कुलपति ने शिक्षकों से की छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील
दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के परिसर स्थित ऐतिहासिक जुबली हॉल में हाल ही में एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ, जिसे 'एलएनमुटा' (LNMITA) के नाम से जाना जाता है, की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का परिचयात्मक मिलन समारोह था। इस समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव, वरिष्ठ प्रोफेसरों और नवनिर्वाचित शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण: कुलपति का संबोधन
समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. संजय कुमार चौधरी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को सुधारने पर विशेष बल दिया। प्रो. चौधरी ने कहा, "शिक्षक और छात्र विश्वविद्यालय रूपी मंदिर के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। नई कार्यकारिणी की जिम्मेदारी है कि वे शिक्षकों की समस्याओं का समाधान तो करें ही, साथ ही विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास में प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें।"
उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि छात्रों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर कक्षाएं, परीक्षा परिणामों का त्वरित प्रकाशन और छात्रों के कौशल विकास पर ध्यान देना ही विश्वविद्यालय की असली उपलब्धि है।
नई कार्यकारिणी के संकल्प
नवनिर्वाचित अध्यक्ष और महासचिव ने अपने संक्षिप्त संबोधन में शिक्षकों के मान-सम्मान की रक्षा करने और विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यकारिणी ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही:
शिक्षकों की प्रोन्नति: रुकी हुई प्रोन्नति (Promotion) की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करवाना।
आधारभूत संरचना: विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में शोध और शिक्षण के लिए बेहतर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
संवाद: कुलपति कार्यालय और शिक्षक समुदाय के बीच एक 'सेतु' के रूप में काम करना ताकि छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान बातचीत से हो सके।
विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल की अहमियत
इस मिलन समारोह में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में मिथिला विश्वविद्यालय के सामने कई चुनौतियां हैं। नई पीढ़ी के छात्रों की बदलती जरूरतों को देखते हुए पाठ्यक्रम में सुधार और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को अपनाना अनिवार्य है।
शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि यदि विश्वविद्यालय में शांतिपूर्ण और अकादमिक वातावरण बना रहता है, तो उसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा और विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय रैंकिंग (NIRF) में सुधार होगा।
भविष्य की कार्ययोजना
समारोह के अंत में, एलएनमुटा की ओर से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का संकेत दिया गया। इसमें कहा गया कि हर तीन महीने पर शिक्षकों की एक आम सभा (General Body Meeting) बुलाई जाएगी, जिसमें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही, शिक्षकों के कल्याण के लिए एक 'वेलफेयर फंड' को सुदृढ़ करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
समारोह की कुछ मुख्य बातें:
सकारात्मक ऊर्जा: जुबली हॉल में शिक्षकों के बीच उत्साह का माहौल देखा गया, जो नई शुरुआत का संकेत है।
प्रशासनिक सहयोग: कुलपति की उपस्थिति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षकों के साथ एक सहयोगात्मक रिश्ते को बढ़ावा देने के पक्ष में है।
सामूहिक जिम्मेदारी: संघ ने माना कि केवल अधिकारों की मांग ही काफी नहीं है, बल्कि कर्तव्यों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की नई कार्यकारिणी का गठन विश्वविद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय हो सकता है। यदि कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी के आह्वान और शिक्षकों के संकल्प का मेल होता है, तो निश्चित रूप से इसका सकारात्मक प्रभाव विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ेगा। छात्रों का भविष्य विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है, और शिक्षकों की सक्रिय भूमिका इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।