कोसी-सीमांचल के सड़क विकास और एक्सप्रेसवे को लेकर उठाई जोरदार मांग

 क्षेत्रीय विकास और जनसमस्याओं के प्रति अपनी सक्रियता को एक बार फिर रेखांकित करते हुए पूर्णिया के लोकप्रिय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से एक उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा कोसी और सीमांचल क्षेत्र की वर्षों से लंबित पड़ी महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को गति देना, अधूरे पड़े राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) के निर्माण कार्य को समय पर पूरा कराना और यातायात को सुगम बनाने के लिए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण सुनिश्चित करना था।

सांसद पप्पू यादव ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष कोसी-सीमांचल की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सड़क बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के महत्व को प्रमुखता से रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र का समग्र विकास तब तक संभव नहीं है जब तक यहां मजबूत और आधुनिक सड़क नेटवर्क स्थापित नहीं किया जाता।

मुलाकात के प्रमुख बिंदु और उठाई गई मांगें

सांसद पप्पू यादव द्वारा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को सौंपे गए मांग पत्र और चर्चा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया:

एनएच-107 और एनएच-231 का अधूरा निर्माण: क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाने वाले इन दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा या बेहद धीमी गति से चल रहा है। सांसद ने इसके कारण आम जनता और माल ढुलाई में हो रही भारी परेशानियों का हवाला देते हुए इसे जल्द से जल्द पूर्ण करने की मांग की।

राजमहल-बहादुरगंज 6-लेन एक्सप्रेसवे: कोसी-सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखने वाले राजमहल से बहादुरगंज तक के 6-लेन एक्सप्रेसवे के निर्माण को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की पुरजोर मांग की गई।

रणनीतिक स्थानों पर आरओबी (ROB) की मांग: कई जगहों पर रेलवे क्रॉसिंग के कारण लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की आशंका को समाप्त करने के लिए प्रमुख मार्गों पर रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले पुल और सड़कें: हर साल आने वाली बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों के स्थायी समाधान के लिए मौसम-रोधी (All-weather) और उच्च तकनीकी मानकों वाली सड़कों के निर्माण की आवश्यकता जताई गई।

कोसी-सीमांचल: बुनियादी ढांचे की अनदेखी और विकास की दरकार

बिहार का कोसी और सीमांचल इलाका प्राकृतिक रूप से संवेदनशील होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से देश के पिछड़े क्षेत्रों में गिना जाता है। दशकों से इस क्षेत्र के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी और परिवहन सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ा है।

परिवहन की कमी और आर्थिक पिछड़ापन: अच्छी सड़कों के अभाव में यहां के किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को अपनी उपज और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बेहतर सड़कों के न होने से बड़े उद्योग भी इस क्षेत्र में निवेश करने से कतराते हैं।

बाढ़ की चुनौती: कोसी और सीमांचल में हर साल आने वाली बाढ़ बुनियादी ढांचे को तबाह कर देती है। सांसद पप्पू यादव ने केंद्रीय मंत्री का ध्यान इस महत्वपूर्ण तथ्य की ओर आकर्षित किया कि इस क्षेत्र के लिए सामान्य सड़कों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ऐसी सड़कों और पुलों की आवश्यकता है जो बाढ़ के दबाव को झेल सकें।

राजमहल-बहादुरगंज 6-लेन एक्सप्रेसवे: गेम चेंजर परियोजना

इस मुलाकात के दौरान सबसे महत्वपूर्ण चर्चा राजमहल-बहादुरगंज 6-लेन एक्सप्रेसवे को लेकर रही। सांसद पप्पू यादव ने इस प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया:

"यह एक्सप्रेसवे केवल कंक्रीट और डामर की सड़क नहीं है, बल्कि यह कोसी-सीमांचल के आर्थिक कायापलट का मार्ग है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।"

क्षेत्रीय संपर्क में सुधार: इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से झारखंड, बंगाल और बिहार के सीमावर्ती इलाकों के बीच की दूरियां कम होंगी और आवागमन बेहद तेज हो जाएगा।

व्यापारिक गतिशीलता: पूर्वोत्तर भारत (North-East India) के साथ व्यापारिक गलियारे (Trade Corridor) को मजबूत करने में यह एक्सप्रेसवे मील का पत्थर साबित होगा। सांसद ने आग्रह किया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को गति दी जाए ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।

एनएच-107 और एनएच-231 की वर्तमान स्थिति और जनता की उम्मीदें

एनएच-107 और एनएच-231 को लेकर क्षेत्र के लोगों में भारी निराशा है। लंबे समय से निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण इन सड़कों पर उड़ती धूल, बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश के दिनों में जलभराव आम बात हो गई है।

जनता की पीड़ा: पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा और सहरसा जैसे पड़ोसी जिलों को जोड़ने वाले इन मार्गों पर यात्रा करना किसी जोखिम से कम नहीं है। एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी इन रास्तों पर भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

सांसद का हस्तक्षेप: सांसद पप्पू यादव ने केंद्रीय मंत्री को जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए संबंधित निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों को सख्त निर्देश देने का आग्रह किया ताकि निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके और तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा हो सके।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का रुख और सकारात्मक आश्वासन

सांसद पप्पू यादव के साथ हुई इस बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पूरे मामले को बेहद गंभीरता से सुना।

सकारात्मक प्रतिक्रिया: सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने कोसी-सीमांचल क्षेत्र की भौगोलिक और विकासात्मक आवश्यकताओं को समझा और आश्वासन दिया कि लंबित परियोजनाओं की अड़चनों को दूर किया जाएगा।

समीक्षा के निर्देश: मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इन राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे प्रस्तावों की फाइलें निकालकर तत्काल समीक्षा करने तथा आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

पप्पू यादव की यह दिल्ली यात्रा कोसी-सीमांचल के विकास के मोर्चे पर एक अहम कदम मानी जा रही है। जिस प्रकार उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्रीय जनहित के मुद्दों को केंद्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया है, उससे स्थानीय जनता में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। यदि राजमहल-बहादुरगंज 6-लेन एक्सप्रेसवे, एनएच-107/231 के अधूरे कार्य और आरओबी निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरे होते हैं, तो यह कोसी-सीमांचल के इतिहास में बुनियादी ढांचे के विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय साबित होगा। अब देखना यह है कि इस उच्चस्तरीय मुलाकात के बाद प्रशासनिक अमला कितनी तेजी से इन घोषणाओं और मांगों को जमीन पर उतारता है।