पीजी गणित विभाग के मुख्य द्वार पर कचरे का अंबार, छात्रों का जीना मुहाल

भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) का परिसर, जिसे ज्ञान का मंदिर माना जाता है, इन दिनों अपनी बदहाली के कारण चर्चा में है। विश्वविद्यालय के पीजी गणित विभाग के मुख्य प्रवेश द्वार पर पसरे कचरे के ढेर ने न केवल विभाग की गरिमा को धूमिल किया है, बल्कि वहां के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या खड़ी कर दी है। आलम यह है कि कचरे की दुर्गंध और गंदगी के बीच से होकर गुजरना विद्यार्थियों की मजबूरी बन गया है।

बारिश ने बढ़ाई मुसीबत: गंदगी और जलजमाव का दोहरा मार

पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने स्थिति को और भी भयावह बना दिया है। गणित विभाग के गेट के सामने पड़े कचरे में बारिश का पानी मिल जाने से वह 'सीवर' जैसी दुर्गंध छोड़ रहा है। इस जलजमाव और कचरे के कारण वहां पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

स्वास्थ्य का खतरा: कचरे के ढेर पर मच्छरों और मक्खियों का बसेरा बन गया है। विभाग में आने वाले शोधार्थी और छात्र इस बदबू के कारण सांस लेने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो, इस तरह के अस्वच्छ वातावरण से हैजा, टाइफाइड और डेंगू जैसी जलजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है।

आवाजाही में अवरोध: गणित जैसे गंभीर विषय की पढ़ाई करने वाले छात्र जब अपनी कक्षा के लिए निकलते हैं, तो उन्हें कचरे के ढेर से बचकर निकलना पड़ता है। अक्सर छात्रों के कपड़े गंदे हो जाते हैं या वे फिसलन के कारण चोटिल हो जाते हैं।

विभाग की चुप्पी और प्रशासनिक उदासीनता

पीजी गणित विभाग के सूत्रों की मानें तो इस समस्या की जानकारी कई बार विश्वविद्यालय के स्वच्छता विभाग (Sanitation Department) और संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है। विभागाध्यक्ष कार्यालय की ओर से भी लिखित शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अफसोस की बात यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूटी है।

गणित विभाग के एक वरिष्ठ छात्र ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम यहां उच्च शिक्षा के लिए आते हैं, लेकिन यहां का माहौल हमें बीमारी की ओर धकेल रहा है। क्या विश्वविद्यालय प्रशासन को यह गंदगी दिखाई नहीं देती? या फिर वे किसी बड़ी दुर्घटना या बीमारी के फैलने का इंतजार कर रहे हैं?"

शिक्षा के मंदिर में स्वच्छता का अभाव: कौन है जिम्मेदार?

यह स्थिति तब है जब विश्वविद्यालय में नियमित रूप से स्वच्छता अभियान और परिसर सौंदर्यीकरण के दावे किए जाते हैं। गणित विभाग के प्रवेश द्वार पर कूड़े का गिरना प्रशासन की मॉनिटरिंग प्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।

सफाईकर्मियों का अभाव: विश्वविद्यालय में सफाई के लिए जो एजेंसी नियुक्त है, उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्या एजेंसी के कर्मचारी केवल नाममात्र के लिए आते हैं? या फिर उन्हें विभाग की तरफ से कोई सख्त निर्देश नहीं दिए जा रहे हैं?

निगरानी की कमी: विश्वविद्यालय का 'क्लीन कैंपस, ग्रीन कैंपस' का नारा क्या केवल फाइलों तक सीमित है? जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर से आंखें मूंद लेना घोर लापरवाही को दर्शाता है।

विद्यार्थियों की मांग: तत्काल सफाई और स्थायी समाधान

गणित विभाग के छात्र संगठन और विभिन्न छात्र संघों ने इस मामले को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। उनकी मांगें स्पष्ट हैं:

तत्काल स्वच्छता: अगले 24 घंटों के भीतर विभाग के मुख्य द्वार और आसपास के क्षेत्र की मुकम्मल सफाई की जाए।

नियमित कचरा उठाव: विभाग के बाहर कचरा संग्रहण का कोई स्थायी स्थान (Dump yard) निर्धारित किया जाए, ताकि गेट पर कचरा न फेंका जाए।

जवाबदेही तय हो: जो अधिकारी या सफाई एजेंसी इस गंदगी के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर जुर्माना लगाया जाए या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

 'एकेडमिक एक्सीलेंस' बनाम 'कचरे का ढेर'

एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के मुख्य विभागों में शामिल गणित विभाग की यह दुर्दशा न केवल यहां पढ़ने वाले छात्रों के मनोबल को गिरा रही है, बल्कि भागलपुर की शैक्षणिक साख को भी नुकसान पहुंचा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन को यह समझना होगा कि एक स्वस्थ और स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण ही छात्र के सर्वांगीण विकास की पहली शर्त है।

अब देखना यह है कि प्रशासन कब हरकत में आता है और कब गणित विभाग के छात्रों को इस बदबूदार कचरे के ढेर से मुक्ति मिलती है। अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो यह गंदगी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक चेहरे पर एक गहरा दाग बनकर रह जाएगी, जिसके लिए आने वाली पीढ़ियां उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी।