जलजमाव बना चुनावी मुद्दा, निचले इलाकों में लोगों की नाराजगी; 30 जुलाई को होगा मतदान
पटना: राजधानी पटना की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), महागठबंधन और अन्य राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। उम्मीदवार लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं, नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, चुनावी वादों और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के निचले इलाकों में जलजमाव की समस्या सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनकर उभरी है। लगातार हुई बारिश के बाद कई मोहल्लों की सड़कें पानी में डूब गई हैं। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।
प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार
मतदान की तारीख नजदीक आते ही सभी प्रमुख दलों ने अपने प्रचार अभियान को तेज कर दिया है। एनडीए के नेता घर-घर जाकर सरकार की उपलब्धियां गिना रहे हैं, जबकि विपक्षी दल जनता के बीच पहुंचकर सरकार की नाकामियों को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।
चुनावी सभाओं में विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा हो रही है। इसके साथ ही स्थानीय समस्याओं को लेकर भी उम्मीदवारों से सवाल पूछे जा रहे हैं।
जलजमाव से परेशान लोग
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के कई निचले इलाकों में बारिश के बाद जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। गलियों और सड़कों पर कई दिनों तक पानी जमा रहने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।
स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर घरों में भी पानी घुसने की शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण हर वर्ष बरसात में यही समस्या पैदा होती है। नालों की नियमित सफाई नहीं होने से बारिश का पानी तेजी से निकल नहीं पाता।
जनता ने उठाए विकास के सवाल
चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार जब लोगों के बीच पहुंच रहे हैं तो उन्हें सबसे अधिक सवाल जलजमाव, टूटी सड़कें, गंदगी और सीवर व्यवस्था को लेकर सुनने पड़ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता।
कई सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि केवल चुनावी घोषणाओं के बजाय स्थायी विकास योजनाओं पर काम किया जाए।
स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा असर
जलजमाव के कारण कई इलाकों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों को डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का डर सता रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी जमा रहने से बदबू फैल रही है और साफ-सफाई की स्थिति भी प्रभावित हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक जलभराव रहने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
एनडीए ने विकास को बनाया मुद्दा
एनडीए के नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार और नगर प्रशासन लगातार शहर के विकास के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है और भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
प्रचार के दौरान एनडीए नेता सड़क, पुल, बिजली, पेयजल और अन्य विकास कार्यों को अपनी उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रहे हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों ने जलजमाव को सरकार की विफलता बताते हुए इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बना लिया है। उनका आरोप है कि राजधानी के प्रमुख विधानसभा क्षेत्र में यदि यह स्थिति है तो अन्य क्षेत्रों का हाल आसानी से समझा जा सकता है।
विपक्ष का कहना है कि बरसात शुरू होते ही हर वर्ष शहर जलमग्न हो जाता है, जिससे स्पष्ट है कि नगर निकाय और प्रशासन ने स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए।
मतदाताओं की प्राथमिकताएं
इस बार चुनाव में मतदाता केवल राजनीतिक नारों पर नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं के समाधान पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा, बेहतर शिक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और साफ-सफाई भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधि ऐसा चुना जाना चाहिए जो चुनाव जीतने के बाद भी क्षेत्र में सक्रिय रहे और जनता की समस्याओं का समाधान करे।
प्रशासन की तैयारियां
30 जुलाई को होने वाले मतदान को लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों की विशेष निगरानी की जाएगी।
मतदान कर्मियों के प्रशिक्षण, ईवीएम और वीवीपैट की जांच तथा सुरक्षा बलों की तैनाती की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है ताकि मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया जा सके।
चुनावी माहौल हुआ गर्म
जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी माहौल और अधिक गर्म होता जा रहा है। प्रमुख राजनीतिक दलों के स्टार प्रचारक भी लगातार सभाएं और रोड शो कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी चुनाव प्रचार तेज हो गया है। विभिन्न दल अपने-अपने विकास कार्यों और चुनावी वादों को लेकर मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
जनता को स्थायी समाधान का इंतजार
बांकीपुर के मतदाताओं का कहना है कि हर चुनाव में जलजमाव, सड़क, सीवर और सफाई जैसे मुद्दे उठते हैं, लेकिन चुनाव के बाद इन पर अपेक्षित गति से काम नहीं होता। लोगों को उम्मीद है कि इस बार चुना जाने वाला जनप्रतिनिधि इन समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगा।
30 जुलाई को होने वाले मतदान में यह देखना दिलचस्प होगा कि विकास, स्थानीय समस्याएं और जलजमाव जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को किस हद तक प्रभावित करते हैं। राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के हाथ में है, जो अपने वोट के माध्यम से अगले जनप्रतिनिधि का चयन करेगी।