बिशौनी गांव में 65 वर्षीय वृद्ध को पीट-पीटकर किया अधमरा, इलाके में फैली सनसनी
सुल्तानगंज (भागलपुर): भागलपुर जिले के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत बिशौनी गांव में बुधवार को मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां के निवासी लगभग 65 वर्षीय सदानंद यादव को गांव के ही कुछ दबंगों ने आपसी रंजिश के चलते बेरहमी से पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद से बिशौनी गांव में भारी तनाव व्याप्त है। वृद्ध के शरीर पर चोटों के कई गंभीर निशान हैं, जिसके चलते उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
घटना का विवरण: पुरानी रंजिश का खौफनाक अंत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सदानंद यादव सुबह अपने घर के पास किसी कार्य में व्यस्त थे। बताया जा रहा है कि आरोपी पक्ष के साथ उनका पिछले कुछ समय से किसी घरेलू या जमीनी विवाद को लेकर मनमुटाव चल रहा था। बुधवार की सुबह जब सदानंद घर से बाहर निकले, तो पहले से घात लगाए बैठे हमलावरों ने अचानक उन पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावरों ने सदानंद को लाठी, डंडे और लोहे की रॉड से इतनी बुरी तरह पीटा कि वे घटनास्थल पर ही अचेत होकर गिर पड़े। हमलावर इतने क्रूर थे कि वे उन्हें अधमरा छोड़कर फरार हो गए। शोर सुनकर जब परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो सदानंद खून से लथपथ पड़े थे।
चिकित्सीय स्थिति और रेफरल
घायल अवस्था में सदानंद यादव को आनन-फानन में स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। वहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मायागंज अस्पताल (भागलपुर) रेफर कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि वृद्ध सदानंद के सिर और पसलियों में गंभीर चोटें आई हैं, जिससे आंतरिक रक्तस्राव का खतरा बना हुआ है। वृद्ध होने के कारण उनकी रिकवरी में काफी समय लग सकता है।
पुलिस की कार्रवाई और प्राथमिकी
घटना की सूचना मिलते ही सुल्तानगंज पुलिस के अधिकारी और जवान बिशौनी गांव पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और मौजूद लोगों से पूछताछ की। पीड़िता के परिवार की शिकायत पर नामजद आरोपियों के खिलाफ सुल्तानगंज थाने में हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
थानाध्यक्ष ने मीडिया को बताया, "मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम गठित कर दी गई है। सभी नामजद आरोपी अभी फरार हैं, लेकिन उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कानून हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।"
ग्रामीणों में आक्रोश और सुरक्षा का सवाल
सदानंद यादव पर हुए इस कातिलाना हमले से बिशौनी गांव के निवासियों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सदानंद एक सीधे-साधे और वृद्ध व्यक्ति हैं, जो गांव में शांति से रहते आए हैं। उन्हें इस तरह निशाना बनाना कायरता की पराकाष्ठा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी हो।
पीड़ित परिवार को सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि वे दोबारा किसी हमले का शिकार न हों।
गांव में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि असामाजिक तत्वों का मनोबल न बढ़े।
बुजुर्गों की सुरक्षा: एक सामाजिक चिंता
यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि हमारे ग्रामीण समाज में बुजुर्गों की सुरक्षा का मुद्दा कितना उपेक्षित होता जा रहा है। पारिवारिक या जमीनी विवादों में अक्सर उम्र और संबंधों की मर्यादा को भुला दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गांव के जागरूक लोगों का हस्तक्षेप बहुत जरूरी है।
कानून का राज ही एकमात्र विकल्प
सदानंद यादव पर हुआ यह हमला न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। सुल्तानगंज पुलिस के लिए यह मामला अब प्रतिष्ठा का विषय बन चुका है। बिशौनी गांव के लोग फिलहाल न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उम्मीद है कि पुलिस जल्द ही आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजेगी ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल, पूरा परिवार सदानंद के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है और गांव में पुलिस की तैनाती के बाद स्थिति नियंत्रित है, लेकिन तनाव की एक परत अब भी वहां महसूस की जा सकती है।