सहरसा में सरकारी खरीद में बड़े घोटाले की आहट: GeM पोर्टल से हुई खरीदारी की जांच तेज, 'तिरंगा लाइट' खरीद पर सवाल
सहरसा (बिहार): सहरसा नगर निगम और जिले की विभिन्न नगर पंचायतों में विकास कार्यों और सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी धन की लूट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदारी में भारी अनियमितताओं की शिकायतों के बाद अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष रूप से, शहर की सड़कों पर लगाई गई 'तिरंगा लाइट' (Tiranga Light) की खरीद में हुए कथित बड़े पैमाने के भ्रष्टाचार की जांच के लिए गठित उड़नदस्ता टीम सक्रिय हो गई है।
क्या है मामला?
पिछले कुछ महीनों में सहरसा नगर निगम और नगर पंचायतों द्वारा किए गए कार्यों के अंकेक्षण (Audit) के दौरान खरीद प्रक्रिया में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले थे। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि GeM पोर्टल पर वस्तुओं के नाम पर कागजी खानापूर्ति कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है। इन आरोपों में सबसे प्रमुख मुद्दा शहर में लगाए गए 'तिरंगा लाइट' के पोल और उसकी लाइटों की खरीद का है।
आरोप है कि बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दर पर इन लाइटों की खरीद की गई और गुणवत्ता के मानकों को ताक पर रख दिया गया। अब यही लाइटें खराब होकर बंद पड़ी हैं, जिससे न केवल जनता के पैसे की बर्बादी हुई है, बल्कि शहर की सुंदरता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
उड़नदस्ता टीम की सक्रियता और जांच का दायरा
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा एक उड़नदस्ता टीम का गठन किया गया है। यह टीम न केवल दस्तावेजों की जांच कर रही है, बल्कि मौके पर जाकर उन सामग्रियों का सत्यापन भी कर रही है जिनकी खरीद दिखाई गई है।
जांच टीम के प्रमुख बिंदु:
अभिलेखों का मिलान: टीम उन सभी वाउचरों और इनवॉइस की गहन जांच कर रही है जो GeM पोर्टल पर अपलोड किए गए हैं।
बाजार भाव बनाम खरीद दर: यह पता लगाया जा रहा है कि जिन सामग्रियों की खरीद के लिए भुगतान किया गया, क्या उसका बाजार मूल्य वही था, या फिर बिलों में हेराफेरी की गई।
गुणवत्ता का परीक्षण: 'तिरंगा लाइट' के लिए उपयोग किए गए पोल, वायरिंग और लाइटों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी पैसे का सदुपयोग हुआ है या नहीं।
आपूर्ति कर्ता की भूमिका: यह भी जांच की जा रही है कि क्या संबंधित वेंडर्स (विक्रेताओं) ने मानक नियमों का पालन किया है या फिर सांठगांठ के जरिए टेंडर हासिल किया गया था।
'तिरंगा लाइट' खरीद: एक बड़ा घोटाला?
स्थानीय सूत्रों और कुछ जागरूक पार्षदों का आरोप है कि तिरंगा लाइट खरीद में करोड़ों रुपये का गोलमाल हुआ है। जानकारों का कहना है कि जो लाइटें लाखों रुपये में खरीदी गई दिखाई गई हैं, उनकी वास्तविक कीमत बहुत कम है। साथ ही, इनके इंस्टॉलेशन (स्थापना) के नाम पर भी मोटी रकम का बंदरबांट किया गया है।
अजीब बात यह है कि अधिकांश लाइटें लगाने के कुछ ही समय बाद खराब हो गई हैं, जिसे लेकर शहर में काफी आक्रोश है। जब जांच टीम ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा, तो वे कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए, जिससे उनकी मिलीभगत होने का संदेह और गहरा गया है।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल
इस मामले के उजागर होने के बाद सहरसा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। कई नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जांच टीम के रडार पर हैं। राजनीतिक स्तर पर भी विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि यह केवल एक विभाग का घोटाला नहीं है, बल्कि यह एक संगठित भ्रष्टाचार है जिसमें बड़े अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी या निलंबन की आधिकारिक सूचना नहीं है, जिससे आम जनता में यह डर व्याप्त है कि कहीं जांच को भी लीपा-पोती करके दबा न दिया जाए।
जनता की प्रतिक्रिया और मांग
नगर निगम की इस कार्यप्रणाली से आम लोग खासे नाराज हैं। सहरसा की जनता का कहना है कि एक तरफ शहर में जलजमाव, खराब सड़कें और सफाई जैसी बुनियादी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, दूसरी तरफ इन गैर-जरूरी सौंदर्यीकरण कार्यों में जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बर्बाद किया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है:
“अगर इन लाइटों की खरीद में धांधली हुई है, तो उन अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने भुगतान सुनिश्चित किया। हमें रोशनी नहीं, बुनियादी सुविधाएं चाहिए और जो पैसा इन लाइटों के नाम पर बहाया गया है, उसे वसूल किया जाना चाहिए।”
फिलहाल, सहरसा नगर निगम और अन्य नगर पंचायतों में चल रही यह जांच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। यदि उड़नदस्ता टीम निष्पक्षता से जांच पूरी करती है और दोषियों को सामने लाती है, तो यह सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। अन्यथा, यह मामला भी पुरानी फाइलों की धूल में कहीं खो जाएगा।