नीट री-एग्जाम का 'महाविस्फोट'! मगध मेडिकल कॉलेज का छात्र अर्पित सिंह निकला मास्टरमाइंड, बायोमेट्रिक स्टाफ को खरीदकर परीक्षा केंद्रों पर बैठाए थे 9 सॉल्वर्स
मास्टरमाइंड की पहचान: अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज (गया) का एमबीबीएस (MBBS) चौथे वर्ष का छात्र अर्पित सिंह ही इस पूरे सॉल्वर गैंग का मुख्य सूत्रधार है।
बायोमेट्रिक में बड़ी सेंधमारी: डिजिटल सुरक्षा को धता बताने के लिए परीक्षा में बायोमेट्रिक जांच करने वाली निजी एजेंसी 'साई एजुकेयर' के 18 कर्मियों को मोटी रकम देकर पहले ही खरीद लिया गया था।
पुलिस की बड़ी कामयाबी: लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों से मास्टरमाइंड अर्पित द्वारा सेट किए गए सभी 9 सॉल्वर्स (स्कॉलर्स) को पुलिस ने रंगे हाथों दबोचा।
ग्राउंड रिपोर्ट: कैसे हुआ नीट री-एग्जाम के सबसे बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित की गई नीट पुनर्परीक्षा-2026 में जालसाजों ने सेंधमारी का एक ऐसा अभूतपूर्व तरीका निकाला जिसने तकनीकी सुरक्षा प्रणाली पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब लखीसराय के केआरके (KRK) उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर मुजफ्फरपुर के कांटी अंतर्गत हरचंदा गांव के निवासी विवेक कुमार को 'प्रभात अमन' नामक एक मूल अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। जब पुलिस ने विवेक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ शुरू की, तो उसने पुलिस के सामने मास्टरमाइंड अर्पित सिंह के नाम का महाविस्फोट कर दिया। विवेक से मिले इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया और लखीसराय के तीन परीक्षा केंद्रों— केआरके उच्च विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय और हसनपुर उच्च विद्यालय से कुल 9 नकली परीक्षार्थियों (सॉल्वर्स) को परीक्षा देते हुए दबोच लिया।
बायोमेट्रिक कर्मियों को खरीदा: 15-15 लाख रुपये का खेल और 'मूकदर्शक' स्टाफ
आमतौर पर किसी भी बड़ी परीक्षा में थंब इंप्रेशन (अंगूठे का निशान) और फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान) के जरिए फर्जी परीक्षार्थियों को एंट्री द्वार पर ही रोक दिया जाता है। लेकिन अर्पित सिंह के हौसले इस कदर बुलंद थे कि उसने तकनीक को नहीं, बल्कि तकनीक को संचालित करने वाले इंसानों को ही खरीद लिया।
साजिश का मुख्य ताना-बाना:
एजेंसी के भीतर साठगांठ: परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच का जिम्मा एक निजी एजेंसी 'साई एजुकेयर' के पास था। अर्पित सिंह ने इस एजेंसी के तीन मुख्य सुपरवाइजरों— बादल कुमार, विशाल कुमार और अमलेश कुमार से तगड़ी सेटिंग की थी।
पीएमसीएच कनेक्शन: इस साठगांठ को अंजाम देने के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के छात्र मयंक कश्यप उर्फ अश्विनी ने मध्यस्थ (Broker) की भूमिका निभाई थी।
18 कर्मी बने मूकदर्शक: सुपरवाइजरों को मोटी रकम की हरी झंडी मिलते ही परीक्षा केंद्रों पर तैनात बायोमेट्रिक जांच करने वाले अन्य 18 कर्मी भी मूकदर्शक बन गए। उन्होंने जानबूझकर मिसमैच हो रहे थंब इंप्रेशन और पहचान पत्रों को 'वेरिफाइड' (Verified) मार्क कर सॉल्वर्स को धड़ल्ले से परीक्षा हॉल के भीतर प्रवेश करा दिया।
क्यों रची गई यह खतरनाक साजिश? अपनों को पास कराने का 'शॉर्टकट'
पुलिसिया जांच और अब तक हुई गिरफ्तारियों से यह साफ हो गया है कि इस रैकेट का इस्तेमाल सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि रसूखदारों और अपनों को डॉक्टर बनाने के लिए किया जा रहा था।
भाई को पास कराने की डील: पावापुरी स्थित भगवान महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (VIMS) के छात्र रंजित कुमार ने अपने सगे भाई संजीत कुमार को नीट परीक्षा पास कराने के लिए सीधे मास्टरमाइंड अर्पित सिंह से संपर्क साधा था और लाखों रुपये की डील की थी।
पत्नी की जगह बैठाई सॉल्वर: मामले का एक अन्य फरार आरोपी रविशंकर अपनी पत्नी को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाना चाहता था। उसने भी अपनी पत्नी की जगह एक तेज-तर्रार स्कॉलर को परीक्षा हॉल में बैठाने के लिए अर्पित के सिंडिकेट को भारी-भरकम एडवांस रकम दी थी।
गया के ओल्ड बॉयज हॉस्टल में छापेमारी; डिजिटल टैब जब्त
मामले की गंभीरता और इसके राष्ट्रीय स्तर के जुड़ाव को देखते हुए गया के टाउन डीएसपी-2 धर्मेंद्र भारती और मगध मेडिकल थानाध्यक्ष कृष्ण कुमार ने भारी पुलिस बल के साथ अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज के ओल्ड बॉयज हॉस्टल में ताबड़तोड़ छापेमारी की।
हालांकि, मास्टरमाइंड अर्पित सिंह पुलिस के पहुंचने से ठीक पहले हॉस्टल से फरार होने में कामयाब रहा, लेकिन पुलिस ने उसके कमरे से उसका इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल टैब (Tablet) और कई डायरियां जब्त कर ली हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस टैब के भीतर कई रसूखदार पिताओं, अभ्यर्थियों के रोल नंबर, एडमिट कार्ड की सॉफ्ट कॉपी और पैसों के लेनदेन (Banking Transactions) का पूरा कच्चा चिट्ठा मौजूद है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) भी अब इस मामले में कूद चुकी है और अर्पित के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पकड़े गए सॉल्वर नेटवर्क की सूची
पुलिस द्वारा लखीसराय के केंद्रों से गिरफ्तार किए गए 9 सॉल्वर्स में से अधिकांश बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के मेधावी छात्र हैं, जिन्हें अर्पित ने चंद लाख रुपयों का लालच देकर इस दलदल में धकेला था। पुलिस इन सभी 9 आरोपियों को जेल भेज चुकी है और इनके जरिए इस सिंडिकेट के अन्य खरीदारों (अभ्यर्थियों के माता-पिता) की तलाश की जा रही है।
जब देश का सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल छात्र ही परीक्षा माफिया बन जाए, तो पूरी शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। थंब इंप्रेशन और बायोमेट्रिक जैसी अभेद्य सुरक्षा दीवारों को पैसों के दम पर ढहा देना यह साबित करता है कि लूपहोल तकनीक में नहीं, सिस्टम के ईमान में है। फिलहाल अर्पित, विवेक और रंजित पुलिस की रडार पर हैं। देखना दिलचस्प होगा कि अर्पित की डायरी से बिहार और देश के कितने और बड़े सफेदपोशों और रसूखदार डॉक्टरों के नाम बेनकाब होते हैं!