार ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

बिहार का दरभंगा जिला भौगोलिक दृष्टि से बाढ़ और सुखाड़ दोनों ही आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए, दरभंगा समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी (DM) कौशल कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून की सक्रियता के बीच संभावित बाढ़ और उसके बाद की स्थिति (सुखाड़) से निपटने के लिए जिला प्रशासन की तैयारियों का सूक्ष्म निरीक्षण करना था।

बैठक का मुख्य एजेंडा: संवेदनशीलता और सतर्कता

बैठक में मुख्य रूप से जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) के अभियंताओं, आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों और जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारियों ने भाग लिया। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि आपदा के समय किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

तटबंधों की सुरक्षा: सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक का एक बड़ा हिस्सा जल संसाधन विभाग की तैयारियों की समीक्षा पर केंद्रित था। डीएम कौशल कुमार ने अभियंताओं को निम्नलिखित निर्देश दिए:

संवेदनशील स्थलों की पहचान: जिले के सभी प्रमुख तटबंधों के उन हिस्सों की सूची तैयार की जाए, जो कटाव की दृष्टि से अति-संवेदनशील (Sensitive) हैं।

तटबंधों की मजबूती: तटबंधों पर जी-बैग्स (Geobags), बालू भरी बोरियां और अन्य सुरक्षात्मक सामग्रियों का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए।

सतत निगरानी (Monitoring): तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी के लिए 'फ्लड फाइटिंग' टीमों को सक्रिय करने का आदेश दिया गया है। अभियंताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वर्षा के दौरान जल का दबाव बढ़ते ही त्वरित कार्रवाई की जाए।

संभावित सुखाड़ पर रणनीति: जल संरक्षण

बाढ़ के साथ-साथ, बैठक में सुखाड़ की संभावनाओं पर भी गंभीर चर्चा हुई। पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए डीएम ने स्पष्ट किया कि यदि वर्षा की कमी होती है, तो किसानों को राहत पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए:

सिंचाई के साधनों की जांच: सरकारी नलकूपों की स्थिति की समीक्षा की गई। जो नलकूप खराब हैं, उन्हें तुरंत दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया।

फसल सुरक्षा: किसानों को कम पानी वाली फसलों के बारे में जागरूक करने और कृषि विभाग को बीज वितरण की अग्रिम तैयारी रखने का निर्देश दिया गया।

जल संरक्षण कार्य: मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से तालाबों, आहरों और पइन के जीर्णोद्धार पर जोर दिया गया ताकि जल संचयन किया जा सके।

आपदा प्रबंधन: राहत और बचाव की पुख्ता व्यवस्था

डीएम ने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह से तैयार रहें:

नावों का निबंधन: बाढ़ के समय आवागमन के लिए निजी और सरकारी नावों की सूची अद्यतन (Update) की जाए। नाविकों का संपर्क नंबर और लोकेशन तैयार रखें।

राहत शिविर और सामुदायिक रसोई: संभावित बाढ़ वाले इलाकों में ऊंचे स्थानों पर राहत शिविरों के लिए जगह का चयन कर लिया जाए। सामुदायिक रसोई (Community Kitchen) के संचालन के लिए आवश्यक रसद की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।

चिकित्सा दल: स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया कि बाढ़ के दौरान जलजनित बीमारियों को रोकने के लिए ओआरएस (ORS), क्लोरीन की गोलियां और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

समन्वय और संचार प्रणाली

समीक्षा बैठक में डीएम ने कहा कि बाढ़ के दौरान जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जल संसाधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है।

कंट्रोल रूम: समाहरणालय स्तर पर बने बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए।

सूचनाओं का आदान-प्रदान: निचले इलाकों के लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों के बारे में समय पर सूचित करने के लिए माइकिंग (Miking) और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहायता लेने का निर्णय लिया गया।

स्थानीय अधिकारियों को निर्देश

डीएम कौशल कुमार ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रमण करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा, “बाढ़ आने का इंतजार न करें, बल्कि सुरक्षा के सभी उपाय पहले ही धरातल पर उतार लें।”

दरभंगा समाहरणालय में आयोजित यह बैठक जिले की आपदा तैयारियों की कमर कसने का एक प्रयास है। डीएम कौशल कुमार के निर्देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन 'प्रतीक्षा करो और देखो' की नीति के बजाय 'सक्रिय आपदा प्रबंधन' की नीति पर काम कर रहा है। जल संसाधन विभाग की सतर्कता और जिला प्रशासन की दूरदर्शिता ही आने वाले मानसून में जन-धन की रक्षा करने में सक्षम होगी। दरभंगा के नागरिकों को भी चाहिए कि वे इस संकट की घड़ी में प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें और सतर्क रहें।