स्नातकोत्तर और बीएड पाठ्यक्रमों में बड़े बदलाव, शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने पर जोर
दरभंगा: ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के प्रशासनिक भवन स्थित सभाकक्ष में कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में 'विद्वत परिषद' (Academic Council) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे को आधुनिक बनाने और छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक में मुख्य रूप से स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में संशोधन और बीएड (B.Ed) कोर्स की संरचना को सुदृढ़ करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के मुख्य बिंदु और निर्णय
विद्वत परिषद की इस बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, डीन और वरिष्ठ शिक्षाविदों ने भाग लिया। चर्चा के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:
स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में व्यापक संशोधन
विश्वविद्यालय ने निर्णय लिया है कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप सभी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों का पुनर्गठन किया जाएगा।
पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण: पाठ्यक्रमों में नए और समसामयिक विषयों को शामिल किया जाएगा, ताकि छात्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि वे व्यावहारिक रूप से भी सक्षम बनें।
अधिसूचनाएं: सभी विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि वे संशोधित सिलेबस की अधिसूचना जल्द ही जारी करें ताकि सत्रों में देरी न हो।
बीएड (B.Ed) पाठ्यक्रम पर विशेष फोकस
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बीएड पाठ्यक्रम को लेकर रहा। शिक्षकों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:
मानकों का अनुपालन: बीएड कॉलेजों को एनसीटीई (NCTE) के मानकों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
व्यावहारिक प्रशिक्षण: बीएड छात्रों के लिए स्कूलों में 'इंटर्नशिप' को अधिक प्रभावी बनाने की योजना है। छात्रों को स्कूलों में जाकर शिक्षण का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
मूल्यांकन प्रक्रिया: परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और निष्पक्ष परीक्षक प्रणाली को अपनाने पर सहमति बनी।
कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी का विजन
बैठक को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य न केवल डिग्री बांटना है, बल्कि ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।
गुणवत्ता और समयबद्धता: कुलपति ने कहा, "हमारी प्राथमिकता है कि अकादमिक कैलेंडर का शत-प्रतिशत पालन हो। परीक्षाएं समय पर हों और परिणाम की घोषणा बिना विलंब के की जाए।"
अनुसंधान को बढ़ावा: उन्होंने विभागों के अध्यक्षों से आह्वान किया कि वे अपने शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय में एक ऐसा वातावरण बनाने पर जोर दिया जहाँ नवाचार (Innovation) को बढ़ावा मिले।
शैक्षणिक सुधार के लिए भविष्य की कार्ययोजना
विद्वत परिषद ने यह भी तय किया है कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय में निम्नलिखित कदम उठाए जाएंगे:
डिजिटलीकरण: विश्वविद्यालय के संपूर्ण शैक्षणिक डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना, जिससे छात्रों को अपने परिणामों और नामांकन प्रक्रिया में कोई परेशानी न हो।
विशेषज्ञ व्याख्यान: समय-समय पर विभिन्न विषयों में विषय विशेषज्ञों को बुलाकर छात्रों के लिए विशेष व्याख्यान आयोजित करना।
रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम: ऐसे सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्सेज की शुरुआत करना, जो सीधे तौर पर छात्रों को रोजगार के अवसर दिला सकें।
बैठक का महत्व
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक रैंकिंग और साख को सुधारने के लिए प्रयासरत है। स्नातकोत्तर और बीएड पाठ्यक्रमों में सुधार सीधे तौर पर हजारों छात्रों के करियर को प्रभावित करेगा। बैठक में मौजूद सदस्यों ने सर्वसम्मति से इन निर्णयों का स्वागत किया और विश्वविद्यालय के विकास में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद की यह बैठक शैक्षणिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी का स्पष्ट संदेश है कि विश्वविद्यालय में अनुशासन और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि इन निर्णयों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो आने वाले दिनों में मिथिला विश्वविद्यालय एक नए स्वरूप में दिखाई देगा, जो न केवल बिहार बल्कि देश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक उदाहरण पेश करेगा।