झाड़-फूंक के चक्कर में गई युवक की जान, सांप के काटने के बाद अस्पताल ले जाने में हुई देरी; परिवार में मातम

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले के पवार बतराहा गांव में अंधविश्वास की वजह से एक 24 वर्षीय युवक की जान चली गई। मृतक की पहचान सुनील यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि घर में काम करने के दौरान उन्हें सांप ने काट लिया। घटना के बाद परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने में लग गए। इस दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी और चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सांप के काटने जैसी चिकित्सा आपात स्थिति में समय पर इलाज के बजाय अंधविश्वास का सहारा लेना कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह सलाह देते हैं कि सांप के काटने पर बिना देरी किए मरीज को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल ले जाना चाहिए।

घर में काम करने के दौरान हुआ हादसा

परिजनों के अनुसार, 24 वर्षीय सुनील यादव अपने घर में रोजमर्रा का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक उन्हें किसी जहरीले सांप ने काट लिया। शुरुआत में उन्हें हल्की तकलीफ महसूस हुई, लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थोड़ी ही देर में सुनील अचेत हो गए, जिससे परिवार के सदस्यों में अफरा-तफरी मच गई।

अस्पताल ले जाने के बजाय कराया झाड़-फूंक

घटना के बाद परिजनों ने तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के बजाय स्थानीय स्तर पर झाड़-फूंक का सहारा लिया। काफी समय तक पारंपरिक तरीके से उपचार कराने का प्रयास किया गया।

ग्रामीणों के अनुसार, जब युवक की हालत और गंभीर हो गई, तब परिवार उसे अस्पताल लेकर पहुंचा। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने युवक की जांच की और उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि सांप के काटने के मामलों में समय पर चिकित्सा उपचार और आवश्यकता पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) देना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इलाज में देरी कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है।

परिवार में पसरा मातम

सुनील यादव की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी शोक का माहौल है और लोग इस दुखद घटना से स्तब्ध हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि सुनील मेहनती और मिलनसार युवक थे। उनकी अचानक हुई मौत से पूरे गांव में शोक की लहर है।

अंधविश्वास पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और झाड़-फूंक जैसी प्रथाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक चिकित्सा के बजाय ऐसे तरीकों पर भरोसा करना मरीज के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि सांप के काटने जैसी आपात स्थिति में लोग सही और समय पर चिकित्सा सहायता लें।

सांप के काटने पर क्या करें?

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराने के बजाय तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

मरीज को शांत रखें और अनावश्यक रूप से चलने-फिरने न दें।

प्रभावित अंग को यथासंभव स्थिर रखें।

किसी प्रकार की झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसी गलत पद्धतियों का प्रयोग न करें।

बिना देरी किए मरीज को निकटतम अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं।

यदि संभव हो तो सांप की पहचान से संबंधित जानकारी डॉक्टर को दें, लेकिन सांप को पकड़ने का प्रयास न करें।

जागरूकता अभियान की जरूरत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सांप काटने के मामलों में मृत्यु दर कम करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। लोगों को यह बताया जाना चाहिए कि समय पर अस्पताल पहुंचना ही सबसे प्रभावी उपचार है।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होना चाहिए ताकि मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके।

प्रशासन से अपील

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से गांवों में जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि लोगों को सही जानकारी मिलेगी, तो भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

गोपालगंज के पवार बतराहा गांव में 24 वर्षीय सुनील यादव की सांप के काटने के बाद समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से दुखद मौत हो गई। परिजनों द्वारा पहले झाड़-फूंक का सहारा लेने के कारण इलाज में हुई देरी घातक साबित हुई। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि सांप के काटने जैसी चिकित्सा आपात स्थिति में अंधविश्वास नहीं, बल्कि तत्काल वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।