बिहार में भूमि सुधार का क्रांतिकारी कदम: राजस्व कर्मचारियों का घर-घर जाकर दाखिल-खारिज और जमाबंदी सुधार अभियान
बिहार में भूमि प्रबंधन और राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, सरल तथा जनता के अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व पहल की शुरुआत की है। अक्सर यह देखने में आता था कि मृत रैयतों (भूमि स्वामियों) के नाम पर वर्षों तक पुरानी जमाबंदी लंबित रहती थी। इसके कारण परिवारों के भीतर आपसी विवाद, अदालती मुकदमेबाजी और सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं या कृषि लाभों को प्राप्त करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आम जनता को अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते थे और कई बार बिचौलियों या दलालों के शोषण का शिकार होना पड़ता था। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के रूप में अब खुद राजस्व कर्मचारी घर-घर जाकर उत्तराधिकार और बंटवारे से जुड़े दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं।
पुरानी समस्या: मृत रैयतों के नाम पर लंबित जमाबंदी का संकट
किसी भी परिवार में जब जमीन के असली मालिक या पूर्व रैयत की मृत्यु हो जाती है, तो उनके कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम पर जमीन का नामান্তরण (Mutation या दाखिल-खारिज) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। लेकिन जागरूकता की कमी, जटिल कागजी कार्रवाई और अंचल कार्यालयों की उदासीनता के कारण यह प्रक्रिया वर्षों तक लंबित पड़ी रहती थी।
पारिवारिक कलह और विवाद: एक ही जमीन पर कई दावेदार होने या समय पर वंशीय उत्तराधिकार (Succession) दर्ज न होने के कारण भाई-बहनों और रिश्तेदारों के बीच खूनी संघर्ष या पारिवारिक कलह आम बात हो गई थी।
मुकदमेबाजी का बोझ: अदालतों में जमीन से जुड़े दीवानी मुकदमे (Civil Suits) का एक बड़ा हिस्सा इसी बात से जुड़ा होता है कि मृत व्यक्ति की संपत्ति का सही बंटवारा या नाम परिवर्तन समय पर कानूनी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाता।
सरकारी योजनाओं में बाधा: पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल सहायता योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या अन्य कृषि व भूमि आधारित सरकारी लाभों को प्राप्त करने के लिए जीवित और अपडेटेड रैयत के रूप में संबंधित व्यक्ति का नाम पोर्टल पर होना जरूरी होता है। पुरानी जमाबंदी होने के कारण किसान इन लाभों से वंचित रह जाते थे।
नई व्यवस्था: राजस्व महा-अभियान और घर-घर पहुंच रहे कर्मचारी
इस विकट प्रशासनिक अड़चन को खत्म करने के लिए बिहार सरकार ने राजस्व महा-अभियान का दायरा व्यापक करते हुए मैदानी स्तर पर काम शुरू किया है। इसके तहत अब राजस्व कर्मचारी और हल्का कर्मचारी सीधे जनता के द्वार पर पहुंच रहे हैं।
घर-घर जाकर दस्तावेज और प्रपत्र वितरण: राजस्व कर्मी घर-घर जाकर लोगों को उत्तराधिकार दाखिल-खारिज (Succession Mutation) और पारिवारिक बंटवारा दाखिल-खारिज से जुड़े फॉर्म और पैम्फलेट उपलब्ध करा रहे हैं।
जमाबंदी प्रतियों की उपलब्धता: ऑनलाइन कंप्यूटरीकृत पंजी-2 और पुरानी जमाबंदी की प्रतियां सीधे रैयतों के हाथों में सौंपी जा रही हैं, ताकि लोग यह जांच सकें कि उनके पूर्वजों के रिकॉर्ड में कोई गलती या कमी तो नहीं है।
ऑन-स्पॉट आवेदन और सुधार: यदि किसी दस्तावेज या जमाबंदी की प्रविष्टि में कोई त्रुटि मिलती है, तो कर्मचारियों द्वारा मौके पर ही उसका संज्ञान लिया जा रहा है और परिमार्जन या सुधार के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।
प्रक्रिया का स्वरूप: उत्तराधिकार और बंटवारे का सरलीकरण
सरकार ने 'बिहारभूमि' पोर्टल पर डिजिटल व्यवस्था को और अधिक सुगम बना दिया है। घर-घर चल रहे इस अभियान के दौरान कर्मचारियों द्वारा निम्नलिखित चरणों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
उत्तराधिकार नामांतरण (Inheritance Mutation): मृत रैयत के सभी कानूनी वारिसों (बेटे, बेटी, पत्नी आदि) की सहमति और वंशावली के आधार पर बिना किसी शुल्क या परेशानी के नाम दर्ज करने की कार्रवाई शुरू की जाती है।
बंटवारा नामांतरण (Partition Mutation): यदि परिवार के लोग आपसी सहमति से जमीन का हिस्सा तय करना चाहते हैं, तो उसका फॉर्म भरकर डिजिटल रिकॉर्ड में अलग-अलग प्लॉट और रकबा दर्ज किया जाता है।
शपथ पत्र और साक्ष्य: अभियान के दौरान ही आवश्यक शपथ पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े कागजात एकत्र कर लिए जाते हैं, जिससे रैयतों को बार-बार दफ्तर के चक्कर न काटने पड़ें।
आम जनता पर प्रभाव और भविष्य की राह
सरकार के इस जनता-केंद्रित अभियान से ग्रामीण क्षेत्रों में अभूतपूर्व सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। भूमि विवादों के मुकदमों में भारी कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि जब जमीन का रिकॉर्ड घर बैठे पारदर्शी तरीके से दुरुस्त हो जाएगा, तो मनमानी गुंजाइश स्वतः समाप्त हो जाएगी। अंचल कार्यालयों में बिचौलियों का प्रभाव टूटने लगा है और शासन-प्रशासन की छवि एक मददगार व्यवस्था के रूप में उभर रही है। यदि इस अभियान को पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू रखा जाए, तो बिहार की भूमि व्यवस्था देश के लिए एक मिसाल बन सकती है।