उप-महानिरीक्षक मधुकर अमिताभ की देखरेख में रोपे गए 100 पौधे, छात्रों और अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
बिहार के पूर्णिया जिले के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सेंट जेवियर्स स्कूल (St. Xavier's School) के प्रांगण में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद प्रेरणादायक और अनुकरणीय पहल देखने को मिली। सोमवार को विद्यालय परिसर में एक व्यापक पौधरोपण अभियान का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसका नेतृत्व और देखरेख केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल या अन्य प्रतिष्ठित सुरक्षा महकमे के उप-महानिरीक्षक (DIG) मधुकर अमिताभ द्वारा स्वयं की गई। उनकी उपस्थिति ने न केवल इस कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया, बल्कि बच्चों के भीतर देशप्रेम के साथ-साथ प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी के भाव को भी प्रगाढ़ किया। इस अभियान के तहत विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कुल 100 पौधे रोपे गए।
क्या था कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य और आयोजन की रूपरेखा?
वर्तमान समय में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming), जलवायु परिवर्तन और तेजी से घटते वनों के कारण पूरी दुनिया पर्यावरण संकट से जूझ रही है। ऐसे में भावी पीढ़ी यानी स्कूली बच्चों के मन में पेड़ों और हरियाली का महत्वारोप करना बेहद जरूरी हो गया है। इसी दूरगामी सोच के साथ सेंट जेवियर्स स्कूल प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर इस पौधरोपण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की थी।
सोमवार की सुबह निर्धारित समय पर विद्यालय परिसर में एक सादे लेकिन बेहद भव्य समारोह का आयोजन किया गया। उप-महानिरीक्षक मधुकर अमिताभ, सहायक कमांडेंट शंभु नाथ बर्मन, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण और सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं इस अभियान में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा पौधे रोपकर की गई, जिसके बाद छात्रों और शिक्षकों ने भी बढ़-चढ़कर पौधे लगाने के इस महाअभियान में हिस्सा लिया।
छात्रों की सक्रिय सहभागिता और पौधों के महत्व पर वैचारिक चर्चा
इस पौधरोपण अभियान का सबसे खूबसूरत पहलू छात्र-छात्राओं की इसमें सक्रिय भागीदारी (Active Participation) रही। बच्चों ने न केवल गड्ढे खोदने और पौधे लगाने में बढ़-चढ़कर श्रमदान किया, बल्कि कार्यक्रम के दौरान आयोजित एक छोटी सी संगोष्ठी में पेड़-पौधों के महत्व पर खुलकर अपने विचार भी रखे।
छात्रों के विचार: विद्यार्थियों ने अपने भाषणों और चर्चाओं के माध्यम से बताया कि किस प्रकार पेड़ हमारे पर्यावरण के फेफड़े (Lungs) की तरह काम करते हैं। वे हमें प्राणवायु (Oxygen) प्रदान करते हैं, जहरीली कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, तापमान को नियंत्रित रखते हैं और वर्षा लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता: बच्चों ने संकल्प लिया कि वे केवल पौधे लगाएंगे ही नहीं, बल्कि उनके बड़े होने तक उनकी नियमित रूप से देखभाल (Watering and Protection) भी करेंगे। विद्यार्थियों में इस तरह की पर्यावरणीय चेतना को देखकर उपस्थित सभी अधिकारी और शिक्षक गदगद नजर आए।
सहायक कमांडेंट शंभु नाथ बर्मन द्वारा बच्चों को दिया गया प्रेरक उद्बोधन
कार्यक्रम के दौरान सहायक कमांडेंट शंभु नाथ बर्मन ने बच्चों को संबोधित करते हुए एक बेहद प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में पेड़ों के वैज्ञानिक, व्यावहारिक और सामाजिक महत्व को बहुत ही सरल और रोचक तरीके से बच्चों को समझाया:
पर्यावरण का संतुलन: श्री बर्मन ने बच्चों को बताया कि जिस प्रकार हमारे शरीर को स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार इस पृथ्वी को जीवित और संतुलित रखने के लिए पेड़ों का होना अनिवार्य है।
वृक्षारोपण ही सच्चा देशभक्ति का कार्य: उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि पेड़ लगाना और उनकी रक्षा करना किसी देशभक्ति के कार्य से कम नहीं है, क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और सांस लेने योग्य दुनिया उपहार में देता है।
'एक पेड़ मां के नाम' की प्रेरणा: उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे अपने जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर अपने परिवार के साथ मिलकर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसका संरक्षण करें।
100 पौधों का रोपण और उनके संरक्षण की ठोस प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के अंत तक विद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रजातियों (छायादार, फलदार और औषधीय) के कुल 100 पौधे सफलतापूक रोप दिए गए। सुरक्षा अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड (Tree Guards) की व्यवस्था की जाए और समय-समय पर उनकी सिंचाई की देखरेख विद्यालय का माली व छात्र मिलकर करें।
पूर्णिया के सेंट जेवियर्स स्कूल में उप-महानिरीक्षक मधुकर अमिताभ और सहायक कमांडेंट शंभु नाथ बर्मन की उपस्थिति में संपन्न हुआ यह पौधरोपण अभियान महज एक सरकारी या औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह आने वाले कल के लिए एक हरित क्रांति का बीज था। इस तरह के आयोजन यह साबित करते हैं कि यदि प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षण संस्थान मिलकर प्रयास करें, तो समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक बहुत बड़ी जन-जागृति लाई जा सकती है। सेंट जेवियर्स स्कूल का यह कदम पूर्णिया जिले के अन्य विद्यालयों के लिए भी एक मिसाल बन गया है।