आगनूर चौकी गांव में मरीजों को डेढ़ किलोमीटर तक कंधों पर ढोने को मजबूर ग्रामीण
आगनूर चौकी, 16 जुलाई: बिहार के एक गांव की यह तस्वीर विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यहां रात के सन्नाटे में यदि कोई व्यक्ति बीमार पड़ जाए या किसी गर्भवती महिला को अचानक अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ जाए, तो सबसे पहले एंबुलेंस या वाहन नहीं, बल्कि एक खाट (चारपाई) खोजी जाती है। चार ग्रामीण खाट के चारों कोने पकड़ते हैं और फिर शुरू होता है करीब डेढ़ किलोमीटर का कठिन और दर्दनाक सफर, ताकि मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाया जा सके। वहां से किसी वाहन की मदद से अस्पताल ले जाने की कोशिश होती है।
गांव के लोगों का कहना है कि वर्षों से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब कच्चा रास्ता कीचड़ में बदल जाता है और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है।
सड़क के अभाव में हर बीमारी बन जाती है चुनौती
आगनूर चौकी गांव के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना किसी परीक्षा से कम नहीं है। दिन में किसी तरह पैदल या बाइक से आवागमन संभव हो जाता है, लेकिन रात के समय स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।
यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती क्योंकि वहां तक जाने के लिए पक्की सड़क नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों को मरीज को खाट पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
डेढ़ किलोमीटर तक कंधों पर मरीज
ग्रामीण बताते हैं कि गांव से मुख्य सड़क की दूरी लगभग डेढ़ किलोमीटर है। यह रास्ता खेतों, ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों और कच्चे मार्ग से होकर गुजरता है।
चार लोग मरीज को खाट पर लिटाकर कंधों पर उठाते हैं और सावधानी के साथ आगे बढ़ते हैं। बारिश के दौरान यह सफर और भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि रास्ता फिसलन भरा हो जाता है।
गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक कठिनाई गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को होती है।
कई बार प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिलाओं को इसी तरह खाट पर अस्पताल ले जाना पड़ता है। वहीं बुजुर्गों और दुर्घटना में घायल लोगों को भी समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मरीजों के लिए शुरुआती "गोल्डन ऑवर" बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर अस्पताल न पहुंचे तो स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
बारिश में बढ़ जाती है मुश्किल
मानसून के दौरान गांव की समस्या कई गुना बढ़ जाती है। लगातार बारिश के कारण कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार खाट उठाकर चलने वाले लोग भी फिसल जाते हैं, जिससे मरीज को अतिरिक्त खतरा पैदा हो जाता है। कुछ स्थानों पर पानी भर जाने के कारण रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है।
एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती
सरकार की 102 और 108 एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध होने के बावजूद उनका पूरा लाभ गांव के लोगों को नहीं मिल पाता।
एंबुलेंस मुख्य सड़क तक तो पहुंच जाती है, लेकिन सड़क न होने के कारण गांव के अंदर नहीं जा सकती। ऐसे में मरीज को पहले मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी होती है।
वर्षों से सड़क की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के सामने सड़क निर्माण की मांग रखी है।
गांव के लोगों के अनुसार चुनाव के समय सड़क बनाने के कई वादे किए गए, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद कोई ठोस पहल नहीं हुई।
उनका कहना है कि यदि गांव तक पक्की सड़क बन जाए तो न केवल स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी बल्कि शिक्षा, कृषि और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित
सड़क नहीं होने का असर केवल मरीजों पर ही नहीं पड़ता। गांव के बच्चों को भी स्कूल जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
बरसात के मौसम में कई बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते क्योंकि रास्ता पूरी तरह कीचड़ से भर जाता है।
किसानों की बढ़ी परेशानी
गांव के अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं। सड़क न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में भी काफी दिक्कत होती है।
बारिश के मौसम में वाहन गांव तक नहीं पहुंचते, जिससे कृषि उत्पादों को समय पर बेच पाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
गांव के लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। उनका कहना है कि यदि समय पर सड़क बन जाए तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय
ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क किसी भी गांव के विकास की आधारभूत आवश्यकता है।
बेहतर सड़क संपर्क होने से स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, रोजगार, कृषि और आपातकालीन सेवाएं सभी बेहतर होती हैं। ऐसे गांवों में जहां आज भी मरीजों को खाट पर ले जाना पड़ता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर सड़क निर्माण किया जाना चाहिए।
प्रशासन की भूमिका
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेगा और जल्द सर्वे कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करेगा।
यदि संबंधित विभाग समय रहते आवश्यक कार्रवाई करता है तो आने वाले समय में गांव के लोगों को इस कठिनाई से राहत मिल सकती है।
आगनूर चौकी गांव की तस्वीर ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक चुनौतियों को सामने लाती है। जहां एक ओर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और एंबुलेंस नेटवर्क की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर आज भी ऐसे गांव मौजूद हैं जहां मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए खाट ही एंबुलेंस बन जाती है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग केवल एक पक्की सड़क है, ताकि बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और जरूरतमंद लोग समय पर अस्पताल पहुंच सकें। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कितनी जल्दी और प्रभावी कदम उठाता है।