भागलपुर के छात्रों के लिए 'ड्रोन तकनीक' में निपुण बनने का सुनहरा अवसर बीसीई में 40 घंटे का बूटकैंप शुरू

भागलपुर: बदलती तकनीक और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (BCE) के विद्यार्थियों को ड्रोन तकनीक की बारीकियां सिखाने के लिए एक विशेष पहल की गई है। कॉलेज के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा सी-डैक (C-DAC), पटना के सहयोग से 40 घंटे के छह दिवसीय 'ड्रोन टेक्नोलॉजी बूटकैंप' का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 जुलाई 2026 तक चलेगा।

आधुनिक तकनीक और भविष्य की तैयारी

इस बूटकैंप का मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग के छात्रों को ड्रोन तकनीक (Unmanned Aircraft Systems) के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं से अवगत कराना है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजू मूलचंद तुगनायत ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में ड्रोन तकनीक न केवल एक नवाचार है, बल्कि यह भविष्य की सबसे अहम औद्योगिक जरूरतों में से एक है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से वे खुद को आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाकर रोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार कर सकेंगे।

बूटकैंप की मुख्य विशेषताएं

40 घंटे के इस गहन प्रशिक्षण सत्र को काफी सोच-समझकर तैयार किया गया है, जिसमें छात्रों को निम्नलिखित विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

सैद्धांतिक ज्ञान और पायलटिंग: ड्रोन के उड़ने के पीछे के विज्ञान (Aerodynamics) और उसे नियंत्रित करने (Piloting) की कला।

ड्रोन असेंबली और सेंसर: ड्रोन को असेंबल करने की प्रक्रिया और उसमें लगे उन्नत सेंसरों को एकीकृत (Integration) करने का कौशल।

प्रोग्रामिंग और मिशन योजना: ड्रोन को विशेष कार्यों के लिए प्रोग्राम करना और सटीक मिशन योजना तैयार करना।

एआई (AI) का अनुप्रयोग: कृषि से लेकर आपदा प्रबंधन तक में ड्रोन की भूमिका और उसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग की बारीकियां।

भारत को 'ड्रोन हब' बनाने का मिशन

यह बूटकैंप इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा वित्त पोषित परियोजना 'स्वयान' (SwaYaan) का हिस्सा है। इस परियोजना का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत को वैश्विक ड्रोन हब के रूप में स्थापित करना है। सी-डैक, पटना के विशेषज्ञों और अनुभवी उद्योग पेशेवरों की देखरेख में छात्र न केवल किताबों से परे तकनीक को समझेंगे, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में ड्रोन का उपयोग कैसे किया जाता है, इसका अभ्यास भी करेंगे।

छात्रों में उत्साह

बूटकैंप के समन्वयक (Coordinator) मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. संगीता और सहायक प्राध्यापक प्रो. जनमेजय कुमार ने बताया कि इस प्रशिक्षण का समापन एक 'आइडिया प्रेजेंटेशन' सत्र के साथ होगा, जिसमें छात्र औद्योगिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए अपने अभिनव ड्रोन-आधारित प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत करेंगे।

इस बूटकैंप के जरिए भागलपुर के छात्र अब उस पीढ़ी का हिस्सा बन रहे हैं जो कल के भारत में तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करेगी। यह प्रशिक्षण न केवल छात्रों के करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उन्हें कृषि, रक्षा, और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के व्यापक इस्तेमाल को समझने का एक शानदार अवसर भी प्रदान कर रहा है।