बरारी घाट पर गंगा नदी में कूदकर एक महिला ने दी जान देने की कोशिश; एसडीआरएफ (SDRF) की त्वरित और जांबाज कार्रवाई से बची जिंदगी, पारिवारिक कलह और जीवन से हताशा बनी वजह
भागलपुर, विशेष संवाददाता: बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर स्थित गंगा नदी के प्रसिद्ध बरारी घाट पर बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक महिला ने अचानक मौत को गले लगाने के इरादे से उफनती नदी की धाराओं में छलांग लगा दी। हालांकि, वहां मुस्तैद राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम के लिए यह पल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। एसडीआरएफ के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अद्भुत तत्परता और पेशेवर कौशल का परिचय देते हुए नदी की तेज धार के बीच से महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद महिला की जान तो बचा ली गई, लेकिन प्रारंभिक पूछताछ में उसने जो वजह बताई, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। महिला ने पुलिस के सामने यह बात कबूली कि वह अब इस दुनिया में और जीना नहीं चाहती है।
कैसे घटी पूरी घटना? (बरारी घाट पर मची अफरा-तफरी)
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर के वक्त बरारी घाट पर हमेशा की तरह आम दिनों जैसी चहल-पहल थी। लोग गंगा स्नान और पूजा-पाठ में व्यस्त थे:
अचानक उठाया गया खौफनाक कदम: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वह महिला चुपचाप घाट के किनारे पहुंची और बिना किसी को कुछ बताए सीधे गहरे पानी की तरफ बढ़ती चली गई। इससे पहले कि आसपास मौजूद लोग या घाट पर टहल रहे अन्य श्रद्धालु कुछ समझ पाते, उसने गंगा नदी में छलांग लगा दी।
घाट पर चीख-पुकार: पानी में कूदते ही महिला डूबने लगी और धारा के साथ तेजी से आगे बढ़ने लगी। यह देख घाट पर मौजूद लोगों के बीच चीख-पुकार मच गई। लोग शोर मचाने लगे कि कोई महिला नदी में डूब रही है।
फरिश्ता बनकर आई एसडीआरएफ (SDRF) की टीम
बरारी घाट पर किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए तैनात एसडीआरएफ की रेस्क्यू टीम के लिए यह एक 'अलर्ट' कॉल साबित हुई:
सेकंडों में शुरू हुआ रेस्क्यू: जैसे ही एसडीआरएफ के जवानों की नजर महिला के नदी में कूदने पर पड़ी, बिना एक पल गंवाए मोटरबोट पर सवार गोताखोर और जवान तुरंत हरकत में आ गए।
मुश्किल हालात में बचाई जान: गंगा नदी के उस हिस्से में पानी का बहाव और गहराई काफी ज्यादा थी, लेकिन एसडीआरएफ के प्रशिक्षित जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर तुरंत महिला की तरफ अपनी बोट दौड़ाई। एक जवान ने पानी में छलांग लगाकर डूब रही महिला को अपनी मजबूत पकड़ में लिया और सुरक्षित मोटरबोट पर खींच लिया। जवानों की इस सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई ने एक हंसते-खेलते परिवार को बिखरने से बचा लिया।
बरारी थाना लाकर की गई काउंसलिंग और पूछताछ
पानी से बाहर निकालने के बाद महिला की हालत की प्राथमिक जांच की गई और उसे तुरंत सुरक्षित बरारी थाना लाया गया:
पुलिस की संवेदनशीलता: थाने पहुंचते ही महिला पुलिसकर्मियों ने महिला को ढांढस बंधाया, उसे पानी पिलाया और मानसिक रूप से सामान्य करने का प्रयास किया। शुरुआती सदमे से बाहर आने के बाद जब पुलिस ने उससे नदी में कूदने का कारण पूछा, तो उसने बेहद दर्दनाक बात कही।
"मैं अब और जीना नहीं चाहती...": महिला ने फफकते हुए पुलिस अधिकारियों को बताया कि वह पारिवारिक कलह, घरेलू तनाव और जीवन में लगातार मिल रही निराशाओं से पूरी तरह टूट चुकी थी। उसे अपने जीवन में कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी, जिसके चलते उसने मौत को ही अपनी सभी समस्याओं का अंतिम समाधान मान लिया था।
परिवार की तलाश और आगे की कानूनी व सामाजिक प्रक्रिया
बरारी थाना पुलिस अब इस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है:
परिजनों से संपर्क: पुलिस ने महिला के पास से मिले कुछ कड़ियों और बयानों के आधार पर उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी है। भागलपुर के आसपास के थानों में भी गुमशुदगी या इस तरह की किसी अन्य जानकारी को खंगाला जा रहा है ताकि उसके घर-परिवार के सदस्यों को तुरंत सूचित किया जा सके।
काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता: जिला प्रशासन और पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि इस प्रकार के मामलों में केवल कानूनी औपचारिकताएं न पूरी की जाएं, बल्कि पेशेवर काउंसलर की मदद से महिला की मानसिक स्थिति को ठीक किया जाए ताकि वह भविष्य में ऐसा कोई कदम न उठाए।
भागलपुर के बरारी घाट पर घटी यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि जीवन अनमोल है और थोड़ी सी सूझबूझ से किसी की जान बचाई जा सकती है। एसडीआरएफ के जवानों की वीरता ने जहां एक तरफ एक महिला की सांसों को थमने से बचा लिया, वहीं यह घटना समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवादहीनता आज कितनी गंभीर समस्या बनती जा रही है। समय रहते अपनों का साथ और सही काउंसलिंग इस तरह के जानलेवा कदमों को रोकने में सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकती है।