मन्नत पूरी होने पर एक भक्त ने अपनी बेटी को डलिया में बैठाकर शुरू की देवघर की कठिन यात्रा, नेपाल और बंगाल से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी लगाई डुबकी

सुल्तानगंज (संवाद सूत्र): विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के दौरान बिहार के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट से बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर की ओर कांवरियों के जाने का सिलसिला परवान पर है। सावन के इस पवित्र महीने में शिव भक्तों की अटूट आस्था और अनूठे विश्वास के नजरे हर तरफ देखने को मिल रहे हैं। शुक्रवार को अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) की पावन धरा पर एक ऐसा ही मार्मिक और अनोखा दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। मन्नत पूरी होने पर एक श्रद्धालु ने अपनी छोटी सी बेटी को टोकरी (डलिया) में बैठाकर कांवर के साथ देवघर की कठिन और लंबी पैदल यात्रा की शुरुआत की। इस दृश्य ने यह साबित कर दिया कि भगवान के प्रति सच्ची निष्ठा और अटूट विश्वास के आगे बड़ी से बड़ी कठिनाइयां भी बौनी साबित हो जाती हैं।

मन्नत का अनोखा सफर: बेटी को डलिया में बैठाकर रवाना हुआ भक्त

श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों के जत्थे में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की कहानियां अपने आप में प्रेरणादायक होती हैं, लेकिन शुक्रवार को सुल्तानगंज में जो देखने को मिला, वह अनूठा था:

मनोकामना पूर्ण होने पर पूरी की मन्नत: जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु ने भगवान भोलेनाथ से अपनी किसी विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना की थी। मन्नत पूरी होने के बाद अपनी आस्था की अटलता को दर्शाते हुए उन्होंने अपनी लाड़ली बेटी को एक पारंपरिक डलिया में सुरक्षित रूप से बैठाया और कांवड़ यात्रा शुरू की।

भक्त का बयान: अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान भावुक नजर आए भक्त ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "बाबा बैद्यनाथ महादानी हैं। वे अपने हर सच्चे भक्त की पुकार सुनते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मेरी मन्नत पूरी हुई है, इसलिए मैं अपनी पुत्री को डलिया में बैठाकर सपरिवार बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने जा रहा हूँ।"

दर्शकों में कौतूहल और श्रद्धा: इस अनोखे अंदाज में यात्रा कर रहे इस परिवार को देखने के लिए गंगा तट और रास्ते भर लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस पिता की अटूट आस्था की सराहना करता नजर आया।

नेपाल और बंगाल के श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में लगाई डुबकी

शुक्रवार को सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट पर सिर्फ स्थानीय या राज्य के ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और अंतर्राज्यीय सीमाओं को लांघकर पहुंचे शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा:

नेपाल से पहुंचे श्रद्धालु: नेपाल के विभिन्न जिलों से आए दर्जनों कांवरियों के जत्थे ने शुक्रवार की सुबह हर-हर महादेव के जयकारों के साथ पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाई। नेपाली श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्हें बाबा बैद्यनाथ के दरबार की यह यात्रा हर साल खींच लाती है। नेपाल से आए भक्तों ने पारंपरिक वस्त्रों में गंगा जल भरकर अपनी यात्रा का श्रीगणेश किया।

पश्चिम बंगाल के कांवरियों का जोश: इसके अलावा पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल (जैसे कोलकाता, हावड़ा, वर्धमान औरर बांकुरा) से पहुंचे हजारों की संख्या में कांवरियों ने भी गंगा तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। बंगाल के पारंपरिक लोक गीतों और बम-बम भोले की गूंज से पूरा सुल्तानगंज क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

गंगा तट से लेकर कांवरिया पथ तक गूंज रहा है बोल-बम का नारा

सुल्तानगंज से देवघर तक की लगभग 105 किलोमीटर लंबी कांवर यात्रा के पहले दिन यानी जल भरने के चरण में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है:

भगवामय हुआ पूरा शहर: चिलचिलाती धूप या बारिश की परवाह किए बिना कांवरिए गेरुआ वस्त्र धारण किए अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जा रहे हैं। रास्ते भर जगह-जगह लगाए गए सेवा शिविरों में उनके खान-पान, रुकने और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।

प्रशासनिक चौकसी: नेपाल, बंगाल और देश के अन्य हिस्सों से आ रहे विदेशी और बाहरी श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं। घाटों पर गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि स्नान के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

सुल्तानगंज में श्रावणी मेले के दौरान बेटी को डलिया में बैठाकर यात्रा पर निकले भक्त की यह अनूठी कहानी और नेपाल-बंगाल से पहुंचे श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा इस बात का प्रमाण है कि बाबा बैद्यनाथ की महिमा देश की सीमाओं से परे है। यह पवित्र मेला न केवल आस्था का महापर्व है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक विविधता और अटूट बंधनों का भी एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस तरह के दृश्य श्रावणी मेले की दिव्यता और आकर्षण को और अधिक बढ़ा देते हैं, जो श्रद्धालुओं के दिलों में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं।