पूर्णिया में मूसलाधार बारिश का तांडव: 78 मिमी बारिश से शहर पानी-पानी, जलजमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त; एक तरफ जहां शहरवासी परेशान, वहीं किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में मानसूनी बादलों ने मंगलवार की रात से लेकर बुधवार की सुबह तक ऐसा कहर बरपाया कि पूरा शहर जलमग्न हो गया। महज कुछ ही घंटों के भीतर हुई मूसलाधार बारिश ने जिला प्रशासन के उन तमाम दावों की पोल खोल दी, जिसमें हर साल मानसून से पहले जल निकासी के पुख्ता इंतजाम किए जाने का दावा किया जाता है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान 78 मिलीमीटर (mm) रिकॉर्ड वर्षा दर्ज की गई, जिसने शहर के निचले इलाकों से लेकर प्रमुख सड़कों तक को झील में तब्दील कर दिया। जहाँ एक ओर इस भारी बारिश और भयंकर जलजमाव ने शहरी इलाकों के आम जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया और शहरवासियों की मुसीबतें बढ़ा दीं, वहीं दूसरी ओर कृषि प्रधान इस क्षेत्र के किसानों के लिए यह बारिश किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई और उनके चेहरों पर एक नई उम्मीद व मुस्कान लौट आई है।
जलजमाव से त्रस्त शहरवासी: सड़कों से लेकर घरों तक घुसा पानी
मंगलवार की देर रात शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक लगातार झमाझम बरसती रही। सुबह जब लोग जागे, तो उन्होंने अपने घरों के बाहर और सड़कों पर केवल पानी ही पानी देखा।
मुख्य मार्ग और कॉलोनियां डूबीं: पूर्णिया शहर के कई प्रतिष्ठित मोहल्लों, बाजार क्षेत्रों और प्रमुख चौराहों पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा हो गया। नाले और सड़कें एक समान नजर आने लगे, जिससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
दुकानों और घरों में घुसा गंदा पानी: निचले इलाकों में स्थिति तब और बदतर हो गई जब नालों का गंदा और बदबूदार पानी ओवरफ्लो होकर लोगों के घरों और दुकानों के अंदर तक जा घुसा। इससे घरेलू सामान और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान हुआ है। लोगों को खुद ही बाल्टी और पंप लगाकर अपने घरों से पानी बाहर निकालना पड़ा।
बच्चों की पढ़ाई पर असर: भारी जलजमाव और लगातार बारिश के कारण सुबह स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों और उनके अभिभावकों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। कई जगहों पर जलजमाव के कारण स्कूली वाहनों के पहिए भी थम गए।
नगर निगम के दावों की खुली पोल
हर साल मानसून पूर्व नाला उड़ाही और जल निकासी के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन 78 मिमी की इस पहली ही बड़ी बारिश ने निगम प्रशासन के सारे इंतजामों की पोल खोलकर रख दी।
अवरुद्ध जल निकासी प्रणाली: शहर के अधिकांश नाले या तो कचरे से पटे पड़े थे या उनकी सही से सफाई नहीं हुई थी, जिसके कारण बारिश का पानी समय पर निकल नहीं पाया और मुख्य सड़कों पर कृत्रिम बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए।
स्थानीय लोगों का आक्रोश: परेशान शहरवासियों ने जिला प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हर साल बारिश के मौसम में उन्हें इसी प्रकार की नरकीय स्थिति का सामना करना पड़ता है, लेकिन जनप्रतिनिधि और अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर खानापूर्ति कर लेते हैं।
किसानों के लिए वरदान बनी बारिश: धान की रोपाई और फसलों को मिली नई जिंदगी
एक तरफ जहाँ शहरी इलाकों में यह बारिश आफत बनकर बरसी, वहीं ग्रामीण अंचल और खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए यह किसी अमृत से कम नहीं थी।
धान की खेती को संजीवनी: इस समय धान की फसल की रोपाई और उसके विकास का मुख्य दौर चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण खेत सूखने लगे थे और किसानों को निजी पंपसेट से महंगे डीजल का उपयोग करके खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही थी।
लागत में भारी कमी: 78 मिमी की इस भारी बारिश ने सूखे की मार झेल रहे खेतों को तर-बतर कर दिया। अब किसानों को धान के बिचड़ों को बचाने और नए खेतों की जुताई-रोपाई करने के लिए पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। किसानों का कहना है कि इस बारिश से उनकी सिंचाई की लागत में भारी कमी आएगी और फसलों की पैदावार में भी बंपर बढ़ोतरी होगी।
पूर्णिया में मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक हुई इस मूसलाधार बारिश ने दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कीं। जहाँ शहरी जीवन और बुनियादी प्रशासनिक व्यवस्था इस बारिश के आगे बेबस नजर आई और लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, वहीं किसानों के खेतों में यह बारिश खुशहाली और समृद्धि की नई उम्मीद लेकर आई। यह स्थिति एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कितनी मुस्तैदी की जरूरत है, ताकि प्रकृति का यह वरदान किसी के लिए आफत न बने।