जनरल बोगी में सीट को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प, पिता-पुत्र का सिर फटा और पांच लोग गंभीर रूप से घायल
बिहार के मुजफ्फरपुर जंक्शन पर उस वक्त अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, जब दिल्ली जाने वाली प्रतिष्ठित सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12557) की एक जनरल बोगी के भीतर सीट पर बैठने को लेकर दो पक्षों के बीच बात इतनी बढ़ गई कि उसने एक खूनी और हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया। ट्रेन के अंदर सीट कब्जाने या बैठने की मामूली सी बात पर शुरू हुई तीखी नोकझोंक पलभर में लात-घूंसों और लोहे की छड़ या डंडों से लैस होकर एक-दूसरे पर टूट पड़ने में बदल गई। इस वीभत्स मारपीट की घटना में एक पक्ष के पिता और पुत्र का सिर बुरी तरह फट गया, जबकि दोनों तरफ से कुल मिलाकर पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस अचानक हुई हिंसक झड़प से ट्रेन के यात्रियों में भारी दहशत फैल गई, लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और पूरा रेलवे स्टेशन परिसर कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
घटना का विवरण: कब और कैसे भड़का विवाद?
प्राप्त विस्तृत जानकारी के अनुसार, यह पूरी सनसनीखेज घटना सुबह के करीब 11:00 बजे मुजफ्फरपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर खड़ी या रवाना होने की स्थिति में मौजूद सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस की जनरल (साधारण) बोगी के अंदर घटी। सप्तक्रांति एक्सप्रेस जैसी व्यस्त और लंबी दूरी की ट्रेनों में जनरल बोगी की क्या स्थिति होती है, यह किसी से छिपी नहीं है—पैर रखने की जगह नहीं होती और सीटों के लिए यात्रियों में हमेशा होड़ मची रहती है।
सीट पर बैठने को लेकर तनातनी: ट्रेन में चढ़ने के दौरान एक यात्री द्वारा बैठने की जगह बनाने या पहले से आरक्षित/कब्जाई गई सीट पर बैठने को लेकर दूसरे पक्ष के लोगों से तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के तेवर तल्ख हो गए और वे शाब्दिक मर्यादा भूलकर बोगी के भीतर ही आपस में भिड़ गए।
हिंसक झड़प की शुरुआत: बहस इतनी आक्रामक हो गई कि एक पक्ष के लोगों ने कथित तौर पर दबंगई दिखाते हुए दूसरे यात्रियों पर हमला बोल दिया। कोच के भीतर ही ताबड़तोड़ थप्पड़, घूंसे और हाथ में मिले सामान या डंडों से मारपीट शुरू हो गई, जिससे बोगी के अंदर खून के छींटे तक बिखर गए।
क्रूरता का मंज़र: पिता-पुत्र का फटा सिर और घायलों की चीख-पुकार
इस हिंसक झड़प में सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति एक स्थानीय परिवार की रही, जो ट्रेन से सफर करने की उम्मीद में बोगी में सवार हुआ था।
पिता-पुत्र पर हमला: जब बीच-बचाव या विरोध करने की कोशिश की गई, तो हमलावरों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए एक बुजुर्ग पिता और उनके युवा पुत्र को निशाना बनाया। लोहे के किसी भारी वस्तु या नुकीले सामान के प्रहार से दोनों पिता-पुत्र का सिर फट गया, जिससे वे खून से लथपथ होकर बोगी के फर्श पर गिर पड़े।
अन्य घायलों की स्थिति: इस खूनी संघर्ष में दोनों पक्षों के अन्य लोग भी गंभीर रूप से जख्मी हुए। कुल मिलाकर तीन से पांच लोग ऐसे थे जिन्हें अंदरूनी चोटें आईं और उनके शरीर से खून बहने लगा। कोच के भीतर घायलों की दर्दनाक चीख-पुकार सुनकर बाकी यात्रियों की रूह कांप गई। कई यात्रियों ने अपनी सुरक्षा के लिए बोगी के दूसरे छोर या टॉयलेट के पास छिपकर अपनी जान बचाई।
ट्रेन का विलंब: 11 मिनट तक बाधित रहा संचालन
चूंकि यह हिंसक बवाल सीधे तौर पर ट्रेन के जनरल कोच के अंदर हुआ था, इसलिए सुरक्षा और अफरा-तफरी के कारण ट्रेन का परिचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
चेन पुलिंग और हंगामा: घटना के दौरान यात्रियों ने ट्रेन की चेन खींच दी (AC/General Chain Pulling) ताकि ट्रेन आगे न बढ़े और आरपीएफ (RPF) या जीआरपी (GRP) को बुलाया जा सके। बोगी के गेट पर और प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ जमा हो गई।
11 मिनट की देरी: इस पूरे हंगामे, मारपीट और यात्रियों को शांत कराने तथा घायलों को ट्रेन से उतारकर प्राथमिक उपचार दिलाने की जद्दोजहद के बीच सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब 11 मिनट तक मुजफ्फरपुर जंक्शन पर ही विलंबित (रुकी) रही। रेलवे के सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया और ट्रेन को गंतव्य के लिए रवाना किया।
रेलवे पुलिस (GRP/RPF) की कार्रवाई और सुरक्षा पर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही मुजफ्फरपुर जंक्शन पर तैनात राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीमें तुरंत हरकत में आईं और प्लेटफॉर्म पर पहुँचीं।
घायलों को अस्पताल भेजना: पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए खून से लथपथ घायल पिता-पुत्र और अन्य जख्मी यात्रियों को तुरंत ट्रेन से नीचे उतारा और इलाज के लिए मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल या नजदीकी रेलवे अस्पताल भिजवाया, जहाँ उनका चिकित्सीय उपचार शुरू हुआ।
उपद्रवी तत्वों की पहचान: पुलिस अधिकारियों ने बोगी के अन्य यात्रियों से पूछताछ कर इस पूरी झड़प की जानकारी ली और फरार या संलिप्त उपद्रवी तत्वों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों के बयान के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर भारतीय रेलवे की सामान्य (जनरल) बोगियों में सफर करने वाले आम यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। त्योहारों या पीक सीजन के दौरान ट्रेनों में उमड़ने वाली भारी भीड़ और सीटों को लेकर होने वाली खींचतान अक्सर इस तरह के हिंसक रूपों में बदल जाती है। यदि समय रहते रेलवे प्रशासन और सुरक्षा बल जनरल कोचों में गश्त और निगरानी को और अधिक सख्त न करें, तो इस तरह की अराजकताएं आम आदमी की जान के लिए हमेशा खतरा बनी रहेंगी।