एसकेएमसीएच में आयुष्मान भारत मिशन के तहत 180 डेटा ऑपरेटरों की मांग
बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति और अस्पताल की व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी व आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के सख्त और स्पष्ट निर्देशों के बाद, मुजफ्फरपुर जिले के सभी प्रमुख मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में मरीजों के लिए यूनिक हेल्थ आईडी (ABHA ID) बनाने की अनूठी पहल शुरू कर दी गई है। इस सिलसिले में सबसे पहले श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा इस महाअभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए 180 नए डेटा ऑपरेटरों की भारी मांग की गई है, ताकि पंजीकरण से लेकर इलाज तक की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत किया जा सके।
इस पहल की पृष्ठभूमि: क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन?
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश के नागरिकों को एक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी प्रदान करना है। इसके माध्यम से किसी भी मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास, उसकी पुरानी जांचें, डॉक्टर की पर्ची और प्रिस्क्रिप्शन एक ही क्लिक पर डिजिटल रूप में उपलब्ध हो जाते हैं।
राज्य स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने से न सिर्फ मरीजों को बार-बार कागजी फाइलें ढोने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि डॉक्टरों के लिए भी रोगी के पुराने मर्ज और इलाज को समझना बेहद आसान हो जाएगा। मुजफ्फरपुर जैसे बड़े मेडिकल हब में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में यह डिजिटल बुनियादी ढांचा मरीजों की कतारों को कम करने और भ्रष्टाचार या धांधली पर लगाम लगाने में रामबाण साबित होगा।
एसकेएमसीएच (SKMCH) में मास्टर प्लान और बुनियादी ढांचे की तैयारी
मुजफ्फरपुर का श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) उत्तर बिहार का सबसे बड़ा और प्रमुख चिकित्सा संस्थान है। यहाँ प्रतिदिन ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की संख्या हजारों में होती है। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले प्रत्येक मरीज का डिजिटल रजिस्ट्रेशन करना और उनकी यूनिक आईडी जनरेट करना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
इस चुनौती से पार पाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने डिजिटल मिशन के प्रावधानों के तहत एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। योजना के मुताबिक, अस्पताल के विभिन्न विभागों, काउंटर और पंजीकरण कक्षों (Registration Counters) पर डिजिटल कंप्यूटर टर्मिनल और स्कैनर लगाए जाएंगे। इन टर्मिनलों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी जो आने वाले हर नए व पुराने मरीज का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) तैयार करेंगे।
180 डेटा ऑपरेटरों की मांग: क्यों है इतनी बड़ी आवश्यकता?
अस्पताल के अंदर काम के भारी दबाव और चौबीसों घंटे चलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए, एसकेएमसीएच प्रशासन ने राज्य मुख्यालय को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से 180 डेटा ऑपरेटरों की मांग की है।
तीन पालियों (Shifts) में संचालन: अस्पताल में ओपीडी सुबह से लेकर दोपहर तक चलती है, लेकिन इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर 24 घंटे काम करते हैं। मरीजों का डेटा सुरक्षित रखने और हर समय आईडी जनरेट करने के लिए राउंड-द-क्लॉक ऑपरेटरों की जरूरत होगी।
काउंटरों पर भीड़ नियंत्रण: यदि पर्याप्त संख्या में डेटा ऑपरेटर नहीं होंगे, तो पंजीकरण काउंटरों पर लंबी-लंबी कतारें लग जाएंगी, जिससे मरीजों को असुविधा होगी। मैनपावर बढ़ने से पर्ची कटवाने का समय आधा हो जाएगा।
डेटा की सटीकता: मरीजों का नाम, उम्र, पता और पिछली बीमारियों का ब्योरा सही-सही ऑनलाइन पोर्टल पर फीड करने के लिए तकनीकी रूप से दक्ष कंप्यूटर ऑपरेटरों की अनिवार्य आवश्यकता है।
मरीजों को मिलेंगे अभूतपूर्व लाभ
जब मुजफ्फरपुर के इन मेडिकल कॉलेजों में यह डिजिटल आईडी प्रणाली पूरी तरह से जमीन पर उतर जाएगी, तो इसके अनगिनत फायदे सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों को मिलने लगेंगे:
कागजी झंझटों से मुक्ति: अब मरीजों को अपनी पुरानी मेडिकल फाइलें, एक्स-रे, और खून जांच की रिपोर्टें संभालकर अस्पताल लाने की जरूरत नहीं होगी। डॉक्टर देश के किसी भी कोने से या अस्पताल के डिजिटल सिस्टम से मरीज की पुरानी रिपोर्ट पलभर में देख सकेंगे।
समय की भारी बचत: ओपीडी में रजिस्ट्रेशन और पर्ची बनवाने के लिए घंटों खड़े रहने की परेशानी से निजात मिलेगी। यूनिक आईडी के जरिए मरीज का पिछला सारा विवरण सेकंडों में स्क्रीन पर आ जाएगा।
पारदर्शी और बेहतर इलाज: डॉक्टर के पास मरीज का पूरा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड होने से गलत निदान (Misdiagnosis) की गुंजाइश न के बराबर रह जाएगी और सही समय पर सटीक इलाज संभव हो सकेगा।
सरकारी योजनाओं से सीधा जुड़ाव: इस डिजिटल आईडी के माध्यम से मरीज भविष्य में केंद्र और राज्य सरकार की अन्य स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ भी बहुत आसानी से और बिना किसी कागजी अड़चन के प्राप्त कर सकेंगे।
प्रशासनिक प्रतिबद्धता और आगे की राह
राज्य स्वास्थ्य विभाग और एसकेएमसीएच का यह कदम बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक युग में ले जाने वाला मील का पत्थर साबित हो सकता है। जैसे ही डेटा ऑपरेटरों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होगी, प्रशिक्षण सत्र चलाकर इस सेवा को धरातल पर उतार दिया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में आने वाली तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए विशेष तकनीकी दल भी तैनात किए जाएंगे। मुजफ्फरपुर के नागरिकों और चिकित्सा जगत में इस पहल का स्वागत किया जा रहा है, और उम्मीद जताई जा रही है कि इससे इलाज की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा।