सड़क किनारे पड़ी मिट्टी और निर्माण सामग्री बन रही हादसों की वजह, धमदाहा क्षेत्र में बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा
धमदाहा (पूर्णिया): सड़कें विकास और सुगम यातायात की धुरी मानी जाती हैं, लेकिन जब यही मार्ग लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार हो जाएं, तो ये जीवनदायिनी के बजाय मौत का फंदा बन जाती हैं। कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा प्रखंड से गुजरने वाली महत्वपूर्ण राज्य राजमार्ग संख्या 65 (एसएच-65), जिसे पूर्णिया-टीकापट्टी मार्ग के नाम से जाना जाता है, पर देखने को मिल रहा है। इस सड़क के दोनों किनारों पर विभिन्न निर्माण कार्यों और रख-रखाव के नाम पर अवैध रूप से और अनियोजित तरीके से मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर और निर्माण सामग्रियां फेंक दी गई हैं। इसके चलते यह व्यस्त मार्ग आए दिन भीषण सड़क हादसों का कारण बन रहा है।
स्थानीय प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसियों की इस गंभीर लापरवाही के कारण रोजाना राहगीर, बाइक चालक और भारी वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहे हैं या गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों और राहगीरों में इसको लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है, लेकिन जिम्मेदार महकमा अभी भी गहरी नींद में सोया हुआ है।
एसएच-65 पर पसरा मौत का जोखिम: जमीनी हकीकत
पूर्णिया को टीकापट्टी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से जोड़ने वाली एसएच-65 इस क्षेत्र की लाइफलाइन है। इस सड़क पर प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों, स्कूली बसों, एम्बुलेंस और आम नागरिकों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन सड़क के किनारों पर पड़ी मिट्टी ने इस पूरे सफर को बेहद खतरनाक बना दिया है।
सड़क की चौड़ाई में भारी कमी: नियमों के अनुसार सड़क के दोनों तरफ पर्याप्त शोल्डर (किनारे का खाली स्थान) होना चाहिए, ताकि आपात स्थिति में वाहन साइड ले सकें। लेकिन मिट्टी के ढेर जमा होने से सड़क की प्रभावी चौड़ाई काफी कम हो गई है।
धूल का गुबार और विजिबिलिटी (Visibility) की समस्या: वाहनों के गुजरने से मिट्टी उड़कर हवा में फैल जाती है, जिससे चालकों को सामने का कुछ नहीं दिखाई देता। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति आंखों में धूल झोंकने जैसी और दुर्घटना को सीधे बुलावा देने वाली बन जाती है।
कीचड़ और फिसलन का खतरा: मामूली बारिश या ओस गिरने के बाद यही मिट्टी कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिस पर से गुजरते ही बाइक और साइकिल के पहिए फिसल जाते हैं। कई लोग चलती गाड़ी से गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो चुके हैं।
रात के अंधेरे में अदृश्य बाधाएं: रात के वक्त इस मार्ग पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट या रेडियम संकेतक (Reflectors) न होने के कारण मिट्टी के ये ढेर चालकों को दूर से दिखाई नहीं देते, जिससे तेज रफ्तार वाहन सीधे इनसे टकराकर अनियंत्रित हो जाते हैं।
हादसों का बढ़ता ग्राफ और स्थानीय लोगों की पीड़ा
पिछले कुछ हफ्तों में एसएच-65 के किनारे रखी गई इस मिट्टी के कारण कई दर्दनाक हादसे दर्ज किए जा चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी शायद उसकी नींद खुलेगी।
"सड़क किनारे इस तरह मिट्टी और गिट्टी फेंक देना सरासर आपराधिक लापरवाही है। हमारे युवा और बुजुर्ग रोजाना इस रास्ते पर जान जोखिम में डालकर चल रहे हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद ठेकेदार और प्रशासन कान में तेल डाले बैठे हैं।" — स्थानीय ग्रामीण
दोपहिया चालकों के लिए काल: सबसे बुरा हाल मोटरसाइकिल और स्कूटी चालकों का है। ओवरटेकिंग के दौरान जैसे ही गाड़ी का पहिया सड़क किनारे की मिट्टी पर उतरता है, नियंत्रण बिगड़ जाता है और वाहन सड़क पर गिर जाता है, जिससे पीछे से आ रहे भारी वाहनों की चपेट में आने का खतरा बना रहता है।
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों की परेशानी: सड़क किनारे उड़ती धूल और मिट्टी के कारण आसपास के दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है और लोगों के घरों में सांस संबंधी बीमारियां फैलने लगी हैं।
प्रशासन और संवेदकों (Contractors) की उदासीनता
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सड़क निर्माण और रखरखाव का ठेका लेने वाली एजेंसियों और संबंधित विभागों की भूमिका पर उठता है। जब सड़क किनारे मिट्टी या अन्य सामग्री लाई जाती है, तो उसे तुरंत समतल करना या सुरक्षित स्थान पर हटाना संवेदक की जिम्मेदारी होती है।
जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना: ठेकेदारों द्वारा काम पूरा होने या अधूरा छोड़ने के बाद भी मलबे और मिट्टी को हटाया नहीं जाता है, जिससे यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है।
पर्यवेक्षण (Supervision) का अभाव: स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस मार्ग की नियमित मॉनिटरिंग न किए जाने के कारण संवेदकों के हौसले बुलंद हैं और वे जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर मनमानी कर रहे हैं।
त्वरित कार्रवाई और सुरक्षात्मक उपाय की मांग
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लिया जाए।
मिट्टी का तत्काल उठाव: एसएच-65 के किनारों पर रखे गए मिट्टी के सभी ढेरों को युद्धस्तर पर हटाया जाए ताकि सड़क पूरी तरह साफ और चौड़ी हो सके।
चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग: जब तक मिट्टी पूरी तरह हटाई नहीं जाती, तब तक खतरनाक स्थानों पर चेतावनी संकेत (Warning Signs) और रिफ्लेक्टर लगाए जाएं।
लापरवाहों पर कार्रवाई: जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले संबंधित ठेकेदारों और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
पूर्णिया-टीकापट्टी एसएच-65 के किनारे रखी गई मिट्टी केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राहगीरों के जीवन के साथ खुला खिलवाड़ है। धमदाहा क्षेत्र में सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोलती यह तस्वीर प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। यदि समय रहते इन मिट्टी के ढेरों को नहीं हटाया गया, तो यह सड़क विकास का मार्ग न रहकर क्षेत्र के लिए 'मृत्यु मार्ग' साबित होगी। अब यह देखना बेहद जरूरी होगा कि इस खबर के बाद प्रशासन कितनी तत्परता दिखाता है और आम जनता को इस जानलेवा समस्या से कब राहत मिलती है।