भोजपुर में मई में सामान्य से 173% अधिक तो जून में 61.87% कम बारिश, मौसम के बदले मिजाज से किसान चिंतित

आरा। भोजपुर जिले में इस वर्ष मानसून से पहले और मानसून की शुरुआत के दौरान वर्षा का असंतुलित पैटर्न किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। जहां मई माह में जिले में 49.70 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य वर्षा से 173 प्रतिशत अधिक रही, वहीं जून महीने में केवल 41.44 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 61.87 प्रतिशत कम दर्ज की गई। बारिश के इस असामान्य उतार-चढ़ाव ने कृषि कार्यों को प्रभावित किया है और किसान अब समय पर अच्छी बारिश की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा में आई इस भारी कमी का सीधा असर धान की रोपनी, खरीफ फसलों की बुआई और खेतों में नमी की उपलब्धता पर पड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो किसानों को सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

मई में सामान्य से कहीं अधिक हुई वर्षा

मौसम के आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में भोजपुर जिले में 49.70 मिमी वर्षा दर्ज की गई। यह सामान्य औसत वर्षा से 173 प्रतिशत अधिक रही।

मई में हुई अच्छी बारिश से किसानों को उम्मीद जगी थी कि इस बार मानसून भी बेहतर रहेगा और खरीफ फसलों की तैयारी समय पर शुरू हो जाएगी। कई किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्य भी तेज कर दिए थे।

हालांकि, जून महीने में बारिश की कमी ने इन उम्मीदों को झटका दिया।

जून में सामान्य से काफी कम बारिश

जून महीने में जिले में केवल 41.44 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य स्थिति में इससे कहीं अधिक बारिश होती है। मौसम विभाग के अनुसार यह आंकड़ा सामान्य वर्षा से 61.87 प्रतिशत कम है।

मानसून के शुरुआती महीने में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण कई स्थानों पर धान की नर्सरी और रोपनी का कार्य प्रभावित हुआ है।

किसानों की बढ़ी चिंता

जिले के किसानों का कहना है कि जून में अच्छी बारिश नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं। जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली थी, वे अब रोपाई शुरू करने के लिए पर्याप्त पानी का इंतजार कर रहे हैं।

कुछ किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो उन्हें डीजल पंप और अन्य सिंचाई साधनों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ जाएगी।

धान की रोपनी पर पड़ा असर

भोजपुर जिले में खरीफ मौसम की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान मानी जाती है। धान की रोपाई के लिए पर्याप्त वर्षा और खेतों में पानी का होना आवश्यक है।

जून में कम बारिश होने के कारण कई क्षेत्रों में धान की रोपाई समय पर शुरू नहीं हो सकी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रोपनी में अधिक देरी होने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

सिंचाई पर बढ़ सकता है खर्च

यदि बारिश की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो किसानों को निजी सिंचाई साधनों का उपयोग करना पड़ेगा।

डीजल चालित पंप, बिजली से चलने वाले मोटर और अन्य सिंचाई उपकरणों के उपयोग से खेती की लागत बढ़ेगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों पर आर्थिक बोझ अधिक पड़ सकता है।

मौसम विभाग की निगरानी जारी

मौसम विभाग लगातार जिले के मौसम और वर्षा की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विभाग के अनुसार मानसून की सक्रियता में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यदि लंबे समय तक वर्षा की कमी बनी रहती है तो इसका असर कृषि पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

विशेषज्ञ किसानों को मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर नजर रखने और कृषि विभाग के निर्देशों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं।

कृषि विभाग भी सतर्क

कृषि विभाग के अधिकारी भी जिले में वर्षा की स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि वर्षा में कमी बनी रहती है तो किसानों को वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण उपायों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों के बारे में सलाह दी जाएगी।

साथ ही किसानों को फसल प्रबंधन संबंधी आवश्यक तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।

खरीफ उत्पादन पर असर की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के शुरुआती दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

धान के अलावा मक्का, दलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई भी वर्षा पर काफी हद तक निर्भर करती है। इसलिए आने वाले कुछ सप्ताह कृषि की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

किसान अच्छी बारिश का कर रहे इंतजार

जिले के अधिकांश किसान अब मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त वर्षा हो जाती है तो कृषि कार्य सामान्य गति पकड़ सकते हैं।

कई किसानों ने उम्मीद जताई है कि जुलाई में मानसून सक्रिय होगा और खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

जल संरक्षण पर भी जोर

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को वर्षा जल संरक्षण, खेत तालाब, सूक्ष्म सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

इससे भविष्य में कम वर्षा की स्थिति में भी खेती पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

भोजपुर जिले में मई महीने में सामान्य से 173 प्रतिशत अधिक वर्षा और जून में सामान्य से 61.87 प्रतिशत कम बारिश ने मौसम के बदलते स्वरूप को उजागर किया है। जून में वर्षा की भारी कमी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है और धान की रोपनी सहित खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होकर पर्याप्त वर्षा करता है तो कृषि कार्यों में तेजी आ सकती है, लेकिन बारिश में लगातार कमी रहने पर किसानों को अतिरिक्त सिंचाई और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।