सहरसा में 'मौत की सड़क': हादसों के बढ़ते ग्राफ से सहमा जनमानस, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सहरसा, संवाददाता।
सहरसा: कोसी के प्रवेश द्वार सहरसा में सड़क हादसे अब रोजमर्रा की घटना बन चुके हैं। बीते कुछ महीनों में जिस तरह से सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है, उसने जिले के हर निवासी के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर ग्रामीण इलाकों की लिंक सड़कों तक, हर मोड़ पर 'मौत' जैसे ताक में बैठी है। तेज रफ्तार, यातायात नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का मिला-जुला परिणाम है कि सहरसा की सड़कें अब 'खूनी सड़कों' में तब्दील होती जा रही हैं।
'गोल्डन ऑवर' और हादसों का समय
आंकड़ों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो सड़क हादसे सबसे अधिक सुबह और शाम के समय होते हैं। यह वह समय है जब लोग अपने गंतव्य तक पहुँचने की जल्दी में होते हैं। एक ओर जहां ऑफिस जाने वालों और स्कूली बच्चों की भीड़ होती है, वहीं दूसरी ओर भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही सड़क पर अराजकता पैदा कर देती है। हड़बड़ी में ड्राइविंग और ओवरटेक करने की होड़ ने न जाने कितने परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं।
हादसों के पीछे के असली 'खलनायक'
सहरसा में दुर्घटनाओं के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि ये हादसे अचानक नहीं होते, बल्कि इन्हें निमंत्रण दिया जाता है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं:
अवैध कट्स (Illegal Cuts): हाईवे और मुख्य सड़कों पर जगह-जगह लोगों ने अपनी सुविधा के लिए डिवाइडर को काटकर अवैध रास्ता बना लिया है। ये कट्स बिना किसी संकेत के अचानक आते हैं, जिससे अचानक ब्रेक लगाने के कारण पीछे से आने वाले वाहन टकरा जाते हैं।
गलत ड्राइविंग (Wrong Side Driving): सहरसा की सड़कों पर 'रॉन्ग साइड' ड्राइविंग एक फैशन बन गया है। खासकर दुपहिया वाहन चालक समय बचाने के चक्कर में मुख्य धारा के ट्रैफिक के सामने से गाड़ी चलाते हैं, जो भीषण टक्कर का मुख्य कारण बनता है।
चेतावनी बोर्डों की अनदेखी: सड़क निर्माण के समय लगाए गए चेतावनी बोर्ड या तो धूल से ढके हैं, या फिर अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। कई स्थानों पर 'यू-टर्न' या 'स्पीड लिमिट' के बोर्ड नदारद हैं, जिससे अनजान चालक भ्रमित होकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
सड़कों पर अतिक्रमण: शहर के प्रमुख चौराहों और सड़कों के किनारे दुकानदारों ने आधा रास्ता घेर रखा है, जिससे सड़क की चौड़ाई सिमट गई है और राहगीरों के लिए जगह नहीं बची है।
जन-आक्रोश और प्रशासनिक विफलता
सहरसा के आम नागरिकों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि "सड़कें सिर्फ चलने के लिए नहीं, सुरक्षित पहुँचने के लिए भी होनी चाहिए।" स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पुलिस का काम केवल जुर्माना वसूलना रह गया है, जबकि यातायात प्रबंधन (Traffic Management) और जन-जागरूकता पर कोई ध्यान नहीं है।
अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में आने वाले घायलों की संख्या यह बताने के लिए काफी है कि स्थिति कितनी विस्फोटक हो चुकी है। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए सड़कों पर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।
प्रशासन के समक्ष चुनौतियां और समाधान
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन को तुरंत 'एक्शन मोड' में आने की आवश्यकता है:
ब्लैक स्पॉट की पहचान: उन सभी स्थानों को चिन्हित कर वहां फेंसिंग की जानी चाहिए जहां बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं।
सख्ती और चालान: रॉन्ग साइड ड्राइविंग करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
अतिक्रमण हटाओ अभियान: सड़कों के किनारे से अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रशासन को समय-समय पर बड़े स्तर पर अभियान चलाना होगा।
यातायात सुरक्षा सप्ताह: स्कूली स्तर से लेकर सार्वजनिक मंचों तक यातायात नियमों के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की जरूरत है।
क्या कहता है यातायात विशेषज्ञ?
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, सहरसा में बढ़ती गाड़ियों की संख्या के अनुपात में सड़क की क्षमता नहीं बढ़ रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि शहर के मुख्य चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे और आधुनिक सिग्नल सिस्टम की तत्काल स्थापना होनी चाहिए ताकि किसी भी दुर्घटना के बाद दोषियों को चिन्हित किया जा सके और निवारक कार्रवाई की जा सके।
सहरसा की सड़कें अब और अधिक खून बहाने की स्थिति में नहीं हैं। हर दुर्घटना के पीछे एक कहानी है, एक परिवार का बिखरता सपना है। प्रशासन और जनता—दोनों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जहाँ प्रशासन को सड़क की भौतिक स्थिति सुधारने और नियमों को लागू करने की आवश्यकता है, वहीं आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि 'जल्दी' से ज्यादा कीमती 'जिंदगी' है।
क्या सहरसा का प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के इंतजार में है, या समय रहते इन 'अवैध कट्स' और 'गलत ड्राइविंग' पर नकेल कसकर लोगों की जान बचाई जाएगी? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आज हर सहरसावासी जानना चाहता है।