ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर करने की नई पहल, सभी पंचायतों में होगा कुओं का जीर्णोद्धार; जल जीवन हरियाली मिशन के तहत शुरू होगी व्यापक योजना

मुजफ्फरपुर | संवाददाता

मुजफ्फरपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट को दूर करने और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू करने की तैयारी की है। जल जीवन हरियाली मिशन के तहत जिले की सभी पंचायतों में पुराने कुओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इस योजना को अमृत सरोवर योजना की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षभर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और भूजल संरक्षण को भी बढ़ावा मिले।

प्रशासन का मानना है कि वर्षों पुराने कई कुएं उपेक्षा, गाद भरने और रखरखाव के अभाव में उपयोग से बाहर हो चुके हैं। इनके पुनर्जीवन से न केवल ग्रामीणों को पीने के पानी की सुविधा मिलेगी, बल्कि जल स्तर को बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी पंचायतों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

अमृत सरोवर की तर्ज पर होगा विकास

जिले के सभी पुराने सार्वजनिक कुओं का विकास अमृत सरोवर योजना की तर्ज पर किया जाएगा। इसके अंतर्गत कुओं की सफाई, गाद निकासी, मरम्मत, चहारदीवारी निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य कराए जाएंगे।

प्रशासन का उद्देश्य केवल कुओं की मरम्मत करना नहीं, बल्कि उन्हें स्थायी जल स्रोत के रूप में पुनः विकसित करना है ताकि आने वाले वर्षों में ग्रामीणों को इसका लाभ मिलता रहे।

जल जीवन हरियाली मिशन से जुड़ेगी योजना

यह पूरी योजना राज्य सरकार के जल जीवन हरियाली मिशन के अंतर्गत संचालित की जाएगी। मिशन का उद्देश्य जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल स्तर में सुधार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।

अधिकारियों के अनुसार, कुओं के पुनर्जीवन से वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा और भूजल स्तर को संतुलित बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

सभी पंचायतों में होगा सर्वे

योजना लागू करने से पहले जिले की सभी पंचायतों में सार्वजनिक कुओं का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा।

सर्वे के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि कितने कुएं वर्तमान में उपयोग योग्य हैं, कितने कुओं को मरम्मत की आवश्यकता है और किन कुओं का पुनर्निर्माण करना होगा।

इस आधार पर प्रत्येक पंचायत के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

ग्रामीणों को मिलेगा स्वच्छ पेयजल

योजना के पूरा होने के बाद हजारों ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

विशेष रूप से गर्मी के मौसम में, जब कई क्षेत्रों में जल संकट गहराता है, तब पुनर्जीवित कुएं लोगों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत साबित हो सकते हैं।

भूजल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण भूजल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यदि कुओं की नियमित सफाई और रखरखाव किया जाए तो वर्षा का पानी प्राकृतिक रूप से जमीन में समाहित होगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा और भविष्य में जल संकट कम किया जा सकेगा।

पंचायतों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

योजना के सफल संचालन में पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

प्रशासन पंचायतों को निर्देश देगा कि वे कुओं की देखरेख, नियमित सफाई और संरक्षण सुनिश्चित करें ताकि सरकारी खर्च से विकसित किए गए जल स्रोत लंबे समय तक उपयोगी बने रहें।

मनरेगा से भी मिल सकता है सहयोग

अधिकारियों के अनुसार, योजना के कुछ कार्यों में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के माध्यम से भी श्रमिकों की सेवाएं ली जा सकती हैं।

इससे एक ओर ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण के कार्यों में तेजी आएगी।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा लाभ

कुओं के पुनर्जीवन से केवल पेयजल उपलब्धता ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

जल स्रोतों के संरक्षण से हरियाली बढ़ेगी, आसपास का पर्यावरण बेहतर होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

ग्रामीणों में खुशी

योजना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीणों ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि गांवों में वर्षों पुराने कई सार्वजनिक कुएं आज भी मौजूद हैं, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।

यदि इनका जीर्णोद्धार हो जाता है तो लोगों को विशेष रूप से गर्मी के मौसम में बड़ी राहत मिलेगी।

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर जिले में जल जीवन हरियाली मिशन के तहत सभी पंचायतों में सार्वजनिक कुओं के जीर्णोद्धार की प्रस्तावित योजना ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बढ़ाने और जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अमृत सरोवर की तर्ज पर विकसित होने वाली यह पहल न केवल पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि भूजल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण विकास को भी नई मजबूती प्रदान करेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि पंचायतों और स्थानीय लोगों के सहयोग से यह योजना भविष्य में जल संकट के स्थायी समाधान का आधार बनेगी।