नीतीश के आवास पहुंचे आरसीपी सिंह, लेकिन 20 मिनट के इंतजार के बाद भी नहीं पिघली 'बर्फ'! 

बिहार की हाई-प्रोफाइल राजनीति से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जेडीयू (JDU) से अपमानजनक विदाई के बाद बीजेपी और फिर जन सुराज जैसी पार्टियों का चक्कर काट चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह (रामचंद्र प्रसाद सिंह) शनिवार की सुबह अचानक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात करने उनके पटना स्थित 7, सर्कुलर रोड आवास पर पहुंच गए। उनके साथ करीब 20 से 25 वफादार समर्थकों का हुजूम भी मौजूद था।

इस अचानक हुई दस्तक के बाद पूरे सूबे के राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें बेहद तेज हो गईं कि क्या आरसीपी सिंह की जेडीयू में 'घर वापसी' (Homecoming) होने वाली है? हालांकि, 1 अणे मार्ग और नीतीश आवास के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसने इस सियासी ड्रामे को एक बिल्कुल नया और कड़वा मोड़ दे दिया है। मुलाकात की उम्मीद लेकर गए आरसीपी सिंह को न सिर्फ लंबा इंतजार करना पड़ा, बल्कि नीतीश कुमार के रुख ने साफ कर दिया कि राजनीति के पुराने जख्म इतनी आसानी से नहीं भरते।

 20 मिनट का इंतजार और सिर्फ 'एक इशारा': आवास के भीतर क्या हुआ?

चश्मदीदों और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, आरसीपी सिंह सुबह-सुबह नीतीश कुमार के आवास के बरामदे में जाकर बैठ गए। कयास लगाए जा रहे थे कि दोनों पुराने दोस्त और राजनेता करीब 4 साल बाद एक साथ बैठकर लंबी गुफ्तगू करेंगे।

मुलाकात से रोका गया: आरसीपी सिंह के समर्थकों का आरोप है कि जदयू के दो कद्दावर विधान पार्षद (MLC) संजय गांधी और ललन सराफ ने आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार के मुख्य चेंबर में जाने से जानबूझकर रोका और उन्हें 20 मिनट तक बाहर ही बिठाकर रखा।

नीतीश का ठंडा रुख: इसी बीच जब नीतीश कुमार अपने कमरे से बाहर निकले, तो अचानक उनकी नजर वहां बैठे आरसीपी सिंह पर पड़ी। आरसीपी सिंह ने तुरंत खड़े होकर हाथ जोड़कर उन्हें 'प्रणाम' किया। लेकिन, कभी अपने सबसे खास रहे आरसीपी के लिए नीतीश कुमार के चेहरे पर कोई गर्मजोशी नहीं दिखी। उन्होंने किसी आम, अनजान कार्यकर्ता की तरह महज हवा में एक छोटा सा इशारा किया और बिना रुके सीधे अंदर चले गए।

समर्थकों का हंगामा: अंदर से संदेश भिजवा दिया गया कि मुख्यमंत्री अभी बेहद व्यस्त हैं और मुलाकात संभव नहीं है। इससे नाराज होकर आरसीपी सिंह को बिना बात किए वापस लौटना पड़ा। इसके बाद उनके गुस्से से लाल समर्थकों ने नीतीश आवास के बाहर ही जदयू के दोनों एमएलसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।

 एक नज़र में: आरसीपी-नीतीश 'फ्लॉप' मुलाकात का डेटा

राजनीतिक घटनाक्रमग्राउंड जीरो की वास्तविक स्थिति
मुलाकात का स्थानपूर्व सीएम नीतीश कुमार का आवास, पटना
मुख्य किरदारआरसीपी सिंह (पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, जेडीयू) और नीतीश कुमार
इंतजार का समयबरामदे में लगभग 20 मिनट
मुलाकात का नतीजापूरी तरह विफल (कोई बातचीत नहीं हुई, केवल औपचारिक इशारा)
तनाव की वजहजदयू के आंतरिक गुट (ललन सिंह और श्रवण कुमार कैंप) का भारी विरोध
आरसीपी का अगला रुख"नीतीश मेरे अभिभावक हैं, अभी थोड़ा और इंतजार कीजिए"

 

 जेडीयू का पुराना जख्म: क्यों आरसीपी से दूरी बना रहे हैं नीतीश?

शनिवार को नीतीश कुमार के दरवाजे आरसीपी सिंह के लिए न खुलने के पीछे एक लंबी और कड़वी राजनीतिक पृष्ठभूमि (Background) है। एक समय था जब आरसीपी सिंह को जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद नंबर-2 की हैसियत हासिल थी, लेकिन 2021-22 में दोनों के बीच गहरी खाई खिंच गई।

केंद्रीय मंत्री पद का विवाद: 2021 में जब आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार की मर्जी के खिलाफ जाकर केंद्र की नरेंद्र मोदी कैबिनेट में इस्पात मंत्री का पद स्वीकार कर लिया, तो नीतीश को लगा कि आरसीपी जेडीयू को तोड़कर बीजेपी के पाले में ले जाना चाहते हैं।

राज्यसभा टिकट कटना और इस्तीफा: नीतीश कुमार ने बदला लेते हुए जुलाई 2022 में आरसीपी सिंह का राज्यसभा रिन्यूअल रोक दिया, जिसके कारण उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। बाद में जेडीयू ने उन पर भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति (58 प्लॉट खरीदने) के आरोप लगाए, जिसके बाद आरसीपी ने जेडीयू को "डूबता हुआ जहाज" बताते हुए इस्तीफा दे दिया था।

बीजेपी से जन सुराज का सफर: जेडीयू छोड़ने के बाद आरसीपी पहले बीजेपी में गए, फिर उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और बाद में प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' पार्टी में शामिल हो गए। लेकिन वहां भी साइडलाइन होने के बाद अब वे वापस जेडीयू का रुख कर रहे हैं।

 "नीतीश मेरे अभिभावक हैं, इंतजार कीजिए" — आरसीपी सिंह का बयान

नीतीश आवास से बिना बात किए लौटने के बाद भी आरसीपी सिंह ने मीडिया के सामने बेहद सधा हुआ और संयमित बयान दिया। उन्होंने सीधे तौर पर अपनी नाराजगी छिपाने की कोशिश की।

आरसीपी सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा:

"आज सुबह नीतीश जी से मेरी आमने-सामने मुलाकात और बातचीत हुई है। चूंकि हमारे कार्यकर्ता अपने नेता से 4 साल बाद मिल रहे थे, तो उनकी इच्छा थी कि 1-2 घंटे बैठकर लंबी बात हो। जब ऐसा नहीं हुआ, तो कार्यकर्ता थोड़े भावुक और गुस्से में आ गए। मैंने नीतीश जी के साथ 25 साल लंबा काम किया है, वे मेरे अभिभावक हैं। जेडीयू में मेरी वापसी होगी या नहीं, इस सवाल पर मैं बस यही कहूंगा कि आप लोग थोड़ा 'इंतजार' कीजिए, जल्द ही सब पता चल जाएगा।"

 बिहार की राजनीति का अगला विजन: क्या होगी घर वापसी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी की राह इतनी आसान नहीं है। जेडीयू के भीतर इस समय दो बेहद शक्तिशाली गुट—केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार के मंत्री श्रवण कुमार—आरसीपी की एंट्री का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। श्रवण कुमार पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत नहीं है जिसने मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर सवाल उठाए हों।

हालांकि, हाल ही में जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को जेडीयू का भावी चेहरा और उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के बाद पार्टी के भीतर नए समीकरण बन रहे हैं। आरसीपी सिंह खुद कुर्मी समाज से आते हैं, जो नीतीश कुमार का मुख्य वोट बैंक (लव-कुश समीकरण) है।

 पटना में शनिवार को हुआ यह हाई-प्रोफाइल राजनीतिक ड्रामा दर्शाता है कि बिहार की राजनीति की स्क्रिप्ट हर मिनट बदल रही है। आरसीपी सिंह ने नीतीश कुमार के सामने झुककर अपने इरादे साफ कर दिए हैं कि वे जेडीयू में वापस आना चाहते हैं। लेकिन नीतीश कुमार का ठंडा रवैया और जेडीयू के सिपहसालारों की घेराबंदी यह बताती है कि आरसीपी के लिए जेडीयू के 'पावर कॉरिडोर' में एंट्री पाना अभी दिल्ली दूर होने जैसा है। देखना दिलचस्प होगा कि आरसीपी का यह 'इंतजार' जेडीयू में किसी नए पद के साथ खत्म होता है या फिर बंद दरवाजों की यह कहानी उन्हें किसी नए सियासी मोड़ पर ले जाती है!