पंडासराय में गूंजी गरीबों की आवाज: वासगीत पर्चे की मांग को लेकर लामबंद हुए भूमिहीन परिवार
दरभंगा: शहर के पंडासराय स्थित भूतनाथ मंदिर के समीप रविवार को एक महत्वपूर्ण सामाजिक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु वर्षों से चली आ रही 'वासगीत पर्चा' (आवास के लिए भूमि का कानूनी अधिकार) की मांग थी। बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय गरीब और भूमिहीन परिवारों ने शिरकत की, जिनकी आंखों में अपनी जमीन के छोटे से टुकड़े पर मालिकाना हक पाने की उम्मीद साफ देखी जा सकती थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस अवसर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और इसे नीतिगत विफलता करार दिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य: मालिकाना हक की लड़ाई
पंडासराय जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कई ऐसे परिवार दशकों से रह रहे हैं जिनके पास अपनी जमीन का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि इन परिवारों को हर पल बेदखली का डर सताता रहता है।
बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों पर जोर दिया गया:
कानूनी मान्यता: भूमिहीन परिवारों को उनके द्वारा अधिग्रहित भूमि पर कानूनी अधिकार (वासगीत पर्चा) प्रदान किया जाए।
प्रशासनिक संवेदनशीलता: सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुँचाया जाए जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी पंडासराय की गलियों में बसते आए हैं, लेकिन अब भी 'अतिक्रमणकारी' की श्रेणी में रखे गए हैं।
सर्वेक्षण की मांग: स्थानीय स्तर पर एक नया सर्वेक्षण कराया जाए ताकि वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान हो सके।
प्रशासन की विफलता पर तीखी टिप्पणी
बैठक को संबोधित करते हुए प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र की उदासीनता के कारण गरीब परिवार अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
कार्यकर्ताओं ने तर्क दिया:
"यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को उनके घर के अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। प्रशासन का काम गरीबों को बसाना और उन्हें सुरक्षा प्रदान करना है, न कि उन्हें बेघर करने की धमकी देना। वासगीत पर्चा न देना प्रशासन की स्पष्ट विफलता और संवेदनहीनता को दर्शाता है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूमती रहती हैं, लेकिन धरातल पर गरीब को उसका हक नहीं मिलता। पंडासराय के इन परिवारों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनके आवेदनों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
भूमिहीनों की पीड़ा: एक अंतहीन संघर्ष
बैठक में मौजूद बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी भूमि पर बिता दिया है। मेहनत-मजदूरी करके किसी तरह अपने बच्चों को पाल रहे इन परिवारों के लिए 'वासगीत पर्चा' महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का आधार है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, "बरसात के मौसम में जब प्रशासन की ओर से बेदखली का नोटिस आता है, तो रात भर नींद नहीं आती। हम सरकारी जमीन नहीं हड़पना चाहते, हम बस अपना छोटा सा घर सुरक्षित करना चाहते हैं।"
कार्यकर्ताओं का अगला कदम
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक संघर्ष समिति का गठन करने का निर्णय लिया है जो समय-समय पर जिला प्रशासन और अंचल कार्यालय के साथ वार्ता करेगी। उनकी आगामी रणनीति में शामिल हैं:
जनसुनवाई: जिला पदाधिकारी (DM) के पास सामूहिक रूप से अपनी व्यथा लेकर जाना।
जागरूकता अभियान: उन सभी भूमिहीन परिवारों को संगठित करना जो जानकारी के अभाव में अपना अधिकार नहीं मांग पा रहे हैं।
कानूनी सहायता: जरूरतमंदों को कानूनी सलाह प्रदान करना ताकि वे अपने हक की लड़ाई कानून के दायरे में लड़ सकें।
पंडासराय की यह बैठक केवल एक स्थान विशेष की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे दरभंगा जिले में फैले उस बड़े वर्ग की आवाज है जो हाशिए पर खड़ा है। वासगीत पर्चे की मांग सरकार की कल्याणकारी नीतियों की जमीनी हकीकत को आईना दिखाती है।
प्रशासन अब इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकता। यदि समय रहते इन परिवारों को कानूनी अधिकार नहीं मिला, तो सामाजिक असंतोष का खतरा बढ़ सकता है। दरभंगा का नागरिक समाज अब जागृत हो चुका है और वह अपने अधिकारों के प्रति किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। उम्मीद है कि पंडासराय के इन परिवारों की मांग पर प्रशासन जल्द ही संज्ञान लेगा और उन्हें उनका हक प्रदान करेगा।