आरोपी पुलिस अधिकारी की नई पोस्टिंग पर भड़कीं मां आशा देवी, बोलीं- सरकार ने जख्मों पर छिड़का नमक
आरा। चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। इस बार विवाद की वजह एनकाउंटर के आरोपी पुलिस अधिकारी राजेश शर्मा की नई पोस्टिंग बनी है। भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी ने सरकार के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जिस अधिकारी पर उनके बेटे की मौत का आरोप है, उसे नई जिम्मेदारी देकर सरकार ने उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद लगातार कमजोर होती जा रही है और सरकार का यह कदम पीड़ित परिवार की भावनाओं की अनदेखी है।
आशा देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका परिवार पिछले कई महीनों से न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेटे की मौत के बाद से परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से परेशान है। ऐसे समय में आरोपी अधिकारी को नई पोस्टिंग देना यह दर्शाता है कि सरकार पीड़ित परिवार की पीड़ा को समझने के बजाय आरोपी अधिकारियों को संरक्षण देने में लगी हुई है।
न्याय की लड़ाई जारी रहेगी
भरत तिवारी की मां ने कहा कि उनका परिवार किसी भी कीमत पर न्याय की मांग से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगी और अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगी।
आशा देवी ने कहा, "मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन मैं चाहती हूं कि किसी और मां को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े। अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी तो लोगों का कानून और न्याय व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा।"
सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
आशा देवी ने सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगे हों और जिसकी भूमिका की जांच चल रही हो, उसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले जांच पूरी करनी चाहिए थी और उसके बाद ही किसी तरह का प्रशासनिक फैसला लेना चाहिए था।
उनका कहना था कि यदि किसी आम व्यक्ति पर गंभीर आरोप लग जाए तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है या कार्रवाई होती है, लेकिन सरकारी अधिकारियों के मामले में अलग रवैया अपनाया जाता है। इससे न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
परिवार में बढ़ी नाराजगी
राजेश शर्मा की नई पोस्टिंग की खबर सामने आने के बाद भरत तिवारी के परिवार में नाराजगी और बढ़ गई है। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि सरकार को पहले पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए था।
परिजनों का कहना है कि इस फैसले से ऐसा संदेश जा रहा है कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सरकार की कोई मंशा नहीं है। इससे न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवार को गहरा आघात पहुंचा है।
सामाजिक संगठनों ने भी जताई चिंता
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर पहले भी कई सामाजिक संगठनों और विभिन्न समाजों ने विरोध प्रदर्शन किया था। अब आरोपी अधिकारी की नई पोस्टिंग के बाद एक बार फिर कई संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित अधिकारी को महत्वपूर्ण पद नहीं दिया जाना चाहिए।
कई संगठनों ने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि इससे आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहेगा।
विपक्ष को मिला नया मुद्दा
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों को भी सरकार पर हमला बोलने का नया अवसर मिल गया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार कानून के शासन की बात तो करती है, लेकिन जब अपने अधिकारियों की बात आती है तो अलग रवैया अपनाया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी अधिकारी को नई पोस्टिंग देना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
हालांकि सरकार की ओर से इस मामले पर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक हलकों में इसे नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन पीड़ित परिवार इस तर्क से संतुष्ट नहीं है।
पहले से चर्चा में रहा है मामला
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला शुरू से ही चर्चा का विषय रहा है। घटना के बाद से लगातार राजनीतिक बयानबाजी, सामाजिक संगठनों के प्रदर्शन और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन होते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि भरत तिवारी का एनकाउंटर फर्जी था, जबकि पुलिस का पक्ष अलग रहा है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया अभी भी विभिन्न स्तरों पर जारी है।
इस दौरान कई नेताओं ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं, ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
न्याय मिलने तक संघर्ष का संकल्प
आशा देवी ने स्पष्ट कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत बदले की भावना से नहीं बल्कि न्याय के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों को सजा नहीं मिली तो भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि पीड़ित परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए मामले में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा, "हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि कानून सबके लिए बराबर हो। अगर कोई अधिकारी दोषी है तो उसके खिलाफ भी वैसी ही कार्रवाई होनी चाहिए जैसी किसी आम नागरिक के खिलाफ होती है।"
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें सरकार और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। आरोपी पुलिस अधिकारी की नई पोस्टिंग ने एक बार फिर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को सुर्खियों में ला दिया है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अडिग है, जबकि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है।
आने वाले दिनों में यदि सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण या जांच से जुड़ा नया कदम सामने आता है तो यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श के केंद्र में आ सकता है। फिलहाल भरत भूषण तिवारी की मां आशा देवी का कहना है कि उनके परिवार की न्याय की लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और कानूनी कार्रवाई नहीं हो जाती।