बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: भाजपा के पारंपरिक दुर्ग में बड़ा राजनीतिक भूचाल; सिर्फ 19 फीसदी बूथों पर सिमटी भाजपा, दिग्गजों के घर पर भी प्रशांत किशोर की जन सुराज का परचम
पटना: बिहार की राजधानी पटना की सबसे हाई-प्रोफाइल और प्रतिष्ठित सीट मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणामों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। पिछले तीन दशकों (लगभग 31 वर्षों) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अजेय दुर्ग के रूप में पहचानी जाने वाली इस सीट पर जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर भाजपा के वर्चस्व को ध्वस्त कर दिया है। इस उपचुनाव के आंकड़ों और बूथ-वार (Booth-wise) विश्लेषण ने यह साबित कर दिया है कि सत्ताधारी दल की जमीन कितनी दरक चुकी है। स्थिति यह रही कि पूरे बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के कुल मतदान केंद्रों में से महज 19 फीसदी बूथों पर ही भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा बढ़त बना सके, जबकि लगभग 81 प्रतिशत बूथों पर जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भारी बढ़त हासिल की। हैरानी की बात तो यह रही कि पार्टी के दिग्गजों और वीवीआईपी नेताओं—यहाँ तक कि सांसद रविशंकर प्रसाद और मंत्री रामकृपाल यादव के अपने मतदान केंद्रों पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
बांकीपुर उपचुनाव के चुनावी आंकड़े और चौंकाने वाली हार
बांकीपुर सीट पर हुए इस उपचुनाव के नतीजे केवल एक हार-जीत नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों के पूरी तरह बदलने का संकेत हैं।
प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत: जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे प्रशांत किशोर ने कुल 64,151 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 19,324 मतों के भारी अंतर से पराजित किया। भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 44,827 वोट ही मिल सके। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता की जमानत तक जब्त हो गई, जिन्हें मात्र 14,273 वोट मिले।
भाजपा के गढ़ में बड़ी सेंध: यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उनके परिवार का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है, जहां पिछले तीन दशकों से लगातार कमल खिलता रहा है। लेकिन इस बार के उपचुनाव में मतदाताओं ने बदलाव के पक्ष में ऐसा जनादेश दिया कि भाजपा की पूरी कार्यशैली और रणनीति धरी की धरी रह गई।
दिग्गजों के बूथों पर भी पिछड़ी भाजपा: रविशंकर प्रसाद और रामकृपाल यादव को झटका
इस चुनाव का सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि भाजपा के दिग्गज नेताओं और मंत्रियों के प्रभाव वाले बूथों पर भी पार्टी को करारी मात मिली। जमीनी स्तर पर जन सुराज का प्रबंधन इतना मजबूत था कि वीवीआईपी इलाकों में भी भाजपा पिछड़ गई।
सांसद रविशंकर प्रसाद का बूथ: देश के जाने-माने भाजपा नेता और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद ने पटना वीमेंस कॉलेज स्थित बूथ संख्या-91 पर अपना मतदान किया था। इस प्रतिष्ठित बूथ पर भी भाजपा अपनी साख नहीं बचा पाई। यहां जन सुराज के प्रशांत किशोर को 91 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा को केवल 89 वोट ही प्राप्त हुए।
मंत्री रामकृपाल यादव का बूथ: बिहार सरकार में कद्दावर मंत्री और भाजपा नेता रामकृपाल यादव ने जिस बूथ पर मतदान किया था, वहां भी कमोबेश यही तस्वीर देखने को मिली। रामकृपाल यादव के बूथ पर भाजपा को 89 वोट मिले, जबकि जन सुराज पार्टी ने 91 वोट हासिल कर बढ़त बना ली
पार्टी प्रत्याशियों और दिग्गजों के गृह क्षेत्र की स्थिति: विश्लेषकों के अनुसार, बांकीपुर के कुल मतदान केंद्रों में से बमुश्किल 19 फीसदी बूथ (लगभग 81 बूथ) ही ऐसे रहे जहां भाजपा बढ़त बना पाने में कामयाब हुई, बाकी के 81 प्रतिशत से अधिक बूथों पर प्रशांत किशोर का जलवा कायम रहा। यहां तक कि खुद भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा के बूथ पर भी कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहाँ भाजपा बड़ी मुश्किल से ही बढ़त बचा सकी।
क्यों हारी भाजपा? बूथ प्रबंधन और जनता का आक्रोश
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर तीन दशक पुराने गढ़ में भाजपा इतनी बुरी तरह कैसे परास्त हो गई।
युवाओं और जेन-जी (Gen-Z) का रुख: चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने पारंपरिक रैलियों से हटकर युवाओं, छात्रों, कैफे, कोचिंग संस्थानों और जिमों पर फोकस किया। स्थानीय मुद्दों और रोजगार-शिक्षा की मांग को लेकर युवाओं में जो गुस्सा था, उसने सीधा असर मतदान केंद्रों पर दिखाया।
संगठनात्मक सुस्ती बनाम जन सुराज की पेनी नजर: भाजपा इस उप-चुनाव को हल्के में ले रही थी या उसे अपने पुराने वोट बैंक पर अत्यधिक भरोसा था। इसके विपरीत, जन सुराज की पेशेवर टीमों ने हर एक बूथ पर 'अड्डा' बनाकर सूक्ष्म स्तर पर प्रबंधन किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि बूथवार वोटों की गिनती में भाजपा के दिग्गज चारों खाने चित्त नजर आए।
सत्ता विरोधी रुझान (Anti-Incumbency): स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं, जलजमाव, और शहरी विकास के मुद्दों को लेकर जनता में जो असंतोष था, उसने विपक्षी दल (जन सुराज) के पक्ष में माहौल तैयार कर दिया।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के ये नतीजे भारतीय जनता पार्टी के लिए एक बड़ी चेतावनी और आत्ममंथन का विषय हैं। रविशंकर प्रसाद और रामकृपाल यादव जैसे कद्दावर नेताओं के बूथों पर हार होना तथा महज 19 फीसदी बूथों पर सिमट जाना यह बताता है कि शहरी मतदाताओं का मि अब तेजी से बदल रहा है। प्रशांत किशोर की यह चुनावी जीत न केवल जन सुराज पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक सफलता है, बल्कि आने वाले समय में बिहार की मुख्यधारा की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह से नया मोड़ देने वाली साबित होगी।