मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच में चिकित्सा जगत की बड़ी सफलता: न्यूरो विभाग के डॉक्टरों ने मोतिहारी की अनीता देवी का किया जटिल और सफल ब्रेन ऑपरेशन
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले स्थित प्रतिष्ठित श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के कुशल और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने गंभीर रूप से घायल एक महिला मरीज का सफल ब्रेन ऑपरेशन (मस्तिष्क की शल्य चिकित्सा) कर उसे नया जीवनदान दिया है। मोतिहारी जिले की रहने वाली इस महिला मरीज के सिर में गंभीर चोट लगने के कारण दिमाग में खून का थक्का जम गया था, जिसे डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी के जरिए सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। एसकेएमसीएच में इस प्रकार की जटिल न्यूरोसर्जरी की सफलता ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता के भरोसे को और मजबूत किया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे पहुँचाया गया अस्पताल?
बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले की रहने वाली अनीता देवी को कुछ समय पहले किसी दुर्घटना या गंभीर चोट के कारण सिर में अंदरूनी रूप से भारी आघात (Severe Head Injury) लगा था। चोट इतनी गहरी थी कि शुरुआती प्राथमिक उपचार के बाद भी उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई।
गंभीर स्थिति में भर्ती: परिजनों ने जब उनकी बिगड़ती हालत को देखा, तो उन्हें तुरंत बेहतर इलाज के लिए मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच (SKMCH) में लाकर भर्ती कराया।
सीटी स्कैन से हुआ खुलासा: अस्पताल के आपातकालीन विभाग में पहुँचने पर डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को भांपते हुए तुरंत उनके सिर का सीटी स्कैन (CT Scan) कराने की सलाह दी। जब सीटी स्कैन की रिपोर्ट सामने आई, तो डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई, क्योंकि रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से यह पुष्टि हुई कि सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मरीज के मस्तिष्क (ब्रेन) के अंदर खून का खतरनाक थक्का (Blood Clot / Hematoma) जम चुका था, जो धीरे-धीरे उनके दिमाग पर भारी दबाव बना रहा था।
न्यूरो विभाग की टीम द्वारा जटिल ब्रेन ऑपरेशन की प्रक्रिया
मस्तिष्क में खून का थक्का जमने के कारण मरीज की जान पर हर पल बड़ा खतरा मंडरा रहा था। ऐसी आपातकालीन स्थिति में एसकेएमसीएच के न्यूरोसर्जरी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए तुरंत एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया और मरीज की सर्जरी करने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम: न्यूरोसर्जरी विभाग के कुशल सर्जनों और एनेस्थीसिया (निश्चेतना) विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने मिलकर इस बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।
सर्जनों की सूझबूझ: डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेन सर्जरी अपने आप में बेहद संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया होती है, खासकर तब जब मरीज को गंभीर हेड इंजरी हो। चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी और आधुनिक चिकित्सीय उपकरणों का उपयोग करते हुए खोपड़ी के उस हिस्से की सर्जरी की, जहां खून का थक्का जमा हुआ था।
सफलतापूर्वक थक्का बाहर निकाला: घंटों चली इस नाज़ुक शल्य चिकित्सा के दौरान डॉक्टरों ने दिमाग पर दबाव बना रहे खून के थक्के को पूरी तरह से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के बाद मरीज को ऑब्जर्वेशन (निगरानी) के लिए विशेष कक्ष में रखा गया, जहां धीरे-धीरे उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
एसकेएमसीएच में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक मील का पत्थर
इस सफल ऑपरेशन के बाद अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की टीम में खुशी का माहौल है। चिकित्सकों ने बताया कि समय रहते सीटी स्कैन कराना और तुरंत सही निर्णय लेना मरीज की जान बचाने में सबसे बड़ा मददगार साबित हुआ।
गरीब मरीजों के लिए वरदान: मोतिहारी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़े निजी अस्पतालों में न्यूरोसर्जरी का खर्च उठाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में एसकेएमसीएच जैसे सरकारी संस्थान में इस प्रकार के उच्च स्तरीय और जटिल ब्रेन ऑपरेशन का सफलतापूर्वक होना क्षेत्र के आम नागरिकों के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है।
अस्पताल की बढ़ती साख: पिछले कुछ समय से एसकेएमसीएच के न्यूरो विभाग और अन्य स्पेशलाइज्ड विभागों में लगातार इस तरह के गंभीर और जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं, जिससे उत्तर बिहार के मरीजों को अब इलाज के लिए बड़े महानगरों या महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल रही है। अनीता देवी के सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उचित संसाधन और कुशल मार्गदर्शन मिलने पर सरकारी अस्पताल भी जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं।