लक्ष्मी नारायण उच्च विद्यालय मलिकपुर में तीन दिवसीय बागवानी और फ्लोरीकल्चर प्रशिक्षण संपन्न, पहले बैच के 27 विद्यार्थियों को मिला प्रशिक्षण

भागलपुर। पीरपैंती प्रखंड के लक्ष्मी नारायण उच्च विद्यालय मलिकपुर में विद्यार्थियों के कौशल विकास और उन्हें व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय बागवानी एवं फ्लोरीकल्चर प्रशिक्षण शनिवार को संपन्न हो गया। प्रशिक्षण के समापन सत्र में विद्यालय के शिक्षक, जनप्रतिनिधियों के प्रतिनिधि, प्रशिक्षक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले बैच में विद्यालय के 27 विद्यार्थियों को बागवानी और फूलों की खेती से जुड़ी तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ कृषि और उद्यानिकी से जुड़े कौशल से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में इसे रोजगार और स्वरोजगार के विकल्प के रूप में भी देख सकें।

दीप प्रज्वलित कर शुरू हुआ समापन सत्र

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान विधायक प्रतिनिधि, विद्यालय के प्रधानाध्यापक, शिक्षक, प्रशिक्षण से जुड़े विशेषज्ञ और अन्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को मिली जानकारी और उनके अनुभवों पर चर्चा की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि बागवानी और फ्लोरीकल्चर आज केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक कृषि और उद्यमिता के क्षेत्र में इनके जरिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

विद्यालय प्रशासन ने प्रशिक्षण में शामिल विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

पहले बैच में 27 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण

इस कार्यक्रम के पहले बैच में कुल 27 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। तीन दिनों के दौरान विद्यार्थियों को बागवानी के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया।

प्रशिक्षण में पौधों की देखभाल, मिट्टी की तैयारी, पौधरोपण, सिंचाई, खाद और उर्वरक के इस्तेमाल तथा पौधों को रोगों से बचाने जैसे विषयों पर जानकारी दी गई।

इसके अलावा फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की खेती से संबंधित तकनीकों के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया गया। फूलों की विभिन्न प्रजातियों की पहचान, उनकी खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियां और देखभाल के तरीके प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।

व्यावहारिक शिक्षा पर जोर

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक रूप से भी प्रशिक्षित करना था।

बागवानी ऐसा क्षेत्र है जिसमें केवल किताबों से जानकारी हासिल करना पर्याप्त नहीं है। पौधों की वास्तविक देखभाल, मिट्टी की स्थिति को समझना, सिंचाई की जरूरत और पौधों के विकास की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझना जरूरी होता है।

इसी वजह से प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया गया। इससे विद्यार्थियों को पौधों और फूलों की खेती की वास्तविक प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला।

फ्लोरीकल्चर में रोजगार की संभावनाएं

फ्लोरीकल्चर यानी फूलों की खेती कृषि आधारित रोजगार का एक उभरता हुआ क्षेत्र है। शादी समारोह, धार्मिक आयोजन, सजावट, होटल और अन्य कार्यक्रमों में फूलों की मांग रहती है।

इसके अलावा फूलों से गुलदस्ते, सजावटी उत्पाद और अन्य सामग्री तैयार कर छोटे स्तर पर व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है।

विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान इस क्षेत्र में मौजूद संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि उचित तकनीक और बाजार की जानकारी के साथ फूलों की खेती को व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा सकता है।

बागवानी से स्वरोजगार के अवसर

बागवानी का क्षेत्र भी युवाओं के लिए स्वरोजगार के कई अवसर उपलब्ध कराता है। फल, सब्जियां, फूल और सजावटी पौधों की नर्सरी से जुड़ा काम छोटे स्तर से शुरू किया जा सकता है।

प्रशिक्षित विद्यार्थी भविष्य में पौधों की नर्सरी, फूलों की खेती या अन्य उद्यानिकी गतिविधियों से जुड़ सकते हैं।

यदि उन्हें सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और कृषि विभाग की तकनीकी सहायता की जानकारी भी मिलती है तो वे स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।

विद्यार्थियों में कृषि के प्रति रुचि बढ़ाने की पहल

आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों के कई युवा पारंपरिक खेती से अलग रोजगार के विकल्प तलाश रहे हैं। ऐसे में विद्यालय स्तर पर बागवानी और फ्लोरीकल्चर जैसे विषयों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों में कृषि के प्रति नई रुचि पैदा कर सकता है।

इस तरह के प्रशिक्षण से विद्यार्थी कृषि को केवल पारंपरिक पेशे के रूप में नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक और व्यवसाय से जुड़े क्षेत्र के रूप में देख सकते हैं।

विद्यालय में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने में भी मदद कर सकता है।

स्कूल स्तर पर कौशल विकास पर जोर

नई शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है।

बागवानी और फ्लोरीकल्चर का प्रशिक्षण इसी दिशा में एक उपयोगी पहल माना जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को कृषि, पर्यावरण और उद्यमिता से जुड़े विषयों की जानकारी कम उम्र में मिलती है।

ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य के करियर विकल्पों को समझने में भी मदद करते हैं।

पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा है प्रशिक्षण

बागवानी का संबंध केवल रोजगार से नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण से भी है। पौधों का रोपण और उनकी देखभाल पर्यावरण को बेहतर बनाने में योगदान देती है।

विद्यार्थियों को पौधों के महत्व, हरित क्षेत्र बढ़ाने और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी इस तरह के कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण उद्देश्य हो सकता है।

विद्यालय परिसर में पौधों और फूलों की देखभाल से विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित की जा सकती है।

स्थानीय स्तर पर मिल सकता है फायदा

पीरपैंती और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और उद्यानिकी की पर्याप्त संभावनाएं हैं। यदि स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीक और बाजार की जानकारी मिलती है तो वे अपने क्षेत्र में ही रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तलाश सकते हैं।

बागवानी और फ्लोरीकल्चर जैसी गतिविधियों के लिए बड़े स्तर पर जमीन की आवश्यकता हमेशा नहीं होती। छोटे क्षेत्र में भी पौधों की नर्सरी या फूलों की खेती शुरू की जा सकती है।

इस कारण ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए यह प्रशिक्षण विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।

प्रशिक्षण के बाद आगे की चुनौती

हालांकि 27 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिलना एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन इसके बाद उन्हें आगे की गतिविधियों से जोड़ना भी महत्वपूर्ण होगा।

यदि प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों को उन्नत प्रशिक्षण, कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं की जानकारी और बाजार से जुड़ने का अवसर मिले तो इसका लाभ अधिक व्यापक हो सकता है।

विद्यालय स्तर पर समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाने से विद्यार्थियों को लगातार नई तकनीकों की जानकारी मिल सकती है।

प्रशिक्षणार्थियों के अनुभवों पर चर्चा

समापन कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के अनुभवों पर भी चर्चा की गई। प्रशिक्षणार्थियों ने तीन दिनों के दौरान पौधों की देखभाल और फूलों की खेती से संबंधित कई नई जानकारियां हासिल कीं।

विद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि विद्यार्थियों में विकसित यह कौशल भविष्य में उनके लिए उपयोगी साबित होगा।

प्रशिक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने भी विद्यार्थियों को नियमित रूप से अभ्यास करने और पौधों की देखभाल की प्रक्रिया को समझने की सलाह दी।

आगे भी प्रशिक्षण कार्यक्रम की संभावना

पहले बैच में 27 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिए जाने के बाद विद्यालय में आगे भी ऐसे कार्यक्रमों को जारी रखने की संभावना बनती है।

यदि प्रशिक्षण के अगले चरण में अधिक विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है तो इसका लाभ बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच सकता है।

स्कूल और स्थानीय स्तर पर कृषि एवं उद्यानिकी से जुड़े संस्थानों के सहयोग से ऐसे कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

पीरपैंती के लक्ष्मी नारायण उच्च विद्यालय मलिकपुर में आयोजित तीन दिवसीय बागवानी और फ्लोरीकल्चर प्रशिक्षण कार्यक्रम शनिवार को संपन्न हो गया। समापन सत्र का शुभारंभ विधायक प्रतिनिधि, प्रधानाध्यापक और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

प्रशिक्षण के पहले बैच में 27 विद्यार्थियों को बागवानी और फूलों की खेती से संबंधित तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।

इस पहल से विद्यार्थियों को कृषि और उद्यानिकी के आधुनिक स्वरूप को समझने का अवसर मिला। साथ ही उन्हें भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के संभावित विकल्पों के बारे में भी जानकारी मिली।

यदि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लगातार जारी रखा जाता है और प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थियों को आगे की तकनीकी सहायता तथा बाजार से जोड़ा जाता है, तो यह पहल ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।