नवगछिया में आस्था का महाकुंभ बिहुला-विषहरी पूजा की भव्य तैयारी, 'हर घर दीप' से जगमगाएगा अंग क्षेत्र
नवगछिया (भागलपुर): अंग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और लोक आस्था के सबसे बड़े महापर्व 'बिहुला-विषहरी पूजा' को लेकर नवगछिया पूरी तरह तैयार है। इस वर्ष यह त्योहार 17 और 18 अगस्त को अत्यंत भव्यता और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस आयोजन को लेकर पूरे शहर में उत्साह का माहौल है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
राजकीय सम्मान और विशेष संयोग
बिहार सरकार द्वारा बिहुला-विषहरी पूजा को राजकीय सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल करने के बाद, इस वर्ष का आयोजन और भी ऐतिहासिक हो गया है। बिहुला पूजा के सेवक मुकेश राणा ने बताया कि इस बार 17 अगस्त को सावन की तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस पूजा का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।
पूजा के मुख्य कार्यक्रम और तिथियां
पूजा समारोह समिति के अनुसार, तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का स्वरूप इस प्रकार होगा:
16 अगस्त (मड़वा पूजन): पर्व की शुरुआत मड़वा पूजन के साथ होगी, जिसमें बिहुला-विषहरी से जुड़ी पारंपरिक रीतियां निभाई जाएंगी।
17 अगस्त (प्रतिमा पूजन और भव्य बारात): इस दिन मुख्य प्रतिमाओं की स्थापना और पूजन होगा। शाम के समय माता बिहुला के सम्मान में 'हर घर एक दीप' जलाने का महाअभियान चलाया जाएगा। देर शाम बाला लखेंद्र की भव्य बारात निकाली जाएगी, जिसमें सती बिहुला की गाथा दर्शाती आकर्षक झांकियां मुख्य आकर्षण होंगी।
18 अगस्त (विसर्जन): दो दिवसीय भव्य समारोह का समापन 18 अगस्त की शाम को प्रतिमा विसर्जन के साथ होगा।
'हर घर एक दीप' अभियान से जुड़ेगा पूरा शहर
इस बार पूजा समिति और सामाजिक संस्थाओं ने 'हर घर एक दीप' अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। सदस्य घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि 17 अगस्त की शाम पूरा नवगछिया माता बिहुला के सम्मान में दीपों की रोशनी से जगमगा उठे। इसके अतिरिक्त, शहर के मुख्य चौक-चौराहों को रंगोली और आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया जाएगा।
लोक आस्था और मंजूषा कला का संगम
बिहुला-विषहरी पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह अंग प्रदेश की 'मंजूषा कला' का भी जीवंत प्रदर्शन है। पंडालों में मंजूषा पेंटिंग के माध्यम से सती बिहुला और बाला लखेंद्र की अमर प्रेम कथा को दर्शाया जाएगा। नाग देवता और माता मनसा (विषहरी) की पूजा के माध्यम से श्रद्धालु अपने परिवार की सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था
समिति के अध्यक्ष बिमल किशोर पोद्दार की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि पूजा के दौरान पंडाल के समीप 24 घंटे का संकीर्तन किया जाएगा। पूजा को भव्य बनाने के साथ-साथ शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध भी किए जा रहे हैं।
नवगछिया वासियों के लिए बिहुला का आगमन एक बेटी के अपने मायके आने जैसा होता है। इस वर्ष पूजा को और अधिक जनमानस तक पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि अंग क्षेत्र की यह ऐतिहासिक परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक पूरी गरिमा के साथ बनी रहे।