मुजफ्फरपुर में अत्याचार के मामलों पर प्रशासन सख्त: डीएम कुमार गौरव ने एससी-एसटी उत्पीड़न के खिलाफ 'शून्य सहिष्णुता' नीति का किया ऐलान, अधिकारियों को दिए त्वरित न्याय और लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) के खिलाफ होने वाले अपराधों और अत्याचारों पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अब बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। जिला प्रशासन की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कमजोर वर्गों के उत्पीड़न को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी (DM) कुमार गौरव ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान एससी-एसटी अत्याचार के मामलों के खिलाफ 'शून्य सहिष्णुता' (Zero Tolerance) की नीति अपनाने की आधिकारिक घोषणा की है। डीएम ने सभी संबंधित विभागों और पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे पीड़ितों को बिना किसी विलंब के त्वरित न्याय दिलाएं और वित्तीय सहायता के साथ-साथ लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें।

एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की समीक्षा और कड़े निर्देश

जिला मुख्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में डीएम कुमार गौरव ने एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की अद्यतन प्रगति की गहन समीक्षा की। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक महकमे के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पीड़ितों को त्वरित न्याय की प्राथमिकता: डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज के वंचित और शोषित वर्ग के लोगों को न्याय दिलाने में किसी भी तरह की हीला-हवाली या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। थानों से लेकर न्यायालय स्तर तक की प्रक्रिया को संवेदनशील और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।

लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन: समीक्षा के दौरान जिन मामलों में चार्जशीट या अनुसंधान लंबे समय से लंबित पाए गए, उन पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं (Investigating Officers) को निर्देश दिया कि वे तय समय-सीमा के भीतर अपनी जांच पूरी कर अदालत में आरोप पत्र समर्पित करें, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।

वित्तीय सहायता और मुआवजा वितरण में तेजी लाने के निर्देश

एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता और पुनर्वास लाभ को समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

तत्काल राहत राशि का प्रावधान: बैठक में यह बात सामने आई कि कई मामलों में कागजी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे में देरी हो जाती है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने समाज कल्याण विभाग और जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया कि घटना की पुष्टि होते ही पीड़ितों को नियमानुसार पहली किस्त की वित्तीय सहायता तुरंत उनके खातों में ट्रांसफर की जाए।

सरकारी योजनाओं का लाभ: डीएम ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रताड़ना के शिकार हुए परिवारों को सरकार की अन्य पुनर्वास योजनाओं, पेंशन और सुरक्षात्मक लाभों से भी प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

अधिकारियों के लिए कार्यशाला और संवेदनशीलता पर जोर

प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और असंवेदनशीलता को खत्म करने के लिए डीएम ने पुलिस अधिकारियों और थानों प्रभारियों को विशेष तौर पर संवेदनशील बनने की हिदायत दी है।

थानों में प्राथमिकता से दर्ज हों मामले: डीएम ने निर्देश दिया कि यदि एससी-एसटी समुदाय से जुड़ा कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचता है, तो उसकी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में कोई आनाकानी नहीं होनी चाहिए। मामलों को दबाने या रफा-दफा करने की कोशिश करने वाले पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई की गाज गिरेगी।

मासिक समीक्षा बैठक: जिला स्तर पर अब हर महीने एससी-एसटी अत्याचार निवारण मामलों की मॉनिटरिंग की जाएगी, जिसकी सीधी रिपोर्ट डीएम कार्यालय को सौंपी जाएगी। इससे मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और पारदर्शिता बनी रहेगी।

समाज में संदेश और न्याय प्रणाली में बढ़ता विश्वास

जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम से मुजफ्फरपुर जिले में अपराधियों और दबंगों के बीच हड़कंप मच गया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने डीएम कुमार गौरव की इस घोषणा का स्वागत करते हुए इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

शून्य सहिष्णुता की यह नीति न सिर्फ पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने में मददगार साबित होगी, बल्कि यह समाज के कमज़ोर वर्गों के भीतर सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करेगी। मुजफ्फरपुर प्रशासन का यह स्पष्ट संदेश है कि कानून तोड़ने वाले और कमजोरों पर जुल्म ढाने वाले कितने भी ताकतवर क्यों न हों, वे कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे।