नग्न लाश, फर्श पर फैला खून और बिखरा सामान... मर्डर या मिस्ट्री?
बिहार के बेगूसराय जिले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला और रहस्यमयी मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन और बैंकिंग सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है। केनरा बैंक के सीनियर मैनेजर (असिस्टेंट मैनेजर) 35 वर्षीय ब्रजमोहन गुड्डू की उनके किराये के कमरे में अत्यंत संदेहास्पद और खौफनाक हालत में लाश मिली है। लाश कई दिन पुरानी होने के कारण सड़ चुकी थी और कमरे से उठती भीषण दुर्गंध के बाद इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात का खुलासा हुआ।
कमरे के अंदर का मंजर चीख-चीख कर किसी अनहोनी या सोची-समझी साजिश की गवाही दे रहा है, लेकिन पुलिस इसे हत्या और हादसे दोनों ही एंगल से देख रही है। इस मौत के पीछे 'सस्पेंस' का एक ऐसा ताना-बाना बुना हुआ है, जिसने कई अनसुलझे सवाल खड़े कर दिए हैं।
कमरे का वो खौफनाक मंजर: जब सटा हुआ किवाड़ खुला...
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना बेगूसराय जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र के निराला नगर मोहल्ले की है। ब्रजमोहन गुड्डू यहां 'सुनील सदन' नामक एक मकान के ग्राउंड फ्लोर पर पिछले करीब तीन साल से किराए पर अकेले रह रहे थे।
चूहा मरने का शक: रविवार को पूरी बिल्डिंग में एक भयानक दुर्गंध फैल गई। पास ही एक कूरियर कंपनी का ऑफिस भी चलता है। वहां के स्टाफ और अन्य किरायेदारों को लगा कि शायद किसी कोने में कोई चूहा मर गया है।
खुला हुआ दरवाजा: दुर्गंध बढ़ने पर मकान मालिक के बेटे संदीप कुमार कमरे के पास पहुंचे। उन्होंने देखा कि बैंक मैनेजर के कमरे का किवाड़ पूरी तरह बंद नहीं था, बल्कि महज सटा हुआ था। जैसे ही उन्होंने हल्के हाथ से धक्का दिया, दरवाजा खुल गया।
स्तब्ध करने वाला दृश्य: कमरे के अंदर का नजारा देखकर संदीप और अन्य लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। चौकी पर ब्रजमोहन गुड्डू का शव पूरी तरह से नग्न (Nude) अवस्था में पड़ा हुआ था। शव बुरी तरह सड़ चुका था और काला पड़ गया था।
फर्श पर खून और बिखरा सामान: मृतक के पैर के ऊपर एक स्टैंड फैन (पंखा) गिरा हुआ था। पैर से भारी मात्रा में खून बहने के कारण कमरे का फर्श लाल हो चुका था। कमरे के अंदर सारा सामान इस कदर बिखरा पड़ा था, मानो मौत से पहले वहां किसी के साथ बेरहमी से मारपीट या हाथापाई हुई हो।
सस्पेंस को गहरा करते 3 बड़े सवाल
ब्रजमोहन गुड्डू की मौत सामान्य नहीं दिख रही है। घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियां इस मामले को एक पेचीदा मिस्ट्री बना रही हैं:
सवाल नंबर 1: क्या यह सोची-समझी हत्या है?
कमरे का किवाड़ बाहर से लॉक न होकर केवल सटा हुआ था। सामान अस्त-व्यस्त था। स्थानीय लोगों और जांच टीम के अनुमान के मुताबिक, घटना से 3-4 दिन पहले रात के वक्त शायद कोई उनका बेहद परिचित व्यक्ति या 4-5 लोग उनके कमरे पर आए होंगे। उनके साथ खाने-पीने का दौर चला (फर्श पर पानी की बोतल और दवा का स्टीकर मिला है) और उसके बाद इस खौफनाक वारदात को अंजाम देकर आरोपी आराम से दरवाजा सटाकर निकल गए।
सवाल नंबर 2: क्या यह कोई गंभीर हादसा था?
जांच का दूसरा पहलू यह भी है कि ब्रजमोहन गुड्डू शारीरिक रूप से दिव्यांग (Physically Disabled) थे, उनका एक पैर कटा हुआ था। आशंका यह भी जताई जा रही है कि शायद कमरे में अचानक गिरने या पैर पर स्टैंड फैन गिरने की वजह से वह गंभीर रूप से चोटिल हो गए हों और समय पर इलाज न मिलने या ज्यादा खून बह जाने के कारण तड़प-तड़प कर उनकी जान चली गई हो।
सवाल नंबर 3: एक महीने से बैंक से गायब क्यों थे?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस बैंक से जुड़ा है। बैंककर्मियों और उनके सहयोगियों के मुताबिक, ब्रजमोहन पिछले करीब एक महीने (या कुछ दिनों) से बिना किसी पूर्व सूचना के बैंक से गायब चल रहे थे। एक सीनियर मैनेजर का इस तरह अचानक बिना बताए ड्यूटी से गायब रहना और फिर कमरे में बंद लाश मिलना, किसी बड़े मानसिक तनाव या अदृश्य दबाव की ओर इशारा करता है।
"वह जल्द ही पटना आने वाले थे..." — पत्नी की रुआंसी दास्तान
मृतक ब्रजमोहन गुड्डू मूल रूप से पटना सिटी के पचरूखिया थाना अंतर्गत बाली (वार्ड-6) के रहने वाले थे। उनकी शादी जूही सिंह से हुई थी और उनका एक 6 साल का मासूम बेटा 'आद्विक' है। पत्नी और बच्चा पटना के दीदारगंज में रहते थे, जबकि ब्रजमोहन अपनी ड्यूटी के कारण बेगूसराय में अकेले रहते थे।
पति की मौत की मनहूस खबर सुनते ही पत्नी जूही अपने मासूम बच्चे के साथ बेगूसराय सदर अस्पताल पहुंचीं। वहां का माहौल बेहद गमगीन था। बिलखती हुई जूही ने जो बातें बताईं, उसने सस्पेंस को और बढ़ा दिया:
24 जून की आखिरी बात: जूही ने बताया कि उनके पति से आखिरी बार 24 जून की देर शाम फोन पर बात हुई थी। ब्रजमोहन ने कहा था कि उनके फोन का चार्जर खराब हो गया है, इसलिए बात करने में दिक्कत हो रही है।
पटना आने का वादा: ब्रजमोहन ने पत्नी से वादा किया था कि वह 26 जून को पटना (घर) लौट रहे हैं। वह नियमित रूप से ड्यूटी जाने की बात भी कह रहे थे (जबकि बैंक रिकॉर्ड के अनुसार वह गायब थे)।
मासूम की बेबसी: अस्पताल के परिसर में जहां महिलाएं बदहवास थीं, वहीं उनका 6 साल का बेटा आद्विक इस बात से बिल्कुल अनजान था कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। वह कभी मां का पल्लू पकड़ता तो कभी मासूमियत से वहां खेलता दिखाई दिया।
पुलिसिया तफ्तीश: कॉल डिटेल्स और सीसीटीवी पर टिकी निगाहें
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। चूंकि मृतक एक प्रतिष्ठित बैंक के अधिकारी थे, इसलिए पुलिस हर संभावित बिंदु की बारीकी से जांच कर रही है।
पोस्टमार्टम के लिए रेफर: शव की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि बेगूसराय सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने प्राथमिक परीक्षण के बाद मौत का सटीक कारण पता लगाने के लिए शव को डीएमसीएच (DMCH) रेफर कर दिया।
चोट के निशानों पर सस्पेंस: सदर एसडीपीओ (SDPO-1) आनंद कुमार पांडेय ने मीडिया को बताया कि शव काफी सड़ चुका है। शरीर पर बाहरी चोट के स्पष्ट निशान पहली नजर में नहीं दिखे हैं, इसलिए मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
कॉल डिटेल्स (CDR) और सीसीटीवी: पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है। उनके आखिरी कॉल्स, लोकेशन और व्हाट्सऐप चैट्स खंगाले जा रहे हैं। इसके साथ ही, निराला नगर मोहल्ले और सुनील सदन बिल्डिंग के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को निकाला जा रहा है ताकि यह देखा जा सके कि पिछले 3-4 दिनों में उनके कमरे में कौन-कौन आया था।
क्या यह केनरा बैंक के एक दिव्यांग मैनेजर की किसी हादसे में हुई दर्दनाक मौत है या फिर इसके पीछे कोई गहरा वित्तीय विवाद, हनीट्रैप, अवैध संबंध या कोई आपसी रंजिश की कहानी छिपी है? सामान का बिखरा होना, नग्न अवस्था में लाश का मिलना और किवाड़ का खुला रहना किसी बड़ी साजिश की बू देता है। अब सबकी नजरें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की वैज्ञानिक जांच (FSL टीम की रिपोर्ट) पर टिकी हैं, जो इस 'बंद कमरे के रहस्य' से पर्दा उठाएगी।