रात के अंधेरे में 25 केवी हाईवोल्टेज तार चोरी, ट्रेनों के थमे पहिए और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
परिचय
भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और सतर्कता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। राजधानी पटना को ऐतिहासिक नगरी गया से जोड़ने वाले व्यस्ततम पटना-गया रेलखंड (Patna-Gya Section) पर चोरों ने सुरक्षा तंत्र को ठेंगा दिखाते हुए एक ऐसा दुस्साहसिक कारनामा अंजाम दिया, जिसने पूरे रेलवे महकमे में खलबली मचा दी है। रात के सन्नाटे और अंधेरे का फायदा उठाते हुए शातिर चोरों ने सीधे तौर पर 25 हजार वाट (25 केवी) की अत्यंत खतरनाक हाईवोल्टेज ओवरहेड बिजली लाइन (OHE Wire) के बड़े हिस्से को काटकर चुराने का प्रयास किया और तार काट डाले।
इस हाईवोल्टेज लाइन के कटने से न केवल बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि इस रेलखंड पर चलने वाली तमाम महत्वपूर्ण यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया। घटना के बाद से लगातार 3 घंटे से अधिक समय तक इस मार्ग पर रेल परिचालन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा, जिससे हजारों रेल यात्री बीच रास्ते में घंटों फंसे रहे और भीषण गर्मी व परेशानी का सामना करते रहे। आइए इस सनसनीखेज घटना और इसके दूरगामी प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
घटना की रात: कैसे दिया गया दुस्साहस को अंजाम?
पटना-गया रेलखंड अपने सामरिक और दैनिक आवागमन के महत्व के कारण हमेशा से व्यस्त रहता है। इस मार्ग पर हजारों लोग रोजाना नौकरी, व्यवसाय और अन्य कार्यों के लिए सफर करते हैं। चोरों ने जिस शातिर तरीके से इस घटना को अंजाम दिया, उससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें इस पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और रेलवे के सुरक्षा समय-चक्र की पूरी जानकारी थी।
अंधेरे का फायदा और तकनीकी ज्ञान: 25 केवी की हाईवोल्टेज लाइन में हमेशा भारी मात्रा में करंट प्रवाहित होता है। चोरों ने संभवतः ऐसे समय को चुना जब या तो लाइन में कुछ समय के लिए शटडाउन रहा हो या फिर उन्होंने बिना किसी डर के अत्यधिक जोखिम भरे इस कार्य को विशेष उपकरणों की मदद से अंजाम दिया। इतनी भारी क्षमता के लाइव या संवेदनक्षील तार को काटना आम आदमी के वश की बात नहीं है, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस घटना में किसी पेशेवर गिरोह के साथ-साथ कुछ स्थानीय स्तर के असामाजिक तत्वों या पुरानी जानकारी रखने वालों का हाथ हो सकता है।
विद्युत आपूर्ति का ठप होना: जैसे ही ओएचई (OHE) वायर को काटा गया, विद्युत सब-स्टेशन में तुरंत ट्रिपिंग हुई और पूरे सर्किट की सप्लाई कट गई। गनीमत यह रही कि इस दौरान कोई बड़ा शार्ट-सर्किट या जनहानि नहीं हुई, अन्यथा यह एक बहुत बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी।
गंगा दामोदर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक
इस हाईवोल्टेज तार के कटने के तुरंत बाद सुरक्षा कारणों और विद्युत विच्छेदन के चलते इस रेलखंड से गुजरने वाली ट्रेनों को जहां-तहां रोक दिया गया।
गंगा दामोदर एक्सप्रेस प्रभावित: धनबाद से पटना और आगे जाने वाली लोकप्रिय गंगा दामोदर एक्सप्रेस (Ganga Damodar Express) समेत कई अन्य मेल और एक्सप्रेस गाड़ियां इस लापरवाही और चोरी की चपेट में आ गईं। ट्रेनें पिछले 3 घंटे से अधिक समय से विभिन्न स्टेशनों और आउटर सिग्नलों पर खड़ी रहीं।
यात्रियों की बढ़ी मुसीबतें: अचानक ट्रेनें रुक जाने के कारण यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। एसी कोचों की बिजली गुल होने और सामान्य डिब्बों में उमस भरी गर्मी के कारण यात्री परेशान हो गए। छोटे स्टेशनों पर फंसे यात्रियों को खाने-पीने की चीजों के लिए भी भारी मशक्कत करनी पड़ी।
लोकल और पैसेंजर ट्रेनों का रद्द या विलंबित होना: इस मुख्य मार्ग पर चलने वाली डेमू (DEMU) और पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन पर भी इसका व्यापक असर पड़ा। सुबह के वक्त काम पर जाने वाले दैनिक यात्रियों (Daily Commuters) का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया।
रेलवे प्रशासन और आरपीएफ (RPF) की नींद खुली
घटना की सूचना मिलते ही पूर्वी मध्य रेलवे (ECR) और दानापुर मंडल के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों, मरम्मत दलों (Maintenance Teams) और इंजीनियरिंग विंग को मौके पर रवाना किया गया।
युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य: रेलवे के कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कटे हुए हाईवोल्टेज तार को जोड़ने और ओएचई लाइन को पुनः चार्ज करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया।
सुरक्षा बलों की गश्त पर सवाल: स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि यदि रेलवे ट्रैक के आसपास आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) की गश्त नियमित रूप से होती, तो इस प्रकार के चोर हाईवोल्टेज लाइनों तक पहुंचने का दुस्साहस नहीं कर पाते। पटरियों के किनारे इस तरह कीमती तांबे या एल्युमिनियम मिश्रित ओवरहेड तारों की चोरी होना यह साबित करता है कि कबाड़ चोरों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं।
पूर्व की घटनाएं और कबाड़ माफिया का नेटवर्क
बिहार के विभिन्न रेलखंडों पर रेलवे संपत्तियों की चोरी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार पटरियों के क्लिप, सिग्नल के केबल और ओएचई के छोटे-मोटे हिस्से चोरी होने के मामले सामने आते रहे हैं।
कबाड़खानों पर शिकंजा: पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस प्रकार के कटे हुए तारों को अक्सर अवैध कबाड़खानों (Scrap Yards) में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। जब तक इन अवैध कबाड़ संचालकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक चोरों के इस गिरोह का मनोबल कम होना मुश्किल है।
सुरक्षा के कड़े इंतजामों की मांग: रेल विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे लाइनों की सुरक्षा के लिए अब ड्रोन कैमरों या आधुनिक नाइट-विजन उपकरणों की मदद लेनी चाहिए, ताकि संवेदनशील पटरियों पर नजर रखी जा सके
पटना-गया रेलखंड पर 25 केवी हाईवोल्टेज तार की चोरी और उसके परिणामस्वरुप 3 घंटे से अधिक समय तक ट्रेनों का ठप रहना रेलवे सुरक्षा प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। गनीमत यह रही कि इस नादानी और आपराधिक कृत्य से किसी बड़े ट्रेन हादसे की नौबत नहीं आई, परंतु यात्रियों को जो मानसिक और शारीरिक पीड़ा उठानी पड़ी, उसकी भरपाई आसान नहीं है। रेलवे प्रशासन को न केवल इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को पकड़ना चाहिए, बल्कि भविष्य के लिए ऐसी सुरक्षा रणनीति तैयार करनी चाहिए कि कोई भी असामाजिक तत्व देश की परिवहन रीढ़ के साथ इस तरह का खिलवाड़ न कर सके।