ताड़र नहर पर बने पुल की सुरक्षा दीवार ढहने से बढ़ा खतरा, राहगीरों की जान जोखिम में
सन्हौला (भागलपुर): सन्हौला प्रखंड के ताड़र नहर पर स्थित पुल की जर्जर हालत और सुरक्षा व्यवस्था ने फिर एक बार स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ समय पूर्व एक अनियंत्रित वाहन की टक्कर से पुल की सुरक्षा दीवार (रेलिंग) टूटकर नहर में गिर गई थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। टूटी हुई यह दीवार अब दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रही है, जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों राहगीर और वाहन चालक हर पल जोखिम उठाने को मजबूर हैं।
कैसे हुआ हादसा?
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कुछ महीने पहले रात के अंधेरे में एक अनियंत्रित वाहन ने पुल की सुरक्षा दीवार में जोरदार टक्कर मार दी थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पुल के एक तरफ का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर नहर में जा गिरा। गनीमत यह रही कि उस समय कोई भी राहगीर वहां से नहीं गुजर रहा था, अन्यथा बड़ी जनहानि हो सकती थी। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया, लेकिन पीछे छूट गई टूटी हुई दीवार आज भी एक बड़े खतरे के रूप में खड़ी है।
खतरे के मुहाने पर खड़ा पुल
ताड़र नहर का यह पुल आवागमन का मुख्य मार्ग है, जिससे प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन होता है। सन्हौला से मुख्य सड़कों को जोड़ने वाली यह कड़ी बहुत ही महत्वपूर्ण है। सुरक्षा दीवार न होने के कारण विशेषकर रात के समय वाहन चालकों के लिए पुल का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। हल्की सी चूक या अंधेरे में वाहन अनियंत्रित होने पर सीधे नहर में गिरने का खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क के इस संकरे हिस्से पर सुरक्षा घेरा न होना मौत को दावत देने जैसा है।
प्रशासन की चुप्पी पर आक्रोश
ग्रामीणों ने बताया कि घटना की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रखंड कार्यालय को कई बार दी गई है। लिखित शिकायत के बावजूद आज तक किसी ने सुध नहीं ली। ग्रामीणों का कहना है कि, "प्रशासन शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। जब तक कोई व्यक्ति नहर में नहीं गिरता, तब तक क्या मरम्मत कार्य शुरू नहीं होगा?" स्थानीय दुकानदारों और स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों में भी इस टूटी दीवार को लेकर भारी दहशत का माहौल रहता है।
बरसात और धुंध में बढ़ जाता है जोखिम
मौजूदा मौसम की बात करें या आने वाले बरसात के दिनों की, नहर का जलस्तर बढ़ने और सड़क पर कीचड़ होने की स्थिति में वाहन चालकों का नियंत्रण खोना आम बात है। सुरक्षा दीवार न होने के कारण यह पुल अब एक 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) बन चुका है। लोगों की मांग है कि अविलंब पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की जाए और इसे लोहे या कंक्रीट की मजबूत रेलिंग से सुरक्षित किया जाए।
आगे की कार्रवाई
इस मामले पर जब स्थानीय अधिकारियों से बात करने का प्रयास किया गया, तो आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। विभाग की ओर से तकनीकी जांच और बजट के अभाव का हवाला दिया जाता रहा है। हालांकि, जनता का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस पुल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
सन्हौला के इस पुल की मरम्मत की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। एक टूटी हुई दीवार को न बनवा पाना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द ही जागृत होगा और इस मार्ग को सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।