चाय बागानों की आड़ में पनप रहा साइबर अपराध का काला साम्राज्य: पश्चिम बंगाल का चोपड़ा बना साइबर ठगों का नया 'जामताड़ा'
भागलपुर/कोलकाता: भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले का चोपड़ा इलाका अब साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक केंद्र बनकर उभरा है। कभी शांतिपूर्ण चाय बागानों के लिए मशहूर इस क्षेत्र में अब साइबर ठगों ने अपने पैर पसार लिए हैं। हाल ही में हुए कई खुलासों से पता चला है कि यह गिरोह न केवल पश्चिम बंगाल में, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार के लोगों को भी अपना मुख्य निशाना बना रहा है। अब तक बिहार के दर्जनों लोगों से लाखों रुपये की ठगी की जा चुकी है, जिससे आम जनता में दहशत का माहौल है।
चाय बागानों की आड़ में सुरक्षित पनाहगाह
जांच एजेंसियों के अनुसार, चोपड़ा की भौगोलिक स्थिति साइबर अपराधियों के लिए बेहद मुफीद साबित हो रही है। चाय बागानों के घने और दुर्गम इलाकों के बीच बैठकर ये अपराधी पुलिस और सुरक्षा बलों की नजरों से बचकर अपने गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। ये ठग इतने शातिर हैं कि इन्होंने अपने छिपने के लिए सीमावर्ती इलाकों को चुना है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे आसानी से अपनी लोकेशन बदल सकें या सीमा पार का फायदा उठा सकें।
कैसे काम करता है यह गिरोह?
बिहार और अन्य राज्यों के लोगों को शिकार बनाने के लिए यह गिरोह पूरी तरह से संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम है। इनकी कार्यप्रणाली के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
सोशल मीडिया और फर्जी लिंक: ठग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं, लॉटरी या कम ब्याज दर पर ऋण दिलाने का झांसा देते हैं।
टेक्निकल जाल: शिकार को एक अनजान लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनके मोबाइल या कंप्यूटर का पूरा एक्सेस ठगों के पास चला जाता है।
एनीडेस्क (AnyDesk) जैसे एप्स का इस्तेमाल: ये ठग तकनीकी मदद के बहाने 'रिमोट डेस्कटॉप' एप्लीकेशन डाउनलोड करवाते हैं और पलक झपकते ही बैंक खाते साफ कर देते हैं।
बिहार बना मुख्य निशाना
पिछले कुछ महीनों में बिहार के भागलपुर, पटना और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों से साइबर ठगी की कई शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनका 'डिजिटल फुटप्रिंट' चोपड़ा (पश्चिम बंगाल) की ओर इशारा कर रहा है। ठगों ने बिहार के लोगों के डेटाबेस को डार्क वेब या अन्य स्रोतों से प्राप्त किया है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन करके निशाना बना रहे हैं। लाखों रुपये गंवा चुके पीड़ित अब स्थानीय पुलिस से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन भौगोलिक सीमाओं के कारण जांच में देरी हो रही है।
प्रशासन और पुलिस के सामने बड़ी चुनौती
हालांकि, इस मामले में पश्चिम बंगाल और बिहार पुलिस के बीच समन्वय की कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन अपराधियों का अंतर-राज्यीय नेटवर्क एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सीमावर्ती इलाकों में साइबर सेल को अधिक सक्रिय नहीं किया जाएगा और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान नहीं चलाया जाएगा, तब तक इन गिरोहों पर नकेल कसना मुश्किल होगा।
चोपड़ा का यह नया साइबर हॉटस्पॉट इस बात का संकेत है कि अब अपराध का स्वरूप पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपने ओटीपी (OTP) किसी के साथ साझा न करें और संदेह होने पर तुरंत 1930 नंबर पर शिकायत दर्ज करें। चाय बागानों की हरियाली के पीछे छिपे इस साइबर जहर को मिटाने के लिए अब कड़े कानूनी प्रहार की आवश्यकता है।