पूर्णिया में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस का बड़ा शिकंजा: स्पेशल विजिलेंस टीम ने बिजली विभाग के जेई (Junior Engineer) और दो टेक्निकल सहायकों को घूस लेते रंगेहाथ किया गिरफ्तार; विभाग में मचा हड़कंप
पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ विजिलेंस (Vigilance) विभाग की एक बेहद सनसनीखेज और बड़ी कार्रवाई सामने आ रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही विशेष निगरानी इकाई (Special Vigilance Unit - SVU) की टीम ने पूर्णिया में एक बड़ी छापेमारी करते हुए बिजली विभाग के एक कनीय अभियंता (JE) और दो तकनीकी सहायकों (Technical Assistants) को गुप्त सूचना के आधार पर रिश्वत (Bribery) लेते हुए रंगेहाथ दबोच लिया। विजिलेंस टीम की इस अचानक और ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूर्णिया विद्युत विभाग के कार्यालयों में हड़कंप मच गया और भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मियों के बीच चीख-पुकार व खौफ का माहौल बन गया। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी महकमों में आम जनता और उपभोक्ताओं का शोषण करने वाले भ्रष्ट तंत्र को अब बख्शा नहीं जाएगा।
छापेमारी की पृष्ठभूमि: कैसे बिछाया गया विजिलेंस का जाल?
यह पूरी कार्रवाई एक पीड़ित उपभोक्ता या स्थानीय व्यक्ति की गुप्त शिकायत पर आधारित थी, जिसने बिजली विभाग के इन भ्रष्ट अधिकारियों की कारगुजारियों से तंग आकर विजिलेंस के दरवाजे खटखटाए थे।
रिश्वत की मांग से परेशान था उपभोक्ता: प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्णिया क्षेत्र में बिजली विभाग से जुड़ा कोई वैध काम (जैसे नया कनेक्शन, ट्रांसफॉर्मर लगवाने, या लोड बढ़ाने अथवा बिल सुधारने) कराने की एवज में बिजली विभाग के इन कर्मियों द्वारा लगातार अवैध रूप से पैसों की मांग की जा रही थी। पीड़ित उपभोक्ता बार-बार कार्यालय के चक्कर काटकर थक चुका था, लेकिन अधिकारी बिना घूस दिए फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं थे।
विजिलेंस में दर्ज कराई गई शिकायत: जब उपभोक्ता रिश्वत देने में असमर्थ और प्रताड़ित महसूस करने लगा, तो उसने पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई (Special Vigilance Unit) के समक्ष लिखित और साक्ष्य आधारित शिकायत दर्ज कराई। विजिलेंस की तकनीकी सेल ने मामले की सत्यता की जांच की और शिकायत को प्रथम दृष्टया सही पाया।
विजिलेंस टीम की रेड: जेई और दो टेक्निकल सहायक रंगेहाथ गिरफ्तार
शिकायत के सही पाए जाने के बाद विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने एक गोपनीय योजना बनाई और पूर्णिया के लिए अपनी विशेष छापामार टीम रवाना की।
योजनाबद्ध तरीके से बिछाया गया जाल: पूर्व नियोजित रणनीति के तहत शिकायतकर्ता को रासायनिक लगे हुए नोटों (Chemical-laced currency notes) के साथ रिश्वत की राशि देने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय या तयशुदा ठिकाने पर भेजा गया।
रंगेहाथ गिरफ्तारी: जैसे ही कनीय अभियंता (JE) और उसके दो तकनीकी सहयोगियों ने उपभोक्ता से घूस की रकम अपने हाथों में ली, वैसे ही आसपास सादे लिबास में पहले से मुस्तैद विजिलेंस की विशेष टीम ने चारों तरफ से घेरकर उन्हें दबोच लिया। विजिलेंस टीम द्वारा की गई हाथ की धुलाई (Hand Wash Test) में रासायनिक रंगों के प्रमाण स्पष्ट रूप से उभर आए, जिससे आरोपियों की संलिप्तता पूरी तरह साबित हो गई।
विभाग में कोहराम और आगे की कानूनी प्रक्रिया
विजिलेंस टीम द्वारा एक साथ एक जेई और दो टेक्निकल सहायकों को घूस लेते गिरफ्तार किए जाने की खबर आग की तरह पूरे जिले में फैल गई।
कार्यालय में अफरातफरी: गिरफ्तारी के तुरंत बाद विजिलेंस टीम तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर सुरक्षित स्थान पर पूछताछ के लिए निकल पड़ी। बिजली विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों में इस बात को लेकर खौफ व्याप्त हो गया कि कहीं उनकी संलिप्तता की भी जांच न शुरू हो जाए।
विशेष अदालत में पेशी: विजिलेंस के नियमों के अनुसार, आरोपियों से प्राथमिक पूछताछ करने के बाद उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के सुसंगत धाराओं के तहत विशेष निगरानी न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजा जाएगा।
पूर्णिया में स्पेशल विजिलेंस टीम द्वारा बिजली विभाग के जेई और दो टेक्निकल सहायकों को घूस लेते गिरफ्तार किए जाने की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां कितनी सक्रिय हैं। यह घटना उन तमाम भ्रष्ट कर्मियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो जनता के पैसों और उनकी लाचारी का फायदा उठाकर अवैध कमाई करने की फिराक में रहते हैं। इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से ही सुशासन और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव मजबूत होती है।