एनएच-80 पर स्थित कुआं नदी पुल के जर्जर होने से थमा वाहनों का पहिया; कहलगांव अनुमंडल का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक और व्यस्त क्षेत्र कहलगांव से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग-80 (NH-80) पर स्थित कुआं नदी पुल (कुआं पुल) के अत्यधिक जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच जाने के कारण जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से इस पर सभी प्रकार के वाहनों के परिचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस महत्वपूर्ण मार्ग के अचानक बंद होने से कहलगांव अनुमंडल सहित आसपास के इलाकों का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। भागलपुर से पीरपैंती और झारखंड की सीमा की ओर जाने वाले हजारों दैनिक यात्रियों, व्यवसायियों और आम जनता को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।
पुल के जर्जर होने से मची खलबली, प्रशासन का कड़ा कदम
एनएच-80 इस क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक जीवन रेखा मानी जाती है, जो भागलपुर को सीधे झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से जोड़ती है।
सुरक्षा सर्वोपरि: हाल ही में आई तकनीकी जांच रिपोर्ट में कुआं नदी पुल की स्थिति बेहद दयनीय और असुरक्षित पाई गई। भारी वाहनों के लगातार दबाव और समय पर रखरखाव न होने के कारण पुल के स्ट्रक्चर में खतरे के संकेत मिलने लगे थे।
तत्काल प्रतिबंध: किसी भी संभावित बड़ी दुर्घटना को टालने के लिए जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने संयुक्त रूप से कड़ा कदम उठाते हुए इस पुल से हल्के और भारी—दोनों तरह के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी है। पुल की मरम्मत का कार्य पूरा होने तक यह प्रतिबंध अनिश्चितकाल के लिए प्रभावी रहेगा।
कहलगांव अनुमंडल का जनजीवन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित
कुआं पुल के बंद होने का सबसे बुरा असर कहलगांव अनुमंडल के आम जनजीवन पर पड़ा है:
दैनिक यात्रियों और छात्रों की परेशानी: कहलगांव से भागलपुर पढ़ाई, नौकरी या व्यापार के सिलसिले में रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को अब लंबी और चक्रव्यूह जैसी दूरी तय करनी पड़ रही है। समय पर गंतव्य तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
व्यापारिक गतिविधियों को झटका: इस मार्ग से मालवाहक और व्यावसायिक वाहनों के गुजरने पर रोक लगने से स्थानीय बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई प्रभावित हुई है। व्यापारियों को माल मंगाने और भेजने के लिए महंगे और लंबे रूटों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत में भारी वृद्धि हुई है।
एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं: चिकित्सा आपातकाल के समय मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को भी वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे कीमती समय की बर्बादी हो रही है और मरीजों की जान पर जोखिम बढ़ गया है।
यातायात व्यवस्था के लिए नए वैकल्पिक मार्ग (Diversion Routes)
यात्रियों की सुविधा और जाम की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कुछ वैकल्पिक मार्गों की घोषणा की है, हालांकि इनसे यात्रा का समय और दूरी दोनों बढ़ गए हैं:
हल्के वाहनों के लिए रूट: भागलपुर (जीरोमाइल) से पीरपैंती की ओर जाने वाले हल्के वाहन अब घोघा, घोघा मोड़, स्टेट हाईवे-84 (SH-84), दोगच्छी ताड़र मोड़ और नए फोर-लेन एनएच-80 के रास्ते आवाजाही कर रहे हैं। वापसी के लिए भी इसी मार्ग का उपयोग किया जा रहा है।
भारी वाहनों के लिए विशेष रूट और समय: सुरक्षा और जाम नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए भारी वाहनों के लिए रात्रि कालीन व्यवस्था की गई है। पीरपैंती से भागलपुर की ओर आने वाले भारी वाहन रात 9 बजे से सुबह 6 बजे के बीच निर्धारित डायवर्जन रूट—बाराहाट, ललमटिया, महगामा (केचुआ चौक), नयानगर, हनवारा, सन्हौला चौक, कोतवाली और जगदीशपुर होते हुए भागलपुर बाइपास पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश और जल्द मरम्मत की मांग
सड़क और पुल की इस बदतर हालत को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते पुल और सड़क की मरम्मत पर ध्यान दिया जाता, तो आज यह नौबत नहीं आती। ग्रामीणों और वाहन चालकों ने मांग की है कि युद्ध स्तर पर काम शुरू कर इस पुल को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि आम जनता को इस नरकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।
एनएच-80 पर स्थित कुआं पुल का बंद होना बुनियादी ढांचे की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता का एक और बड़ा उदाहरण है। हालांकि प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग देकर तात्कालिक राहत देने की कोशिश की है, लेकिन जब तक पुल की मुकम्मल मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक कहलगांव अनुमंडल के लोगों की मुश्किलें यूं ही बनी रहेंगी। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को समय सीमा के भीतर पूरा करे।