मुजफ्फरपुर में नम आंखों से दी गई अंतिम विदा: सिकंदरपुर मुक्तिधाम में हुआ रिटायर्ड बैंककर्मी अशोक कुंवर और उनकी पत्नी नीलम कुंवर का अंतिम संस्कार

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मिठनपुरा थाना क्षेत्र के रामबाग इलाके में हुए चर्चित और सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड के बाद पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई है। इस अत्यंत दर्दनाक और वीभत्स घटना में मारे गए पंजाब नेशनल बैंक के सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) कैशियर अशोक कुंवर और उनकी पत्नी नीलम कुंवर के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। गमगीन माहौल और भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध सिकंदरपुर मुक्तिधाम में दोनों का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दुखद अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, रिश्तेदार, शुभचिंतक और शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

बेंगलुरु से पहुंचे पुत्र निखिल ने दी मुखाग्नि

इस हृदय विदारक घटना के दौरान सबसे मर्मस्पर्शी क्षण वह था जब दंपति के इकलौते पुत्र निखिल कुंवर ने अपने माता-पिता को मुखाग्नि दी। निखिल पेशे से इंजीनियर हैं और घटना की सूचना मिलने पर तुरंत बेंगलुरु से मुजफ्फरपुर पहुंचे थे। एक ही घर से माता और पिता दोनों की एक साथ उठी अर्थी और दोनों की चिता को एक साथ जलता देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। माता-पिता के साए से पूरी तरह वंचित हो चुके निखिल के क्रंदन और विलाप से मुक्तिधाम में मौजूद हर व्यक्ति का कलेजा फट पड़ा। रिश्तेदारों ने रोते-बिलखते पुत्र को ढांढस बंधाया और इस असहनीय दुख की घड़ी में उसेसंभाला।

शोक की लहर और उमड़ी लोगों की भीड़

घटना की सूचना जैसे ही पूरे जिले में फैली, शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। अशोक कुंवर अपने मिलनसार और शांत स्वभाव के लिए जाने जाते थे, जबकि उनकी पत्नी नीलम कुंवर भी सामाजिक और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। इस दोहरे हत्याकांड से केवल उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा मोहल्ला और बैंककर्मी संघ भी गहरे सदमे में है। सिकंदरपुर मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के वक्त रामबाग और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों लोग पहुंचे। हर किसी की जुबान पर बस यही सवाल था कि आखिर एक शांत और बुजुर्ग दंपती से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है, जो इस हद तक बेरहमी से उनकी जान ले ली गई।

पुलिस सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार और जांच का दबाव

अंतिम संस्कार के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इस बीच, पुलिस और एसआईटी (SIT) की टीमें लगातार हत्यारों की सुरागकशी में जुटी हुई हैं। परिवार और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस दोहरे हत्याकांड के असली मास्टरमाइंड और हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए ताकि मृतकों की आत्मा को शांति मिल सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

एक शहर की सामूहिक संवेदना

अशोक कुंवर और नीलम कुंवर का इस तरह दुनिया से चले जाना मुजफ्फरपुर के लिए एक अपूरणीय क्षति बन गया है। सिकंदरपुर मुक्तिधाम में उठी चिता की लपटें न केवल दो जिंदगियों के अंत का प्रतीक थीं, बल्कि समाज में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही थीं। नम आंखों और भारी मन के साथ सभी ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।