तौलिया लपेटकर ड्यूटी करते दिखे दारोगा, एसपी ने शुरू की विभागीय कार्रवाई
पटना, 16 जुलाई: बिहार के पटना जिले के अथमलगोला थाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक दारोगा थाना परिसर में तौलिया लपेटकर सरकारी ड्यूटी करते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यशैली और अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद पटना के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने घटना का संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही संबंधित दारोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
वायरल वीडियो में कथित तौर पर दारोगा को केवल तौलिया लपेटे हुए थाना परिसर में घूमते और सरकारी कार्य करते देखा जा सकता है। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
कई लोगों ने सवाल उठाया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिस अधिकारी का इस तरह ड्यूटी करना कितना उचित है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।
एसपी ने लिया तत्काल संज्ञान
वीडियो वायरल होने के बाद पटना के एसपी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए ताकि वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि सेवा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
किन बिंदुओं पर होगी जांच?
पुलिस विभाग की जांच में निम्नलिखित पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा—
वायरल वीडियो की सत्यता।
वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया।
उस समय दारोगा आधिकारिक ड्यूटी पर थे या नहीं।
क्या विभागीय आचार संहिता का उल्लंघन हुआ।
घटना के समय थाना में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका।
जांच टीम संबंधित पुलिसकर्मियों से पूछताछ करेगी और आवश्यक साक्ष्य एकत्र कर अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपेगी।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने इसे पुलिस अनुशासन पर सवाल खड़ा करने वाली घटना बताया, जबकि कुछ लोगों ने जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की सलाह दी।
लोगों का कहना है कि पुलिस जैसे संवेदनशील विभाग में कार्यरत कर्मचारियों से उच्च स्तर के अनुशासन और पेशेवर व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
पुलिस विभाग ने अनुशासन पर दिया जोर
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह ड्यूटी के दौरान निर्धारित वर्दी, शिष्टाचार और सेवा नियमों का पालन करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी विभागीय नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
पेशेवर आचरण का महत्व
पुलिस अधिकारी कानून के प्रतिनिधि होते हैं और उनका व्यवहार जनता के बीच विभाग की छवि को प्रभावित करता है। इसलिए ड्यूटी के दौरान अनुशासन, निर्धारित वर्दी और पेशेवर आचरण बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए इनकी निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
पुलिस प्रशासन ने कहा है कि विभागीय जांच का उद्देश्य पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित अधिकारी ने सेवा नियमों का उल्लंघन किया या नहीं और क्या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।
प्रशासन की सख्ती
घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने जिले के सभी थानों को सेवा नियमों और अनुशासन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस विभाग का कहना है कि जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
आगे की कार्रवाई
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित दारोगा के खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई का स्वरूप जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाएगा।
अथमलगोला थाना का वायरल वीडियो बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है। तौलिया लपेटकर ड्यूटी करते दिखाई देने वाले दारोगा के मामले में पटना एसपी ने जांच के आदेश देकर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पुलिस प्रशासन का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।