जमीन निबंधन शुल्क में भारी बढ़ोतरी से शाहपुर में बढ़ी नाराजगी, कारोबारियों ने जताई चिंता; खरीद-बिक्री और राजस्व पर असर की आशंका
आरा/शाहपुर। बिहार सरकार द्वारा जमीन के निबंधन (रजिस्ट्री) शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी का असर अब भोजपुर जिले के शाहपुर और आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। नई शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन कारोबार से जुड़े लोगों, दस्तावेज़ लेखकों, प्रॉपर्टी एजेंटों और संभावित खरीदारों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बढ़े हुए निबंधन शुल्क के कारण जमीन खरीदना पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है, जिससे खरीद-बिक्री की रफ्तार प्रभावित होने लगी है। उनका यह भी मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो इसका असर न केवल रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ेगा, बल्कि सरकार के राजस्व संग्रह पर भी देखने को मिल सकता है।
बढ़ी रजिस्ट्री फीस से बढ़ा आर्थिक बोझ
शाहपुर के जमीन कारोबारियों का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन खरीदने वालों को पहले से अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। पहले जहां खरीदार जमीन की कीमत और सामान्य रजिस्ट्री खर्च को ध्यान में रखकर सौदा तय करते थे, वहीं अब निबंधन शुल्क बढ़ जाने से कुल लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो गई है।
कारोबारियों का कहना है कि इसका सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के लोगों पर पड़ेगा, जो वर्षों की बचत के बाद अपने घर या खेती के लिए जमीन खरीदने का सपना देखते हैं।
खरीदारों में बढ़ी हिचकिचाहट
नई दरों के लागू होने के बाद संभावित खरीदारों में हिचकिचाहट देखी जा रही है। कई लोग फिलहाल जमीन खरीदने का फैसला टाल रहे हैं या कम कीमत वाले विकल्प तलाश रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब किसी संपत्ति की कुल लागत अचानक बढ़ जाती है, तो स्वाभाविक रूप से लोग खरीदारी को लेकर अधिक सतर्क हो जाते हैं। इसका सीधा असर बाजार की गतिविधियों पर पड़ रहा है।
खरीद-बिक्री के सौदों में आ सकती है कमी
प्रॉपर्टी कारोबारियों का कहना है कि यदि निबंधन शुल्क में बढ़ोतरी लंबे समय तक जारी रही, तो जमीन की खरीद-बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट आ सकती है।
उनका कहना है कि पहले जहां प्रतिदिन कई रजिस्ट्रियां होती थीं, वहीं अब लोगों की संख्या कम हो सकती है। यदि लेन-देन घटता है, तो इससे पूरे रियल एस्टेट सेक्टर पर असर पड़ेगा।
सरकार के राजस्व पर भी पड़ सकता है प्रभाव
हालांकि सरकार ने निबंधन शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य राजस्व संग्रह बढ़ाना बताया है, लेकिन कारोबारियों का मानना है कि यदि जमीन की खरीद-बिक्री कम हो जाएगी, तो कुल रजिस्ट्रियों की संख्या भी घटेगी।
ऐसी स्थिति में सरकार को अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो सकेगा। कारोबारियों का कहना है कि कम शुल्क और अधिक रजिस्ट्रियों का मॉडल सरकार के लिए अधिक लाभकारी हो सकता है।
दस्तावेज़ लेखक और एजेंट भी चिंतित
शाहपुर के दस्तावेज़ लेखक और प्रॉपर्टी एजेंटों ने भी नई व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की है।
उनका कहना है कि यदि रजिस्ट्री कम होगी तो उनके रोजगार और आय पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। इस क्षेत्र से जुड़े हजारों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जमीन के कारोबार पर निर्भर हैं।
उन्होंने सरकार से शुल्क वृद्धि की समीक्षा करने और व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।
आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले से ही जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में रजिस्ट्री शुल्क में वृद्धि से संपत्ति खरीदना और अधिक कठिन हो गया है।
कई लोगों का मानना है कि अब उन्हें जमीन खरीदने के लिए अतिरिक्त धन की व्यवस्था करनी होगी या अपनी योजना कुछ समय के लिए टालनी पड़ेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखने लगा असर
शाहपुर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी नई शुल्क व्यवस्था का असर दिखाई देने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती योग्य भूमि की खरीद-बिक्री भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों का मानना है कि यदि रजिस्ट्री का खर्च अधिक रहेगा तो छोटे और सीमांत किसान भूमि खरीदने में कठिनाई महसूस करेंगे।
विशेषज्ञों की राय
रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि किसी भी प्रकार की शुल्क वृद्धि का प्रारंभिक प्रभाव बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शुल्क दरें अधिक रहती हैं तो शुरुआती महीनों में खरीद-बिक्री धीमी हो सकती है। हालांकि समय के साथ बाजार नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढाल सकता है, लेकिन इसके लिए सरकार को बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी।
संतुलित नीति की जरूरत
कारोबारियों का कहना है कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिससे राजस्व भी बढ़े और आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी न पड़े।
उनका सुझाव है कि यदि शुल्क दरें संतुलित रहेंगी तो अधिक लोग संपत्ति की कानूनी रजिस्ट्री कराएंगे, जिससे सरकार को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
शाहपुर और आसपास के क्षेत्रों के कारोबारियों ने सरकार से निबंधन शुल्क में की गई बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि सरकार इस निर्णय की समीक्षा करती है तो जमीन बाजार में फिर से तेजी आ सकती है और आम लोगों को भी राहत मिलेगी।
कारोबारियों ने यह भी कहा कि सरकार को निर्णय लेते समय आम नागरिकों, किसानों और छोटे निवेशकों की आर्थिक क्षमता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पारदर्शिता और जागरूकता पर जोर
स्थानीय लोगों का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी सभी नागरिकों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
यदि लोगों को रजिस्ट्री शुल्क की गणना, नियमों और प्रक्रिया की सही जानकारी होगी तो भ्रम की स्थिति कम होगी और वे बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
बिहार सरकार द्वारा जमीन के निबंधन शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी ने शाहपुर और आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट कारोबार को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कारोबारियों का कहना है कि नई दरों से जमीन खरीदना महंगा हो गया है, जिससे खरीद-बिक्री प्रभावित हो सकती है और सरकार के राजस्व पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। दस्तावेज़ लेखक, प्रॉपर्टी एजेंट और संभावित खरीदार भी बढ़ी हुई लागत को लेकर चिंता जता रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार कारोबारियों और आम लोगों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है और क्या भविष्य में इस शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।