तेलंगाना के 84 लाख की ज्वेलरी लूट की साजिश बिहार की जेलों से रची गई? जांच में बड़ा खुलासा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पटना/करीमनगर। तेलंगाना के करीमनगर में स्थित एक ज्वेलरी शोरूम से 84 लाख रुपये के सोने के आभूषणों की लूट के मामले में जांच एजेंसियों को ऐसे सुराग मिले हैं, जिन्होंने बिहार की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड की कथित साजिश बिहार की दो अलग-अलग जेलों के अंदर से रची गई। यदि जांच में सामने आए आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला केवल एक लूटकांड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जेल प्रशासन और सुरक्षा तंत्र के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, पूर्णिया जेल में बंद कुख्यात अपराधी सुबोध और बेऊर केंद्रीय कारा में बंद शिवम सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जेल के भीतर से ही अपने आपराधिक नेटवर्क के माध्यम से पूरी वारदात की योजना बनाई। आरोप है कि दोनों ने जेल के अंदर रहते हुए अपने सहयोगियों से संपर्क बनाए रखा और लूट की योजना को अंजाम तक पहुंचाने के लिए निर्देश दिए।
नीट परीक्षा के दिन चुना गया वारदात का समय
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अपराधियों ने वारदात के लिए 3 मई, यानी नीट (NEET) परीक्षा वाले दिन का चयन सोच-समझकर किया था। उस दिन बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि अपराधियों ने इसी व्यस्तता का फायदा उठाने की रणनीति बनाई, ताकि पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया में देरी हो और वे आसानी से फरार हो सकें।
अधिकारियों के अनुसार, यह योजना पहले से तैयार थी और इसमें हर चरण पर बारीकी से काम किया गया।
पेंटर बनकर कराई गई शोरूम की रेकी
जांच में यह भी सामने आया है कि लूट से पहले अपराधियों ने एक व्यक्ति को पेंटर के रूप में ज्वेलरी शोरूम में भेजा। उसने काम के बहाने कई दिनों तक दुकान के भीतर रहकर सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, कर्मचारियों की दिनचर्या और प्रवेश-निकास के रास्तों का बारीकी से निरीक्षण किया।
बताया जा रहा है कि रेकी पूरी होने के बाद यह जानकारी मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचाई गई, जिसके आधार पर लूट की पूरी योजना तैयार की गई।
84 लाख रुपये के सोने के आभूषण लूटे
पुलिस के अनुसार, योजना के तहत अपराधी करीमनगर स्थित पीएमजे ज्वेलरी शोरूम पहुंचे और वहां से करीब 84 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।
शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्यों और अन्य डिजिटल इनपुट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर बिहार की जेलों से कथित रूप से जुड़े नेटवर्क का सुराग मिला।
जेल से कैसे संचालित हुआ नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोप है कि दोनों बंदियों ने जेल के भीतर से ही अपने गिरोह के सदस्यों से संपर्क बनाए रखा। यह भी जांच की जा रही है कि कथित तौर पर जेल के अंदर मोबाइल फोन या अन्य संचार माध्यमों का इस्तेमाल कैसे हुआ।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जेलों में सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रतिबंधित वस्तुओं की रोकथाम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इस नेटवर्क में जेल के बाहर मौजूद अन्य अपराधियों और सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
बिहार की जेल सुरक्षा पर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद बिहार की जेल सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जेल में बंद अपराधी बाहर बैठी टीम को निर्देश देने में सफल हो रहे हैं, तो यह सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर संकेत करता है।
पूर्व में भी कई मामलों में जेल के भीतर मोबाइल फोन मिलने और बंदियों द्वारा बाहर से संपर्क बनाए रखने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों के बाद समय-समय पर जेल प्रशासन द्वारा विशेष तलाशी अभियान भी चलाए गए हैं।
जांच एजेंसियां जुटीं साक्ष्य जुटाने में
करीमनगर पुलिस, तकनीकी जांच टीम और अन्य संबंधित एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि लूट के बाद आभूषणों को कहां ले जाया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।
जेल प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच आगे बढ़ने के साथ यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि जेल के भीतर से आपराधिक गतिविधियों का संचालन हुआ, तो क्या सुरक्षा व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या किसी की मिलीभगत थी।
हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी अधिकारी पर कोई आधिकारिक आरोप तय नहीं किया गया है। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
अपराध का बदलता तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि संगठित अपराध अब तकनीक और नेटवर्क का पहले से अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। कई मामलों में अपराधी स्वयं वारदात के स्थान पर मौजूद नहीं होते, बल्कि दूर बैठकर पूरी योजना का संचालन करते हैं।
ऐसे मामलों से निपटने के लिए जेलों में संचार नियंत्रण, निगरानी प्रणाली और खुफिया तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
आगे क्या?
फिलहाल जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही जेल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक सुधारों की भी संभावना जताई जा रही है।
तेलंगाना के करीमनगर में 84 लाख रुपये के सोने के आभूषणों की लूट की जांच ने बिहार की जेल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस वारदात की साजिश पूर्णिया जेल और बेऊर केंद्रीय कारा में बंद दो आरोपितों ने अपने नेटवर्क के जरिए रची। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल यह मामला न केवल एक बड़ी आपराधिक वारदात, बल्कि जेल सुरक्षा और संगठित अपराध के बदलते तौर-तरीकों पर भी गंभीर बहस का विषय बन गया है।