बिजली विभाग की लचर व्यवस्था: फ्यूज कॉल सेंटर के कर्मचारी बने 'बेसुध', पूरी रात फोन उठाते रहे परेशान उपभोक्ता

पटना/बिहार: भीषण गर्मी और उमस के बीच बिहार में बिजली आपूर्ति की स्थिति भले ही सुधारने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। ताजा मामला बिजली विभाग के स्थानीय फ्यूज कॉल सेंटरों की घोर लापरवाही का है, जहां तैनात कर्मचारी रात के सन्नाटे में अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े नजर आए। घंटों बिजली गुल रहने के बावजूद जब उपभोक्ताओं ने शिकायत के लिए कॉल सेंटर के नंबरों पर संपर्क किया, तो दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, जिससे उपभोक्ता पूरी रात अंधेरे में रहने को मजबूर हुए।

जिम्मेदारियों से किनारा: कॉल उठाते ही 'नो रिस्पॉन्स'

विभागीय निर्देशों के अनुसार, सभी फ्यूज कॉल सेंटरों को 24 घंटे सक्रिय रहने और शिकायतों का त्वरित निवारण करने का आदेश है। लेकिन रात के समय इन सेंटरों की सच्चाई कुछ और ही होती है। पटना समेत कई जिलों से ऐसी खबरें लगातार सामने आ रही हैं कि आधी रात को जब बिजली गुल होती है, तो कॉल सेंटर पर तैनात कर्मचारी या तो फोन नहीं उठाते या उसे 'व्यस्त' (Busy) बताकर काट देते हैं।

एक उपभोक्ता ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, "रात के 2 बजे बिजली गई तो हमने फ्यूज कॉल सेंटर के नंबर पर कई बार फोन किया। फोन की घंटी बजती रही लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। जब विभाग को 24 घंटे सेवा देनी है, तो रात में कर्मचारी कहां सो रहे थे?"

हवाई साबित हुए विभाग के दावे

बिजली कंपनी के उच्चाधिकारियों द्वारा अक्सर यह दावा किया जाता है कि शिकायतों के निपटारे के लिए 'हंटिंग नंबर' और अन्य आधुनिक प्रणालियां लागू कर दी गई हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं का अनुभव इन दावों की पोल खोलता है। हंटिंग नंबर व्यवस्था के बावजूद यदि कर्मचारी ही ड्यूटी से गायब या बेपरवाह हों, तो शिकायत दर्ज होना असंभव हो जाता है।

'सुविधा' नाम की, लेकिन परेशानी भारी

बिजली विभाग ने 'सुविधा' ऐप, 1912 हेल्पलाइन और व्हाट्सएप चैटबॉट जैसे कई माध्यम तो बना दिए हैं, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ता आज भी फ्यूज कॉल सेंटर पर ही ज्यादा भरोसा करते हैं। इन केंद्रों की विफलता का सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो तकनीकी रूप से इतने दक्ष नहीं हैं कि वे ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकें।

अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ती समस्या

सूत्रों की मानें तो रात की पाली में कर्मचारियों की निगरानी का अभाव ही इस लापरवाही की सबसे बड़ी वजह है। कार्यपालक अभियंताओं को अपने-अपने क्षेत्र के फ्यूज कॉल सेंटरों की निगरानी का जिम्मा दिया गया है, लेकिन धरातल पर औचक निरीक्षण की कमी के कारण कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा हुआ है।

उपभोक्ताओं की मांग: जवाबदेही तय हो

इस लचर रवैये से नाराज उपभोक्ताओं ने मांग की है कि ऐसे लापरवाह कॉल सेंटरों पर कड़ी कार्रवाई हो। केवल नंबर जारी कर देना काफी नहीं है; बिजली विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि रात के अंधेरे में भी उपभोक्ता की आवाज सुनी जाए।

फिलहाल, बिजली विभाग की इस 'निद्रा' के कारण आम लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। यदि विभाग जल्द ही अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं लाता है, तो उपभोक्ताओं का गुस्सा आने वाले दिनों में और सड़कों पर देखने को मिल सकता है।