मुजफ्फरपुर में निगमकर्मियों की हड़ताल खत्म होने के 24 घंटे बाद भी सड़कों पर पसरा है कचरे का अंबार: सफाई व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में नगर निगम के कर्मचारियों और सफाईकर्मियों की हालिया हड़ताल भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन शहर की जमीनी हकीकत कुछ और ही दास्तान बयां कर रही है। हड़ताल खत्म होने के पूरे 24 घंटे बीत जाने के बाद भी शहर के प्रमुख इलाकों, व्यस्त बाजारों और रिहायशी कॉलोनियों की सड़कों पर कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर जस के तस पड़े हुए हैं।

सफाईकर्मियों की लगातार अनुपस्थिति और लचर कार्यप्रणाली के कारण शहर का कचरा उठाव (Garbage Collection) पूरी तरह चरमरा गया है। नगर निगम के तमाम दावों के बावजूद आम नागरिकों को गंदगी, दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों के खतरे के बीच जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। आइए जानते हैं इस पूरी समस्या के विस्तार से, कि कैसे हड़ताल टूटने के बाद भी मुजफ्फरपुर की सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट पाई है।

हड़ताल की समाप्ति और उम्मीदों पर फिरता पानी

कुछ दिनों पहले अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नगर निगम के सफाईकर्मियों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। इस हड़ताल के कारण पूरे शहर में कचरा प्रबंधन पूरी तरह ठप हो गया था। घर-घर से कचरा उठाने वाली गाड़ियां बंद थीं और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक कचरे के पहाड़ खड़े हो गए थे।

हाल ही में प्रशासन और कर्मचारी संघ के बीच हुई वार्ताओं के बाद हड़ताल समाप्त होने की घोषणा की गई थी। आम जनता और दुकानदारों को यह उम्मीद थी कि हड़ताल खत्म होते ही शहर की सफाई व्यवस्था तुरंत युद्धस्तर पर शुरू कर दी जाएगी और कुछ ही घंटों में शहर साफ-सुथरा हो जाएगा। लेकिन हड़ताल खत्म होने के 24 घंटे बाद भी जब सड़कों का नजारा नहीं बदला, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

प्रमुख इलाकों और बाजारों का बुरा हाल

मुजफ्फरपुर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्रों का दौरा करने पर यह साफ पता चलता है कि सफाई के मोर्चे पर निगम प्रशासन कितना विफल साबित हो रहा है।

पुरानी बाजार और सरैयागंज टॉवर: शहर के इन प्रमुख व्यापारिक इलाकों में दुकानों के सामने और सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लगे हुए हैं। ग्राहकों और दुकानदारों का चलना तक दूभर हो गया है।

कम्पनी बाग और मोतीझील: इन पॉश और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी जगह-जगह कूड़ेदान ओवरफ्लो होकर सड़कों पर फैल चुके हैं। आवारा पशु (गाय, कुत्ते और सुअर) इन कचरे के ढेरों पर मंडराते रहते हैं, जिससे यातायात बाधित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

भीषण दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप: सड़ते हुए कचरे से उठने वाली बदबू के कारण आसपास के दुकानदारों और राहगीरों का सांस लेना मुहाल हो गया है। जलजमाव और कचरे के सड़ने से मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे महामारी फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई है।

सफाईकर्मियों की अनुपस्थिति और सुस्त प्रशासनिक रवैया

हड़ताल समाप्त होने के बावजूद कचरा उठाव प्रभावित होने के मुख्य कारणों की जब पड़ताल की गई, तो निगम प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई।

कर्मियों का काम पर न लौटना: कई सफाईकर्मी हड़ताल आधिकारिक रूप से समाप्त होने के बाद भी या तो काम पर लौटे नहीं हैं या फिर ड्यूटी से नदारद (Absent) पाए गए हैं।

संसाधनों का कुप्रबंधन: नगर निगम के पास ट्रैक्टर, हाइवा और मैकेनिक गाड़ियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रशासनिक मॉनिटरिंग के अभाव में इन गाड़ियों का उपयोग शहर के सभी वार्डों से कचरा उठाने के लिए समन्वित तरीके से नहीं किया जा रहा है।

बैकलॉग (Backlog) का बोझ: चूंकि हड़ताल के दौरान कई दिनों तक कचरा जमा नहीं हुआ था, इसलिए कचरे का बैकलॉग इतना अधिक बढ़ गया है कि सामान्य दिनों की तुलना में इसे साफ करने के लिए दोगुने बल और समय की आवश्यकता है, जिसका अभाव साफ दिखाई दे रहा है।

स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का छलका दर्द

शहर की इस बदहाल स्थिति को लेकर मुजफ्फरपुर के आम नागरिकों और व्यापारियों में नगर निगम के प्रति भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

व्यापारी संघ का बयान: पुरानी बाजार के एक व्यापारी ने कहा, "हड़ताल खत्म होने की खबर सुनकर हमें राहत की सांस मिली थी कि अब दुकानें साफ-सुथरे माहौल में खुलेंगी। लेकिन 24 घंटे बाद भी कचरा वैसे ही सड़ रहा है। ग्राहक हमारी दुकान के सामने गंदगी देखकर लौट जाते हैं, जिससे हमारा व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।"

स्थानीय निवासी: एक अन्य नागरिक ने बताया कि निगम के अधिकारी केवल कागजों पर शहर को स्मार्ट बनाने के दावे करते हैं, लेकिन ज़मीन पर हालात यह हैं कि थोड़ी सी हड़ताल के बाद पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। सफाई कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है।

नगर निगम अधिकारियों की सफाई और अल्टीमेटम

मामले के तूल पकड़ने और मीडिया में खबरें आने के बाद नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों की नींद टूटी है। निगम के संबंधित अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को सामान्य करने के लिए विशेष अभियान (Special Sanitation Drive) चलाया जा रहा है।

रोस्टर के तहत काम: अधिकारियों ने दावा किया है कि सभी वार्ड इंस्पेक्टरों और स्वच्छता प्रभारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में खड़े कचरे के ढेरों को प्राथमिकता के आधार पर उठवाएं।

अनुपस्थित कर्मियों पर कार्रवाई: हड़ताल समाप्त होने के बाद भी बिना सूचना के काम से गायब रहने वाले सफाईकर्मियों की सूची तैयार की जा रही है। ऐसे लापरवाह कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई और वेतन कटौती की संस्तुति की जाएगी।

नाइट शिफ्ट में सफाई: कचरे के भारी बैकलॉग को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए अब रात के समय भी प्रमुख बाजारों और चौराहों से कचरा उठाने का काम शुरू किया जा रहा है।

मुजफ्फरपुर में निगमकर्मियों की हड़ताल समाप्त होने के 24 घंटे बाद भी सड़कों पर फैली गंदगी यह साबित करती है कि शहर का कचरा प्रबंधन तंत्र कितना कमजोर और असंवेदनशील है। केवल हड़ताल खत्म करवा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके बाद की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाना प्रशासन की मुख्य जिम्मेदारी है। यदि नगर निगम ने तुरंत युद्धस्तर पर कदम नहीं उठाया, तो मुजफ्फरपुरवासियों को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। समय आ गया है कि अधिकारी कागजी दावों से बाहर निकलकर ज़मीन पर उतरें और शहर की साफ-सफाई को प्राथमिकता दें।