सड़क या मौत का गड्ढा? अललपट्टी-रघेपुरा मुख्य मार्ग की दुर्दशा से बेहाल आम जनजीवन, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
विकास की तमाम दावों के बीच दरभंगा के पंडासराय और लहेरियासराय के उपनगरों से गुजरने वाली मुख्य सड़कों की वास्तविकता कुछ और ही कहानी बयां करती है। अललपट्टी गुमती से रघेपुरा जाने वाली मुख्य सड़क आज अपनी बदहाली के चरम पर है। बरसों से मरम्मत के अभाव में यह सड़क अब आवागमन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो चुकी है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे और बारिश का जलजमाव इसे एक जानलेवा मार्ग में तब्दील कर चुका है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना दूभर हो गया है।
विकास की राह में गड्ढों का जाल
यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जीवनरेखा है। इसी रास्ते से होकर लोग मुख्य बाजार, अस्पताल और शिक्षण संस्थानों तक पहुँचते हैं। लेकिन पिछले कई वर्षों से इस सड़क की सुध लेने वाला कोई नहीं है। डामर उखड़ चुका है और सड़क के नाम पर अब केवल धूल भरी मिट्टी और गहरे गड्ढे शेष रह गए हैं।
बारिश बनी आफत: जलजमाव और कीचड़
वर्तमान में मॉनसून की सक्रियता ने इस सड़क की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण, मामूली बारिश में ही पूरा मार्ग तालाब में तब्दील हो जाता है।
अदृश्य गड्ढे: पानी भरने के कारण गड्ढों का पता नहीं चल पाता, जिसके चलते रोजाना दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
कीचड़ का साम्राज्य: सड़क के गड्ढों में भरा गंदा पानी अब कीचड़ में बदल चुका है, जिससे पैदल चलना तो दूर, साइकिल और बाइक चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर
सड़क की इस जर्जर स्थिति का सबसे बुरा प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजना अब एक जोखिम भरा काम हो गया है।
"मेरा बच्चा स्कूल जाते समय कीचड़ में गिर गया और उसकी किताबें-वर्दी खराब हो गई। क्या हम इसी दिन के लिए टैक्स देते हैं?" — एक स्थानीय अभिभावक
इसके अलावा, आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस का इस रास्ते से गुजरना असंभव सा हो गया है। मरीजों को अस्पताल ले जाने में लगने वाला समय दो गुना बढ़ गया है, जो कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर देता है।
प्रशासनिक अनदेखी और स्थानीय आक्रोश
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और नगर निगम के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल 'आश्वासन' ही मिला।
अधिकारियों की चुप्पी: संबंधित विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन यह प्रक्रिया कब पूरी होगी और सड़क कब बनेगी, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
उपेक्षा की पराकाष्ठा: लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद इसी सड़क से नेता अपनी गाड़ियां निकालते हैं और कभी रुककर जनता का दर्द नहीं देखते।
समाधान की आवश्यकता: क्या हो आगे की राह?
सड़क की इस समस्या को हल करने के लिए दीर्घकालिक और तत्काल दोनों तरह के कदमों की आवश्यकता है:
| आवश्यकता | विवरण |
|---|---|
| तत्काल पैचवर्क | बड़े गड्ढों को ईंट-पत्थर या मोरम से भरकर आवागमन लायक बनाना। |
| जल निकासी व्यवस्था | सड़क के किनारे नालियों का निर्माण ताकि पानी सड़क पर जमा न हो। |
| सड़क का पुनर्निर्माण | पक्की सड़क का निर्माण ताकि लंबे समय तक कोई समस्या न हो। |
अललपट्टी गुमती से रघेपुरा जाने वाली यह सड़क सरकार के 'सुशासन' के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान है। एक नागरिक के रूप में हर व्यक्ति को बेहतर बुनियादी सुविधाएं पाने का अधिकार है। यदि प्रशासन ने अभी भी इस पर ध्यान नहीं दिया, तो स्थानीय लोगों द्वारा बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। यह सड़क केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों के विश्वास और सुरक्षा का प्रश्न है