घर पर कराया प्रसव, तीन पुत्रों को जन्म देने के बाद बिगड़ी महिला की हालत; कहलगांव से बेहतर इलाज के लिए किया गया रेफर

भागलपुर | संवाददाता

भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल क्षेत्र में एक महिला द्वारा घर पर प्रसव कराए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक गंभीर हो गई। महिला ने एक साथ तीन पुत्रों को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के कुछ ही समय बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने तत्काल स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों को सूचना दी, जिसके बाद उसे प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां चिकित्सकों ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। एक ओर एक साथ तीन नवजातों के जन्म को लोग आश्चर्य और खुशी के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रसव के बाद महिला की गंभीर स्थिति ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। चिकित्सकों का कहना है कि बहु-शिशु (मल्टीपल) गर्भावस्था में प्रसव सामान्य प्रसव की तुलना में अधिक जोखिमपूर्ण होता है, इसलिए ऐसे मामलों में संस्थागत प्रसव कराना सबसे सुरक्षित माना जाता है।

घर पर हुआ प्रसव

परिजनों के अनुसार, महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर घर पर ही प्रसव कराने का निर्णय लिया गया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सहायता से प्रसव कराया गया, जिसके दौरान महिला ने एक-एक कर तीन पुत्रों को जन्म दिया। शुरुआत में बच्चों की रोने की आवाज सुनकर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।

हालांकि कुछ ही देर बाद महिला को अत्यधिक कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने लगीं। स्थिति गंभीर होती देख परिवार के लोगों ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी और इलाज की व्यवस्था की।

स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार

सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्यकर्मी मौके पर पहुंचे और महिला को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां मौजूद चिकित्सकों ने उसकी जांच की और प्राथमिक उपचार शुरू किया।

डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव के बाद महिला की स्थिति सामान्य नहीं थी। उसे लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता थी। आवश्यक उपचार देने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उसे उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर कर दिया गया।

तीनों नवजातों की भी हुई जांच

स्वास्थ्य केंद्र में तीनों नवजात शिशुओं की भी चिकित्सकीय जांच की गई। डॉक्टरों ने उनके वजन, श्वसन और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य मानकों का परीक्षण किया। प्रारंभिक जांच के बाद बच्चों की निगरानी जारी रखने की सलाह दी गई।

चिकित्सकों का कहना है कि एक साथ तीन बच्चों के जन्म के मामलों में नवजातों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऐसे बच्चों का जन्म सामान्य से कम वजन के साथ होने की संभावना अधिक रहती है।

परिवार में खुशी और चिंता दोनों

एक साथ तीन पुत्रों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है, लेकिन मां की बिगड़ती हालत ने सभी को चिंतित कर दिया है। परिजन लगातार उसकी सेहत में सुधार की प्रार्थना कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने भी परिवार का हालचाल जाना और महिला के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना अत्यंत आवश्यक होता है।

चिकित्सकों ने संस्थागत प्रसव पर दिया जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और अस्पताल में प्रसव कराना मां और नवजात दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से जुड़वां या तीन शिशुओं की गर्भावस्था को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रसव केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल में कराया जाना चाहिए, ताकि किसी भी जटिलता की स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसवपूर्व जांच कराएं और प्रसव हमेशा सरकारी या मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल में ही कराएं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ सभी परिवारों को उठाना चाहिए।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ता, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मी गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व और अस्पताल में प्रसव के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के अनुसार, तीन बच्चों का एक साथ जन्म (ट्रिपलेट प्रेग्नेंसी) अपेक्षाकृत दुर्लभ होता है और इसे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था माना जाता है। ऐसी स्थिति में प्रसव के दौरान और उसके बाद मां को अधिक रक्तस्राव, संक्रमण तथा अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

इसी प्रकार नवजात शिशुओं को भी विशेष नवजात देखभाल (Neonatal Care) की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण होता है।

कहलगांव में घर पर प्रसव के दौरान महिला द्वारा तीन पुत्रों को जन्म देना एक असाधारण घटना है, लेकिन प्रसव के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने से यह मामला गंभीर हो गया। चिकित्सकों ने समय पर प्राथमिक उपचार देकर महिला को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से सुरक्षित मातृत्व, नियमित स्वास्थ्य जांच और संस्थागत प्रसव के महत्व को समझने की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। अब परिवार और स्थानीय लोग महिला के शीघ्र स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि तीनों नवजातों की भी चिकित्सकीय निगरानी जारी है।