हवेली खड़गपुर में मंदिरों को निशाना बना रहे चोर: शिव मंदिर से दो घंटियाँ चोरी, लोगों में गहरा आक्रोश
हवेली खड़गपुर (मुंगेर/बिहार): जिले के हवेली खड़गपुर क्षेत्र में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाली चोरों की सक्रियता ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। ताजा मामला स्थानीय शिव मंदिर का है, जहाँ अज्ञात चोरों ने मंदिर के गर्भगृह और परिसर में लगी दो बहुमूल्य घंटियाँ उड़ा लीं। यह घटना मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज के अभाव या सुरक्षा की कमी का फायदा उठाकर अंजाम दी गई है। इस चोरी के बाद से इलाके के श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश व्याप्त है।
घटना का विवरण
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात चोरों ने शिव मंदिर में प्रवेश किया और बड़ी चतुराई से मंदिर में लगी दो पीतल की घंटियाँ चोरी कर लीं। जब शुक्रवार की सुबह पुजारी पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुँचे, तो उन्होंने घंटियों को गायब पाया। घंटी न होने से मंदिर की पवित्रता और दैनिक पूजा के क्रम में बाधा उत्पन्न हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर का मुख्य दरवाजा तोड़ा नहीं गया था, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि चोरों ने बहुत ही शातिराना ढंग से मंदिर के आसपास के रास्तों का उपयोग किया और अंधेरे का लाभ उठाते हुए अपना काम पूरा किया।
लगातार बढ़ती चोरियों से दहशत
यह हवेली खड़गपुर में मंदिर चोरी की पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व इसी क्षेत्र में स्थित केसरी नंदन बजरंगबली मंदिर से भी चोरी की घटना सामने आ चुकी है, जहाँ से चोरों ने बजरंगबली मंदिर की घंटी और कुछ अन्य कीमती सामग्री चुरा ली थी।
लगातार एक के बाद एक धार्मिक स्थलों पर हो रही इन वारदातों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि सक्रिय गिरोह अब बेखौफ होकर मंदिरों को निशाना बना रहा है। लोगों का कहना है कि चोरों को पुलिस का बिल्कुल भी डर नहीं है।
स्थानीय आक्रोश और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और मंदिर समिति के सदस्य इकट्ठा हो गए। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़े सवाल खड़े किए:
गश्त का अभाव: स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय पुलिस की गश्त (Patrolling) न के बराबर है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
लगातार अनदेखी: बजरंगबली मंदिर की चोरी के बाद पुलिस ने आश्वासन तो दिया था, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई और न ही रिकवरी हुई। इसी लापरवाही के कारण चोरों के हौसले बुलंद हैं।
धार्मिक भावनाएँ: मंदिर में चोरी न केवल संपत्ति का नुकसान है, बल्कि यह श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं पर भी गहरा आघात है।
पुलिस का पक्ष और जाँच की दिशा
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय थाना पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे आसपास के इलाकों में लगे निजी सीसीटीवी कैमरों को खंगाल रहे हैं ताकि संदिग्धों की पहचान हो सके। साथ ही, इलाके के कबाड़ दुकानदारों और संदिग्ध व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने मंदिर समितियों से अपील की है कि वे मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और लाइटिंग की व्यवस्था करें।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?
इन घटनाओं ने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मंदिर समितियों और प्रशासन को मिलकर कुछ ठोस कदम उठाने की जरूरत है:
समन्वय: मंदिर समितियों को अपने क्षेत्र के थाना अध्यक्ष के साथ नियमित संपर्क में रहना चाहिए।
सुरक्षा उपकरण: कम से कम खर्च में मोशन-सेंसर वाले अलार्म या सीसीटीवी कैमरे लगाना अब अनिवार्य हो गया है।
सामुदायिक पहरेदारी: ग्रामीणों को एक 'नागरिक सुरक्षा समूह' बनाकर रात में मंदिरों की निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।
निगरानी: प्रशासन को उन क्षेत्रों में पुलिस पिकेट बढ़ाने की आवश्यकता है जहाँ इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं।
हवेली खड़गपुर के मंदिरों में चोरी का सिलसिला अगर नहीं रुका, तो आने वाले समय में यह स्थिति और भयावह हो सकती है। प्रशासन और पुलिस के लिए यह एक 'अग्निपरीक्षा' है कि वे इन चोरों को जल्द गिरफ्तार करें। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि दोषी जल्द पकड़े नहीं गए, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। मंदिर में चोरी महज अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक सुरक्षा का संकेत है जिसे तुरंत दुरुस्त करने की आवश्यकता है।