11 सेवानिवृत्त अंचल अधिकारियों की संविदा पर सहायक भू-संपदा पदाधिकारी के रूप में नियुक्ति, 10 ने संभाला कार्यभार; सुभाषचंद्र सिंह भी शामिल

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: सरकारी विद्यालयों कीमती जमीनों की सुरक्षा, उनके अतिक्रमण को हटाने, भूमि विवादों के त्वरित निष्पादन और स्कूल परिसरों के सुदृढ़ीकरण के लिए शिक्षा विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रशासनिक रूप से कड़ा कदम उठाया है। वर्षों से कागजी उलझनों और भू-माफियाओं की नजरों में घिरे शैक्षणिक संस्थानों के भू-अभिलेखों (Land Records) को दुरुस्त करने के लिए भागलपुर जिले में शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक विशेष पहल की गई है। इसके तहत राज्य भर में प्रशासनिक अनुभव रखने वाले 11 सेवानिवृत्त अंचल अधिकारियों (Retired Circle Officers - COs) को 'सहायक भू-संपदा पदाधिकारी' (Assistant Estate Officer) के संविदात्मक पद पर नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों से मिली पुष्ट जानकारी के मुताबिक, इन नियुक्त अधिकारियों में से 10 अधिकारियों ने अपने पदों पर आधिकारिक रूप से कार्यभार ग्रहण भी कर लिया है, जिसमें प्रमुख रूप से सुभाषचंद्र सिंह का नाम भी शामिल है।

क्यों महसूस की गई सहायक भू-संपदा पदाधिकारियों की आवश्यकता?

विगत कुछ वर्षों में बिहार के सरकारी विद्यालयों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती उनकी जमीनों के स्वामित्व (Ownership) और अतिक्रमण (Encroachment) को लेकर रही है। कई स्थानों पर दान में दी गई जमीनें, सरकारी बंदोबस्ती की जमीनें या विद्यालयों के नाम पर दर्ज संपत्तियां स्थानीय दबंगों या भू-माफियाओं द्वारा कब्जा कर ली जाती हैं।

सामान्य प्रशासनिक तंत्र और अंचल कार्यालयों पर पहले से ही प्रशासनिक कार्यों का भारी बोझ होने के कारण स्कूलों के भूमि मामलों की फाइलें लंबे समय तक लंबित रह जाती थीं। इस गंभीर समस्या से निपटने और शिक्षा विभाग की संपत्तियों की रक्षा के लिए विभाग ने एक अलग विंग (भू-संपदा इकाई) को मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसके लिए अनुभवी सेवानिवृत्त अंचल अधिकारियों की सेवाएं लेने का फैसला किया गया, जो जमीन की पैमाइश, नामांतरण (Mutation), केवाला, और राजस्व कानूनों के मर्मज्ञ होते हैं।

10 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने संभाला कार्यभार, सुभाषचंद्र सिंह ने भी ग्रहण किया पद

शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद चयनित 11 अधिकारियों में से 10 ने निर्धारित समयसीमा के भीतर भागलपुर पहुंचकर अपना कार्यभार संभाल लिया है। नव-नियुक्त सहायक भू-संपदा पदाधिकारियों में सुभाषचंद्र सिंह ने भी कार्यभार ग्रहण कर लिया है। सुभाषचंद्र सिंह अपने सेवाकाल के दौरान विभिन्न अंचलों में अपने तेज-तर्रार और कुशल भूमि प्रबंधन के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके अनुभव का लाभ अब भागलपुर जिले के स्कूलों की भूमि को कानूनी रूप से सुरक्षित करने में मिलेगा।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद इन सभी अधिकारियों के बीच प्रखंडवार और अंचलवार जिम्मेदारियों का बंटवारा शुरू कर दिया गया है, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों की भूमि से जुड़े मामलों की जमीनी हकीकत का जायजा ले सकें।

इन अधिकारियों की प्रमुख जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र

सहायक भू-संपदा पदाधिकारियों के रूप में नियुक्त किए गए इन सेवानिवृत्त अंचल अधिकारियों के कंधे पर विभाग ने एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उनके मुख्य कार्य निम्नलिखित होंगे:

विद्यालय की जमीनों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification): जिले के प्रत्येक प्राथमिक, मध्य और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नाम दर्ज भूमि के कागजात और उसकी वास्तविक स्थिति की मैपिंग करना।

अतिक्रमण मुक्ति अभियान (Anti-Encroachment Drive): जिन स्कूलों की जमीनों पर अवैध कब्जा या अतिक्रमण कर लिया गया है, उन्हें अंचल अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण मुक्त कराना।

भूमि का म्यूटेशन और अभिलेख सुधार: जिन विद्यालयों की जमीनें अभी तक राजस्व रिकॉर्ड में स्कूल के नाम से दर्ज नहीं हुई हैं, उनका तत्काल दाखिल-खारिज करवाना।

दानदाताओं की भूमि के कागजात दुरुस्त करना: जिन जमीनों को दानदाताओं द्वारा मौखिक या पुराने दस्तावेजों के जरिए दिया गया है, उनके कानूनी हस्तांतरण (Gift Deed / Registry) की प्रक्रिया को पूरा करना।

शिक्षा विभाग के इस कदम से क्या होंगे बड़े लाभ?

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि शिक्षा विभाग का यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा। अब तक प्रशासनिक लचरता या कानूनों की जानकारी के अभाव में स्कूलों की बेशकीमती जमीनें सुरक्षित नहीं रह पाती थीं। लेकिन अब अनुभवी राजस्व अधिकारियों के सीधे तौर पर विभाग से जुड़ जाने से निम्नलिखित फायदे होंगे:

भविष्य के निर्माण कार्यों में तेजी: चारदीवारी निर्माण, स्मार्ट क्लास, खेल मैदान और अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के लिए स्पष्ट और विवाद-मुक्त भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

भू-माफियाओं के हौसले पस्त: कानूनी रूप से दस्तावेज मजबूत होने के बाद कोई भी भू-माफिया सरकारी या विद्यालय की जमीन पर बुरी नजर डालने से पहले सौ बार सोचेगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही: मामलों का समयबद्ध निष्पादन होने से शिक्षा परियोजना और जिला प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।

भागलपुर में शिक्षा विभाग के अंतर्गत 11 सेवानिवृत्त अंचल अधिकारियों की नियुक्ति और उनमें से 10 (सुभाषचंद्र सिंह समेत) द्वारा कार्यभार ग्रहण कर लिया जाना यह स्पष्ट करता है कि सरकार अब स्कूलों की संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अनुभव और प्रशासनिक दक्षता का यह मेल न केवल वर्षों से लंबित पड़े भूमि विवादों को सुलझाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित और सुविधामयी शैक्षणिक परिवेश का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।