भागलपुर में 9 अगस्त को फॉगसी द्वारा मनाया जाएगा 'अभया दिवस' महिला डॉक्टरों की सुरक्षा, गरिमा और कार्यस्थल पर सम्मान को लेकर देशव्यापी संकल्प

भागलपुर/विशेष संवाददाता: देशभर के साथ-साथ बिहार के ऐतिहासिक सिल्क सिटी भागलपुर में भी चिकित्सा जगत से जुड़ी संस्था फॉगसी (FOGSI - Federation of Obstetric and Gynaecological Societies of India) के तत्वावधान में आगामी 9 अगस्त को 'अभया दिवस' के रूप में बेहद गंभीरता और संकल्प के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य महिला चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उनके कार्यस्थल पर उनके सम्मान, गरिमा और सुरक्षा अधिकारों को बढ़ावा देना है। यह दिन किसी जश्न का नहीं, बल्कि एक महिला डॉक्टर के साथ हुई बर्बर बलात्कार और जघन्य हत्या की उस दुखद घटना की स्मृति में आत्ममंथन और कड़े सुरक्षा उपाय मांगने का दिन है, जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था।

क्यों मनाया जाता है 'अभया दिवस'? पृष्ठभूमि और उद्देश्य

चिकित्सा पेशा, जिसे हमेशा से मानवता की सेवा और भगवान के बाद दूसरा रूप माना जाता रहा है, आज के समय में डॉक्टरों, विशेषकर महिला चिकित्सकों के लिए असुरक्षित होता जा रहा है।

कोलकाता की घटना की याद: कुछ समय पूर्व देश के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर (जिसे 'अभया' नाम दिया गया) के साथ हुई क्रूरतापूर्ण बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे देश के चिकित्सा समुदाय को हिलाकर रख दिया था।

सुरक्षा और न्याय की मांग: उस भयावह घटना की बरसी या उसकी स्मृति में फॉगसी और देश के तमाम मेडिकल संगठनों ने हर साल 9 अगस्त को 'अभया दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य केवल उस दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर हर महिला के लिए एक सुरक्षित, भयमुक्त और गरिमापूर्ण वातावरण तैयार करने के लिए आवाज बुलंद करना है।

भागलपुर में फॉगसी की तैयारियां और प्रमुख कार्यक्रम

भागलपुर में फॉगसी से जुड़ी महिला स्त्री रोग विशेषज्ञों, डॉक्टरों और स्वास्थ्य संगठनों ने इस दिन को एक बड़े जागरूकता अभियान के रूप में मनाने की रूपरेखा तैयार की है। शहर के प्रमुख अस्पतालों, नर्सिंग होम और आईएमए (IMA) हॉल में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा:

शोक सभा और मौन कैंडल मार्च: सुबह के सत्र में दिवंगत 'अभया' और अन्य पीड़ित स्वास्थ्य कर्मियों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा जाएगा और शाम को डॉक्टरों द्वारा कैंडल मार्च निकालकर सुरक्षा की मांग दोहराई जाएगी।

कार्यशाला और संगोष्ठी: अस्पतालों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों, आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) की सक्रियता और सुरक्षा मानकों पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।

प्रशासनिक मांग पत्र: इस अवसर पर भागलपुर के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें अस्पतालों के भीतर और नाइट ड्यूटी के दौरान महिला डॉक्टरों व स्टाफ के लिए विशेष सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की जाएगी।

कार्यस्थल पर सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों की दरकार

भागलपुर फॉगसी इकाई की प्रमुख वक्ताओं का कहना है कि महिला डॉक्टर अपनी जान जोखिम में डालकर आपातकालीन सेवाओं, प्रसव कक्ष (Labour Room) और नाइट शिफ्ट में अपनी सेवाएं देती हैं, लेकिन इसके बावजूद कई अस्पतालों में बुनियादी सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।

नाइट ड्यूटी सुरक्षा: रात के समय ड्यूटी करने वाली महिला चिकित्सकों के लिए अलग से विश्राम कक्ष, उचित प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा गार्ड्स की अनिवार्य तैनाती होनी चाहिए।

जीरो टॉलरेंस नीति: अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ होने वाली बदसलूकी या हिंसा के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

चिकित्सा जगत का संदेश: सुरक्षा के बिना संभव नहीं सेवा

'अभया दिवस' के माध्यम से भागलपुर का पूरा चिकित्सा समुदाय यह संदेश देना चाहता है कि जब तक देश की नारी और महिला डॉक्टर सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक एक स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। यह दिन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था को झकझोर कर यह याद दिलाने का अवसर है कि कार्यस्थल पर हर महिला का सम्मान और उसकी शारीरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।