हिरासत से सनोज के रहस्यमयी गायब होने का मामला: दो एएसआई समेत 6 गिरफ्तार, पटना हाईकोर्ट की कड़ी निगरानी
पटना/बिहार: राज्य की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब उत्पाद थाने (Excise Police Station) की कस्टडी से सनोज नामक एक व्यक्ति के अचानक लापता होने का मामला सामने आया। इस मामले ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है, बल्कि पटना हाईकोर्ट ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसकी निगरानी अपने हाथों में ले ली है। इस प्रकरण में लापरवाही और मिलीभगत के आरोप में दो एएसआई (ASI), तीन होमगार्ड और एक निजी चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
घटनाक्रम: कैसे हुआ सनोज गायब?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सनोज को उत्पाद विभाग की टीम ने कुछ समय पूर्व हिरासत में लिया था। उसे पूछताछ और आवश्यक प्रक्रिया के लिए उत्पाद थाने लाया गया था। हालांकि, अगले ही दिन यह सूचना मिली कि सनोज हिरासत से गायब है। पुलिस प्रशासन ने शुरुआत में इसे एक सामान्य 'फरारी' का मामला बताने की कोशिश की, लेकिन हिरासत से किसी व्यक्ति का सुरक्षित बाहर निकल जाना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता की ओर इशारा कर रहा था।
जैसे ही यह खबर फैली, स्थानीय जनता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए। सवाल यह उठा कि पुलिस की कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी वाले थाने से कोई व्यक्ति बिना किसी की जानकारी के कैसे बाहर जा सकता है?
न्यायिक हस्तक्षेप: पटना हाईकोर्ट की सीधी मॉनिटरिंग
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने इस मामले को लेकर पुलिस प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और स्पष्ट किया है कि हिरासत में ली गई व्यक्ति की सुरक्षा पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट की सक्रियता के कारण राज्य पुलिस मुख्यालय भी दबाव में है और मामले की उच्च-स्तरीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दोषी पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे किसी भी पद पर हों।
पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की घोर लापरवाही और संभवतः मिलीभगत के बिना यह घटना संभव नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निम्नलिखित लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है:
दो एएसआई (ASI): जो उस रात थाने की कमान संभाले हुए थे।
तीन होमगार्ड जवान: जिनकी जिम्मेदारी थाने के गेट और कस्टडी की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
एक निजी चालक: जिसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
गिरफ्तार किए गए इन लोगों पर ड्यूटी में लापरवाही, साक्ष्य छिपाने और अवैध रूप से आरोपी को भगाने में मदद करने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर सवाल
इस मामले ने पुलिस थानों में सुरक्षा की स्थिति पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
सीसीटीवी की भूमिका: क्या उस रात थाने के सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे? यदि हाँ, तो फुटेज में क्या दिखा? यह एक बड़ी पहेली है जिसे एसआईटी (SIT) सुलझाने का प्रयास कर रही है।
ड्यूटी रोस्टर: क्या ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी जगह पर थे या वे कहीं और व्यस्त थे?
मानवाधिकार और पुलिस कोड: पुलिस कस्टडी में व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना कानूनी अनिवार्यता है। इस तरह की घटना न केवल पुलिस की छवि को धूमिल करती है, बल्कि न्याय व्यवस्था में आम आदमी के भरोसे को भी तोड़ती है।
स्थानीय आक्रोश और मानवाधिकार का मुद्दा
मामले के प्रकाश में आने के बाद से ही स्थानीय नागरिक संगठनों ने इसे 'संस्थागत अपराध' करार दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर कस्टडी ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक पुलिस पर भरोसा कैसे करें? पीड़ित परिवार ने भी सनोज की सुरक्षा को लेकर आशंका व्यक्त की है और उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच की दिशा और आगामी कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित विशेष टीम अब इन बिंदुओं पर जांच कर रही है:
फोन कॉल रिकॉर्ड (CDR): ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने बाहर से किन लोगों से संपर्क किया था।
आरोपी की लोकेशन: सनोज की तलाश के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं और आसपास के जिलों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
विभागीय जांच: गिरफ्तार पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
हिरासत से आरोपी का गायब होना महज एक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की एक बड़ी विफलता है। पटना हाईकोर्ट की मॉनिटरिंग के बाद अब यह स्पष्ट है कि इस मामले की जांच किसी भी स्तर पर प्रभावित नहीं होगी। यह घटना अन्य पुलिस थानों के लिए भी एक सबक है कि कस्टडी की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो।